
कई दशक पहले इस शीर्षक की फिल्म आई थी, पर आज यह सवाल बन कई अलग अलग रूपों में खड़ा है। असल जिंदगी में इस साल एक महिला डॉक्टर वंदना मोहनदास को केरल में मरीज के तीमारदारों ने मार डाला और असम के एक बुजुर्ग डॉक्टर को मरीज के साथ आई भीड ने 2019 में। बीते कोरोना काल में कितने ही डॉक्टर जान गंवाए। एक बिगडे केस में एक महिला डॉक्टर को राजस्थान में इतना बदनाम व प्रताडित किया गया कि उसने आत्महत्या कर ली। हाल ही में एक युवा कार्डियक सजर्न दिल की ही बिमारी में 40 साल की उम्र में चल बसा। हर शहर के और आसपास के एैसे वैसे अनेक उदाहरण हैं। जीवन मृत्यु के संघर्ष से डॉक्टरी पेशे का चोली दामन का साथ है। मेडिकल कॉलेज में दाखिले को तैयारी करते छात्रों के नाकामी में ‘कोटा कोचिंग’ जैसे ही दुखद आंकडे हैं।