- सैकड़ों बीघा जमीन में फैली गांधी आश्रम की जमीन पर लोगों की लगी गिद्ध दृष्टि
- माफिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: खादी ग्रामोद्योग डायरेक्टर के आॅफिस से चंद कदम की दूरी पर गांधी आश्रम है। सैकड़ों बीघा जमीन में फैले गांधी आश्रम की जमीन पर कुछ लोगों की गिद्ध दृष्टि लगी हैं। तीन दिन से गांधी आश्रम की जमीन में तोड़फोड़ चल रही है। ये तोड़फोड़ गांधी आश्रम के कर्मचारी या फिर संस्था नहीं, बल्कि गैर आश्रम के लोग हैं।
ऐसा तब है जब खादी ग्रामोद्योग डायरेक्टर ने गांधी आश्रम की जमीन पर किसी तरह के निर्माण व तोड़फोड़ पर रोक लगा रखी है। जब रोक है तो फिर डायरेक्टर के आॅफिस से चंद कदम की दूरी पर चल रही तोड़फोड़ आखिर दिखाई क्यों नहीं दे रही हैं? पेट्रोल पंप के लिए जमीन लीज पर देने की शिकायत महेश चन्द्र पंथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कर माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

गांधी आश्रम के जिस स्थल पर तीन दिन से तोड़फोड़ चल रही है, उस स्थल पर कपड़ों की रंगाई का काम चलता था। राष्टÑीय ध्वस्त तिरंगा भी इसी बिल्डिंग में तैयार होता था, लेकिन गांधी आश्रम समिति के पदाधिकारियों ने ये पूरी यूनिट बंद कर दी तथा कर्मचारियों को कह दिया कि गांधी आश्रम घाटे में चल रहा है।

ऐसे में रंगाई वाली यूनिट को बंद करना पड़ रहा है। ऐसे में कर्मचारी यूनियन ने भी इस पर कोई आपत्ति नहीं की, जिसके बाद इस पूरी बिल्डिंग को प्राइवेट लोगों को लीज पर देने का बड़ा खेल खेला गया। इसकी शिकायत भी हुई, जिसके बाद खादी ग्रामोद्योग के डायरेक्टर ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए एक पत्र जारी किया, जिसमें कहा कि गांधी आश्रम की जमीन को लीज पर नहीं दिया जा सकता। ऐसे में निर्माण भी नहीं हो सकता, लेकिन यहां तीन दिन से तोड़फोड़ चल रही है। इसे रोका नहीं जा रहा है।

62 लाख फंड दुरुपयोग की चल रही जांच
तीन दिन से चल रही है तोड़फोड़, लेकिन इसमें कोई एफआईआर नहीं लिखवाई जा रही है। 2017-18 में एफआईआर के आदेश हुए थे। पीएम कार्यालय से इसकी जांच हुई थी। 62 लाख का फंड का दुरुपयोग करना जांच में माना गया था। इसके आदेश हो चुके हैं, फिर कार्रवाई नहीं हुई। महेश चंद्र पंथ ने इसकी शिकायत की थी, जिसके आधार पर पूरे मामले की जांच चल रही है।
गांधी आश्रम की सड़क पार जमीन भी हैं, जिसकी नई सोसायटी बनाई गई थी। उस सम्पत्ति को उसे नई सोसयाटी को दे दी गई थी। पृथ्वी सिंह इसके नये मेंबर बन गए थे। 62 लाख के गबन का दोषी पृथ्वी सिंह रावत का माना गया, लेकिन फिर भी फाइल दबा दी गई। कार्रवाई लंबे समय बाद भी नहीं हुई। 2007 में भी फंड के दुुरुपयोग होना पाया गया था। तब पृथ्वी सिंह रावत एकाउंटेंट हुआ करते थे, लेकिन वर्तमान में गांधी आश्रम समिति के सचिव पद पर है।

