Friday, March 20, 2026
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64 दुकानों को लेकर गतिरोध, व्यापारी कर रहे विरोध

  • बेगमपुल पर शास्त्री की प्रतिमा के पीछे रैपिड रेल के स्टेशन के लिए दुकानें कराई जा रही खाली

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बेगमपुल पर रैपिड रेल के स्टेशन के लिए दुकानें खाली कराई जा रही है, लेकिन दुकान खाली कराने को लेकर गतिरोध पैदा हो गया है। व्यापारियों ने दो टूक ऐलान कर दिया है कि दुकान खाली नहीं की जाएगी। पहले दुकान सही स्थान पर दी जाए और ये सब लिखित एग्रीमेंट किया जाएगा। इसको लेकर व्यापारी और एनसीआरटीसी के अधिकारी आमने-सामने आ गए हैं।

बेगमपुल पर रैपिड रेल का स्टेशन प्रस्तावित है। इसके लिए बेगमपुल से जीरो माइल्स तक सड़क के दोनों तरफ दुकानें बनी हुई है। इन दुकानों को एनसीआरटीसी अपने कब्जे में लेकर व्यापारियों को अन्यंत्र शिफ्ट करना चाहते हैं। इसी को लेकर पिछले एक सप्ताह से गतिरोध चल रहा है।

व्यापारियों को एनसीआरटीसी के अधिकारियों ने कहा है कि मथुरा प्लेस में चार वर्ष के लिए दुकान किराये पर लेकर व्यापारियों को दी जाएगी। डेढ़ लाख रुपये फर्नीचर तैयार करने के लिए व्यापारी को दिये जाएंगे, लेकिन चार वर्ष बाद नई दुकान बनाकर देने का वादा किया जा रहा है, लेकिन यह वादा लिखित में नहीं दिया जा रहा है। इसी को लेकर व्यापारी आक्रोशित हो गए हैं। व्यापारियों को एनसीआरटीसी पर भरोसा नहीं है।

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा के पीछे जो मार्केट है, उसकी 64 दुकानों को तोड़ा जाएगा। यह एनसीआरटीसी ने स्पष्ट कर दिया है। अब इनको शिफ्ट करने के लिए मथुरा प्लेस के बेसमेंट में दुकान दी जा रही है, लेकिन इस पर व्यापारी सहमत नहीं है। व्यापारियों की वर्तमान में आॅन रोड दुकान है और रोजगार लंबे समय से चल रहे हैं। ऐसे में दिक्कत तो होगी, ऐसा व्यापारियों का मानना है।

कोठी-80 में कुछ परिवार मकान बनाकर भी रह रहे हैं। ऐसे परिवार को डोरली में वन-बेडरूम बनाकर दिया जा रहा है। करीब 10 परिवारों को मकान बनाकर दिया जाएगा। इसके नोटिस भी चस्पा कर दिये गए हैं। यहां दो पेट्रोल पंप भी है, जिनको भी हटाया जाएगा। हालांकि इसके बारे में एनसीआरटीसी ने कोई संकेत अभी नहीं दिये हैं।

अंबाला बस स्टैंड मवाना अड्डे पर किया शिफ्ट

अंबाला बस स्टैंड को मवाना बस स्टैंड पर शिफ्ट कर दिया गया है। जल्द ही अंबाला बस स्टैंड की बजाय बसें अब मवाना बस स्टैंड से चलेगी। इसकी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इस पर सहमति बन गई है। प्रशासन ने इसकी तमाम कागजी कार्रवाई कर दी है।

नहीं मिलेगा मुआवजा

कैंट की कोठी-80 में रह रहे लोग एनसीआरटीसी से मुआवजा मांग रहे थे, लेकिन मुआवजा नहीं देने का ऐलान कर दिया है। कहा जा रहा है कि एनसीआरटीसी कैंट की जमीन का मुआवजा नहीं दे सकता। क्योंकि इसका बैनामा नहीं है। सेन्य क्षेत्र में ये जमीन आती है। इसको लेकर भी गतिरोध पैदा हो गया है। लोग मकान छोड़ने के लिए मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं।

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