Wednesday, April 1, 2026
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Meerut News: कांवड़ यात्रा के बाद हो सकती है सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सेंट्रल मार्केट में तीन मंजिला कांप्लेक्स समेत 32 अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए आवास विकास अधिकारियों ने पौने दो करोड़ के ई-टेंडर की वित्तीय बिड को स्वीकृति के लिए लखनऊ मुख्यालय भेजा है। वहां से स्वीकृति मिलने की आशंका व्यक्त की जा रही थी, लेकिन सोमवार को स्वीकृति नहीं मिली। आवास विकास अधिकारी का कहना है कि बुधवार तक स्वीकृति मिल सकती है। स्वीकृति मिलते ही सेंट्रल मार्केट पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो जाएगी। इससे पहले शासन से ध्वस्तीकरण की ई-टेंडर की वित्तीय बिड खोलने के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। एसीएम सिविल लाइन को प्रशासक भी नियुक्त किया गया है।

17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने व्यापारी की टाइम एक्सटेंशन मांग वाली याचिका स्वीकार करते हुए आवास विकास को जवाब दाखिल करने के लिए 21 दिन का समय देते हुए तब तक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया। 17 दिसंबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में तीन मंजिला काप्ंलेक्स को ध्वस्त करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने का समय दिया। चार मार्च को व्यापारियों ने परिसर खाली करने के लिए और समय दिया जाने जाने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की। 29 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने व्यापारियों की समय सीमा बढ़ाने वाली याचिका को खारिज कर दिया। आवास विकास परिषद ने दो मई को सेंट्रल मार्केट में बनी 22 दुकानों को खाली करने का नोटिस चस्पा किया। जिसके विरोध में 20 मई को सेंट्रल मार्केट व जागृति विहार के व्यापारियों ने बाजार बंद रखा गया।

22 मई को सर्किट हाउस में राज्यमंत्री ने प्रशासनिक, मेडा व व्यापारी नेताओं के साथ वार्ता की। चार जून को आवास विकास ने 80 से ज्यादा आंवटियों का आवंटन रद कर दिया। दुकानों के ध्वस्तीकरण के लिए पौने दो करोड़ का ई-टेंडर भी खोल दिया गया है। शासन की मंजूरी के बाद 21 जून को ई-टेंडर की वित्तीय बिड खोल दी। प्रशासन ने एसीएम सिविल लाइन को प्रशासक भी नियुक्त कर दिया है। आवास विकास परिषद अधिशासी अभियंता अफताब अहमद का कहना है कि वित्तीय बिड की स्वीकृति के लिए लखनऊ मुख्यालय भेजा गया है। आवास विकास परिषद मेरठ के अधिकारियों को आशंका थी कि सोमवार को लखनऊ मुख्यालय से स्वीकृति मिल सकती है, लेकिन सोमवार को स्वीकृति नहीं मिली। उनका मानना है कि बुधवार तक लखनऊ मुख्यालय से स्वीकृति मिल सकती है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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