- घोल रहे वायु प्रदूषण में जहर, 50 से ज्यादा कोल्हू उगल रहे जहरीला धुआं, एनसीआर में ग्रेप सिस्टम लागू
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नाक के नीचे चल रहे कोल्हू
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती के बाद ग्रामीण क्षेत्र में कई दर्जन कोल्हू जहर उगल रहे हैं। इनमें से एक में भी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। इन कोल्हुओं ने ईंधन के रूप में प्लास्टिक, पॉलीथिन एवं रबर आदि जलाने से भी परहेज नहीं किया जा रहा है। जिससे इनसे निकलने वाला धुआं जहरीला हो गया है।

जनपद में बिना मानकों को चल रहे कोल्हू प्रदूषण का जहर घोल रहे हैं। जिले में 50 से अधिक कोल्हू का संचालन शुरू हो गया। जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। एनसीआर में ग्रेप सिस्टम लागू हो गया, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई शून्य है। सीजन के शुरुआत में ही प्रशासन ने कोल्हू चलाने के लिए कुछ मानक तैयार किए थे। हालांकि वे आदेश चिमनी के धुएं में उड़ते दिखाई दे रहे हैं। क्षेत्र में कई कोल्हू तो आबादी के भीतर कार्यरत हैं।
इन कोल्हुओं पर एक भी मानक के अनुरूप संचालित नहीं किया जा रहा है। शासन ने कोल्हू चलाने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी, धुआं निकलने वाली चिमनी की ऊंचाई एवं ईंधन के रूप में प्रयोग होने वाली सभी वस्तुएं निश्चित की थीं। इसके बावजूद सभी कोल्हू जहरीला धुआं उगल रहे हैं। मेरठ में शामली रोड अक्खेपुर, खरदौनी और इंचौली और गढ़ रोड व मवाना क्षेत्र में करीब 50 से अधिक कोल्हू चल रहे हैं।
इन कोल्हू के लिए जो एनजीटी ने गाइडलाइन जारी की गई थी, किसी ने कोई पालन नहीं किया गया। अधूरे मानकों के साथ ही कोल्हू शुरू कर दिया है। शामली रोड पर चल रहे दर्जनों कोल्हू की चिमनी से काला धुआं निकल रहा है, जिससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है। हालात यह है कि पंजाब और हरियाणा की पराली जलाने को कहा जाता है,

लेकिन यहां पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। शहर में प्रदूषण बढ़े तो बढ़ता रहे। शुक्रवार के मेरठ का प्रदूषण भी 250 पर पहुंच गया जो सबसे ज्यादा रिकार्ड किया गया। यही हालत रहे तो आगे भी लगातार कोल्हू की संख्या बढ़ती जाएगी और प्रदूषण पर लगाम नहीं लगेगी।
ग्रेप सिस्टम में करे कोल्हू पर कार्रवाई
एनसीआर क्षेत्र में बढ़ रहे प्रदूषण की रोकथाम के लिए करीब 15 दिन पहले ही एक अक्टूबर को ग्रेप सिस्टम लागू कर दिया गया। जिससे प्रदूषण की रोकथाम हो सके और ओर प्रतिबिंधित फ्यूल जलाने पर कार्रवाई हो सके। ग्रेप सिस्टम लागू करने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई कर सकता है। कोल्हू या किसी भी प्रदूषित इंडस्ट्री या अवैध इंडस्ट्री को बंद कर उस पर जुमार्ना लगा सकता है। अभी ग्रेप को लागू करे छह दिन हो गए हैं, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अभी कोई कार्रवाई नहीं की है।
इंचौली, खरदौनी और शामली रोड पर है ज्यादा कोल्हू
इंचौली, खरदौनी, शामली रोड पर सबसे ज्यादा कोल्हू है और यहां पर लगे कोल्हू पर पॉलीथिन जलाई जा रही है, जिससे सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलता है। चिमनियों से काला धुआं निकल रहा है, लेकिन यहां कोई देखने वाला नहीं है। पॉलीथिन के जलाने से लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत होती है, लेकिन इसके बावजूद लगातार कोल्हू का संचालन जारी रहता है।
ये हैं जरूरी दिशा-निर्देश
- कोल्हू को चलाने के लिए ऊंची चिमनी जिगजेग होनी वाली चाहिए
- किसी भी कोल्हू पर प्रतिबिंधित फ्यूल का इस्तेमाल न किया जाए
- कोल्हू पर पॉलीथिन का प्रयोग न किया जाए
- कोल्हू पर जिगजेग चिमनी और ऊंची होगी तो प्रदूषण कम होगा
- एनजीटी ने जो गाइडलाइन जारी की है, उसके अनुसार उसका संचालन किया जाए
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नहीं दिखते जिले में अवैध कोल्हू
जिले में अवैध रूप से कोल्हू चल रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ये कोल्हू दिखाई नहीं देते हैं। कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी अधिकारियों पर है, लेकिन यहां के अधिकारी अनदेखा कर रहे हैं। बढ़ते प्रदूषण की परेशानी शहरवासियों को झेलना पड़ रही है। जनवाणी टीम ने जांच पड़ताल की तो जिले में 50 से अधिक कोल्हू चलते मिले।
इसके बावजूद क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कुंभकर्णी नींद नहीं टूट रही है। जबकि एनजीटीऔर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्त निर्देश दिए हैं कि बिना मानक के कोल्हू का संचालन न किया जाए और प्रदूषण की रोकथाम को पुख्ता इंतजाम किए जाए।
मॉनिटरिंग को कमेटी गठित
ग्रेप सिस्टम के अंतर्गत जिले में मॉनिटरिंग के लिए कमेटी का गठन किया है। कमेटी लगातार मॉनिटरिंग कर रही है, जहां पर कमियां मिलेगी वहां पर कार्रवाई की जाएगी। कोल्हू का संचालन शुरू हुआ है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -भुवन प्रकाश यादव, प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी

