Friday, March 13, 2026
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वेंटिलेटर पर देहात क्षेत्र की सीएचसी

  • बाहर से मंगा रहे दवाई, आसपास बने मेडिकल स्टोर से सेटिंग का खेल
  • ओपीडी से गायब रहते हैं चिकित्सक, अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो रहे, मशीन फांक रही धूल

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: सरधना सीएचसी का ढर्रा पूरी तरह बिगड़ा पड़ा है। गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के लिए बाहर से दवाई मंगाई जा रही है। 1000, 1500 रुपये तक की दवाई का पर्चा तीमारदारों को थमाया जा रहा है। आसपास स्थित मेडिकल स्टोर से सेटिंग के तहत यह खेल चल रहा है। इतना ही नहीं ओपीडी से चिकित्सक गायब रहते हैं। सालों से अल्ट्रासाउंड मशीन धूल फांक रही है।

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निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराने का खेल किया जा रहा है। आपातकाल वार्ड की हालत यह है कि घंटों मरीज तड़पते रहते हैं। गंदगी की आलम यह है कि स्वस्थ व्यक्ति ही यहां आकर बीमारी का शिकार हो जाए। कुल मिलाकर लोगों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए चल रही सरधना सीएचसी खुद बीमार है। अस्पताल को प्रशासनिक इलाज की जरूरत है। ताकि अस्पताल की हालत सुधर सके।

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सरधना सीएचसी का स्टाफ अपनी मनमानी को लेकर हमेशा बदनाम रहा है। जेब गर्म करने को लेकर चिकित्सक बाहर से दवाई लिखते हैं। जिसके चलते यहां कई बार तालाबंदी हो चुकी है। कई-कई दिन तक अनिश्चित कालीन धरने चल चुके हैं। मगर अस्पताल के हालात आज भी बद से बदतर हैं। महिला विंग में आनी वाली गर्भवती महिला की डिलीवरी के लिए तीमारदारों को पर्चा थमाकर बाहर से दवाई मंगवाई जा रही है। ये दवाई कोई 10-20 की नहीं, बल्कि 1000,1500 रुपये तक के पर्चे तीमारदार को दिए जा रहे हैं।

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आसपास बने मेडिकल स्टोर से सेटिंग के तहत यह खेल चलता है। इससे पहले भी कई बार मेडिकल स्टोर पर चिकित्सकों के नाम के साथ दवाई के पर्चों की सूची समेत रजिस्टर पकड़े जा चुके हैं। डिलीवरी के बाद नजराना लेने की प्रथा अलग है। मतलब डिलीवरी कराने के लिए जेब खाली करनी ही पड़ेगी। सरकार की मुफ्त स्वास्थ्य सवा का सरधना सीएचसी में ढोल फाड़ रखा है। बात यहीं नहीं रुक रही है। अस्पताल में ओपीडी से चिकित्सक अपनी मर्जी से गायब हो जाते हैं। सालों से अल्ट्रासाउंड मशीन धूल फांक रही है।

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प्राइवेट सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराने का खेल चल रहा है। वो भी ऐसे सेंटर से जिसके मानक को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पर्ची बनवाने के लिए भीड़ रहती है और कर्मचारी बातों में मशगूल रहते हैं। डिस्पेंसरी से फार्मासिस्ट गायब रहता है। नौसिखिया दवाई बांटते मिलते हैं। गंदगी के सवाल पर तो देखने वाला ही अपना माथा पकड़ लेगा। कुल मिलाकर सीएचसी को खुद प्रशासनिक अनुशासन व इलाज की जरूरत है।

अल्ट्रासाउंड मशीन फांक रही धूल

सीएचसी सरधना में करीब छह साल पहले अल्ट्रासाउंड मशीन आई थी। मगर रेडियोजोजिस्ट नहीं होने के कारण यह मशीन आज तक धूल फांक रही है। एक बार भी मशीन उपयोग नहीं हुई है। बाहर से अल्ट्रासाउंड कराए जा रहे हैं।

फार्मासिस्ट की मनमानी पड़ रही भारी

करीब चार साल से तैनात फार्मासिस्ट अशोक यहां मठाधीश बना बैठा है। दो बार तबादला होने के बाद भी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं है। डिस्पेसरी चलाने के बजाए नौसिखियों को दवाई बांटने पर छोड़कर मोज मारता है। वर्तमान में भी फार्मासिस्ट के तबादले के आदेश आए हुए हैं। मगर अपनी सेटिंग से अभी तक कुर्सी से जमा हुआ है।

सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप

अस्पताल में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। सभी शौचालयों की हालत यह है कि अंदर घुसते ही अच्छे खासे व्यक्ति को उलटी आ जाए। इतनी गंदगी की पलभर रुकना मुश्किल है। दीवारों पर पान मसालों से पेंटिंग बनी हुई हैं। परिसर में कूड़ा फैला हुआ रहता है।

डिलीवरी करने के नाम पर हो रही लूट

डिलीवरी के नाम पर बाहर से दवाई मंगाकर मरीजों की जेब काटी जा रही है। सीजर के लिए 1000 से 1500 रुपये तक की दवाई के पर्चे थमाए जा रहे हैं। आदर्शनगर मोहल्ला निवासी पूजा तीन दिन पूर्व सीजर के लिए सीएचसी में आई थी। पूजा का कहना है कि सीजर से पहले उनके पति को दवाई का पर्चा दिया गया।

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जिसमें करीब 1200 रुपये की दवाई अस्पताल के बाहर बने मेडिकल स्टोर से लानी पड़ी। नगर की ही रानी पत्नी नौशाद का कहना है कि उनके पति से करीब 1500 रुपये की दवाई चिकित्सक ने बाहर से मंगाई। इतना ही नहीं स्टाफ का व्यवहार ठीक नहीं है। जबरदस्ती अस्पताल से भेजने की कोशिश करते हैं।

आपातकाल कक्ष में तड़पते रहते हैं मरीज

अस्पताल के आपातकाल कक्ष की हालत भी बेहद खराब है। कक्ष से चिकित्सक गायब रहता है। यहां आने वाले घायलों को घंटों तड़पना पड़ता है। स्टाफ के नखरे झेलने के बाद इलाज मिलता है। डॉक्टरी करने के नाम पर लोगों की जेब ढीली की जाती है। दो दिन पूर्व भी तीन घंटे तक चिकित्सक नहीं आने पर लोगों ने यहां हंगामा किया था।

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