मित्रो! रील पे चर्चा में आपका स्वागत है। चाय पे चर्चा के बाद रील पे चर्चा मेरा सबसे बड़ा पैशन है। जो मुझे फॉलो करते हैं, वो अवश्य जानते होंगे कि मैं बचपन से ही नेहरू जी का बड़ा प्रशंसक रहा हूं। एक बार जब उनके भाषण को सुन रहा था, भाषण मुझे इतना अच्छा लगा कि मैं ताली बजाने लगा। ये देख कर पंडित नेहरू खुद चल कर मेरे पास आए और मुझे ताली बजाने से रोका। कहने लगे तुम ताली बजाने वालों में नहीं हो। तुमको ईश्वर ने ताली बजवाने के लिए इस पृथ्वी पे भेजा है। उस दिने से मैं सिर्फ तालियां ही बजवा रहा हूं।
यह सत्य है कि सिर्फ यही नहीं कि मैंने आपके विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्व विद्यालय का दर्जा नहीं दिया, बल्कि मैंने तो देश के तमाम विश्व स्तरीय विश्व विद्यालयों की गिरती हुई साख को बचाने के लिए कोई प्रयास भी नहीं किया। ऐसा मैंने इसलिए किया, क्योंकि मैं जानता था कि कुछ बड़ा करने के लिए ऐसे छोटे-मोटे कई बलिदान हमको देने होंगे। एक समय था जब केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त होना एक विशेष महत्व रखता था। आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर या सरकारी नौकरी करने का हमारे युवा साथियों में पैशन हुआ करता था। लेकिन आप मेरे अपने हैं। अपनों से ही मन की बात की जाती है। मैं आपके भ्रम को और नहीं बढ़ाना चाहता हूं। हैं जानता हूं कि अब देश बदल गया है। अब देश नौकरी को ठोकर पे रखता है, छोकरी को सर पे। अब वो नौकर नहीं बनना चाहता है, अब वो नौकर रखना चाहता है। हमारे पूर्वजों ने इस दासता को नौकरी नाम यूं ही नहीं दिया था।
देखे मित्रो! कितने उच्च स्तर का सोच थी, हमारे पुरखों की। पूर्व की सरकारों ने ये सत्य हमसे छिपा कर रखा। हमारी पीढ़ियां दर पीढ़ियां पथभ्रष्ट होती चली गर्इं। वो तो राम लला की कृपा से ताजा-ताजा मिली आजादी ने हमको हर प्रकार की दासता से मुक्त करवाया है। आज हमारे लिए ये गर्व की बात है कि अब हम इस्लामपुर में नहीं, ईश्वरपुर में भूखे मरते हैं। हमने निश्चय कर लिया है कि हम प्रताड़ित भी होंगे तो किसी अपने से ही होंगे। प्रताड़ना देने का आत्मिक सुख हम विधर्मियों को कतई नहीं लेने देंगे।
मित्रो! मुझे ईश्वर सदैव सपनों में आकर कहते हैं कि इन पथभ्रमित युवाओं के लिए कुछ सोचो, कुछ करो। पहले भी ईश्वरीय आदेश से मैंने पकोड़ा इंडस्ट्रीज की परिकल्पना प्रस्तुत की थी। जो शून्य लागत में किसी भी नाली या नाले के पास शासकीय भूमि पे प्रारम्भ की जा सकती है। मित्रो! इन दिनों एक और नया उद्योग चारों तरफ धूम मचा रहा है रील बनाने का उद्योग। हमारी नीतियों के चलते हर युवा के हाथ में स्मार्ट फोन है, जिस पर वो रील देख देख कर अपना बेरोजगारी का लिन पीरियड गुजारते हैं हमने डाटा एक कप चाय से भी सस्ता कर दिया है । एक कप चाय पी कर धन व्यर्थ करना बंद करें। आपके कई साथी रील बना कर काफी धन कमा रहे हैं। आप सभी खूब रील बनाए और खूब धन कूटें। देखना किसी दिन आप भी बहुत बड़े कॉरपोरेट बनेंगे और मेरे अभिन्न मित्र भी। शुभेच्छा सहित। आपका हितैषी।

