- छोटी-छोटी बातों पर जान गंवा रहे युवक और युवती
- डिप्रेशन के अलावा निर्णय लेने की क्षमता कम होना भी कारण
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नर हो न निराश करो मन को, कुछ काम करो, जग में रहकर कुछ नाम करो। राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त की इस प्रेरणादायी पंक्तियों को आज का युवा मानने को तैयार नहीं है। छोटा-सा दुख और आहत भावनाएं युवाओं को नकारात्मक सोचने के लिये विवश कर रही है। परिवार में बढ़ती मोबाइल संस्कृति के कारण बच्चों पर घर वालों का ज्यादा ध्यान न देना भी एक कारण बन रहा है।
प्यार मौहब्बत के किस्सों के कारण लोग सदियों से सुसाइड करते आ रहे हैं, लेकिन अब युवा डिप्रेशन के कारण सुसाइड करने से परहेज नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि इस साल के शुरु के छह महीनों में 125 से ज्यादा लोग सुसाइड कर चुके हैं और इसमें युवाओं की संख्या 60 से अधिक है।
गत वर्ष अक्तूबर के महीने में दो दिन में तीन युवाओं ने सुसाइड कर लिया था। इन तीनों ने ही फांसी के फंदे पर लटककर जान दे दी। आनंद अस्पताल में नर्सिंग की होनहार छात्रा आरजू ने अपने कमरे में दुपट्टे से फंदा बनाकर पंखे से लटककर सुसाइड कर लिया था। पल्लवपुरम में बीएससी के छात्र यश का शव कमरे में पंखे से लटक कर मर गया था। इंचौली थानाक्षेत्र में किसान के युवा बेटे ने खुद की कनपटी पर गोली मारकर मौत चुन ली।

पढ़ लिख कर कुछ बेहतर करने की उम्र में आखिर युवा मौत को क्यों चुन रहे हैं यह एक बड़ा सवाल है, लेकिन युवाओं में इस तरह आत्महत्याओं का बढ़ना चिंताजनक है। आनंद नर्सिंग कॉलेज में बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा आरजू ब्लड कैंसर से लड़ रही थी। परिवार के लोगों से उसकी लगातार बातचीत हो रही थी। परिवार को नहीं लगा कि बेटी ऐसा कदम उठाएगी।
पल्लवपुरम में बीसीए का छात्र यश शर्मा ने परिवार के साथ खाना खाया और बाद में कमरे में जाकर फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस कारण तलाशती रही और सुसाइड करने वाले तीनों युवकों के मोबाइल से राज जानने की कोशिश करती रही। नौचंदी थाना क्षेत्र के चित्रकूट कॉलोनी निवासी दुष्यंत डी.जे. बजाने का काम करता था। एक मुस्लिम युवती से प्यार करने और धर्म परिवर्तन के दबाव के कारण सुसाइड कर लिया।
सुभारती मेडिकल कालेज की बीडीएस की छात्रा ने छत से कूदकर सुसाइड कर लिया। आरोप था कि छात्रा अपने सहपाठी के घटिया व्यवहार से परेशान थी। भावनपुर थाना के औरंगाबाद गांव निवासी 21 वर्षीय नितिन नामक युवक ने सुसाइड कर लिया। नितिन को उसके बहन के साथ दुष्कर्म करने वाले परेशान कर रहे थे।
युवाओं में सहनशीलता खत्म हो रही है। अपनी परेशानियां घर वालों से शेयर नहीं करते हैं और कहीं कहीं मां बाप भी अपने बच्चों पर ध्यान नहीं दे रहे है। इससे बच्चा डिप्रेशन में आ जाता है और उसमें पाजिटिव सहारा नहीं मिलता है और वो मरने की तरफ कदम बढ़ा लेता है। एक खास तरह का हारमोन बच्चे के दिमाग पर निगेटिव असर डालता है।
-डा. अनीता मोरल, मनोविज्ञान विभाग मेरठ कालेज

