Tuesday, October 26, 2021
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झूला घोटाला: निगम के एक्सईएन समेत तीन इंजीनियरों की गर्दन फंसी

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  • तत्कालीन नगरायुक्त ने कार्रवाई के लिए शासन को लिखा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम में घोटाले दर घोटाले सामने आ रहे हैं। झूला घोटाला, जिसमें एक्सईएन समेत तीन इंजीनियरों की गर्दन फंस गई है। इनके खिलाफ सहायक नगरायुक्त की जांच रिपोर्ट के बाद तत्कालीन नगरायुक्त डा. अरविन्द चौरसिया ने अपने तबादले से दो दिन पहले शासन को घोटाले में फंसे एक्सईएन, एई व जेई के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिख दिया।

अब इनके खिलाफ कार्रवाई होना लगभगत तय माना जा रहा है। झूला घोटाला एक वर्ष पहले हुआ। नगर निगम ने पार्कों में झूले लगाने का निर्णय लिया था। इसका दो करोड़ का टेंडर किया गया। टेंडर अक्षय एसोसिएट्स के पास था। कुछ पार्कों में झूले लगाये गए, मगर उनकी गुणवत्ता बहुत खराब थी।

एक झूले पर दस लाख रुपये खर्च होना दर्शाया गया था, लेकिन झूले हलके थे। दो कुंतल भार भी लगाये गए झूले का नहीं था। तब 45 रुपये प्रति किलोग्राम लोहा था। यदि डबल दर भी लगा दी जाए तो भी 90 हजार रुपये का बैठता है, मगर इस एक झूले के 10 लाख रुपये वसूले गए।

इसकी शिकायत पूर्व पार्षद यासीन पहलवान ने कमिश्नर से की थी। खूब बवाल मचा, लेकिन कोई कार्रवाई इसमें नहीं की गई। दो करोड़ के टेंडर में से 92 लाख का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया। बवाल मचा तो तत्कालीन नगरायुक्त डा. अरविन्द चौरसिया ने भुगतान रोक दिया।

अभी एक करोड़ देना और बाकी था। इसी बीच इसकी जांच सहायक नगरायुक्त ब्रजपाल सिंह को सौंप दी। हाल ही में ब्रजपाल सिंह ने झूला घोटाले की जांच कर तत्कालीन नगरायुक्त को सौंप दी थी, जिसमें जांच पड़ताल के दौरान झूला खरीदने के नाम पर घोटाला होना पाया गया।

इसकी रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन नगरायुक्त डा. अरविन्द चौरसिया ने तबादला होने से दो दिन पहले ही भ्रष्टाचार में लिप्त एक्सईएन निना सिंह, एई राजपाल यादव व जेई राजेन्द्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शासन को लिख दिया है। उनकी इस रिपोर्ट के आधर पर तीनों इंजीनियरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

अब भूसे के टेंडर की जांच डीएम को

नगर निगम में भूसा टेंडर में हुए भ्रष्टाचार की जांच प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीएम के. बालाजी को सौंप दी है। भूसा टेंडर में बड़ा घालमेल हुआ है। इसके टेंडर को लेकर एई राजपाल यादव ने आपत्ति व्यक्त कर दी थी, तब राजपाल यादव गोशाला के प्रभारी थे। इसी वजह से तब इसका टेंडर रुक गया था। निगम अधिकारियों ने गोशाला प्रभारी के पद से राजपाल यादव को हटाया गया, इसके बाद ही टेंडर किया।

गोशाला के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार किया जा रहा है। ऐसे आरोप पार्षद मनीष पंवार ने भी लगाये है। उन्होंने इसकी शिकायत भी शासन से की थी। तत्कालीन मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी प्रेम सिंह ने भी भूसा टेंडर में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मामले की जांच कराने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की थी। शासन ने शुक्रवार को भूसा टेंडर की जांच डीएम के.बालाजी को सौंप दी है। डीएम स्तर से ही इसकी जांच चलेगी, जिसके बाद ही शासन को इसकी रिपोर्ट भेजी जाएगी। इस मामले में नगर निगम के अफसरों की गर्दन फंस सकती है।

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