- गोवंश, कुत्ता, भेड़, बकरी, घोड़ा सभी का अलग-अलग पंजीकरण शुल्क
- आवारा गोवंश पर नहीं नगर निगम का ध्यान, एंबुलेंस से भी नहीं मिलेगा उपचार
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: प्रदेश सरकार ने यूपी में 108 एंबुलेंस की तर्ज पर पशुपालकों के लिये भी हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। जैसे कि बीमार या घायल व्यक्ति के उपचार के लिए 108 नंबर एंबुलेंस पर कॉल करके सूचना देकर स्वास्थ्य संबंधी सरकारी सहायता प्राप्त की जा सकती है। ठीक उसी तर्ज पर पशुपालकों के लिये भी लखनऊ कंट्रोल रूम से 1962 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है।
हेल्पलाइन नंबर पर सूचना के आधार पर एंबुलेंस पशुपालक के यहां पहुंचेगी और बीमार एवं घायल पशुओं का उपचार देगी। जिन पशुओं का (गर्भधारण)कराना है एंबुलेंस टीम के द्वारा पशुपालक के घर पर ही वह सुविधा भी दी जायेगी, लेकिन सड़कों पर जो निराश्रित गोवंश घूम रहा है। उसके लिये यह एंबुलेंस सेवा सहारा नहीं बनेगी। भले ही वह सड़क पर घायल/बीमार अवस्था में तड़फता रहे। जनपद में 1962 पर यह सेवा 5 अप्रैल से शुरू की गई है।
पशुपालकों ने निराश्रित के रूप में खूंटे से जिन गोवंश को खोलकर खुला छोड़ दिया हो उस गोवंश की इन दिनों बड़ी बेकद्री देखने को इन दिनों मिल रही है। महानगर में भी इस तरह हजारों की संख्या में गोवंश खुले में सड़कों पर घूमते देखा जा सकता है। देहात क्षेत्र में भी यही हाल है। खेतों में फसलों को नष्ट करते आवारा गोवंशो को देखा जा सकता है। सरकार भले ही लाख दावे करे कि आवारा गोवंशों को पकड़कर गोशाला में भिजवा दिया और उनका रखरखाव एवं उपचार अच्छी तरह से किया जा रहा है, लेकिन हालात कुछ और ही बता रहे हैं,
जितना गोवंश गोशाला के अंदर नहीं होगा जितना गोवंश उस गोशाला के आसपास के क्षेत्र में खुले में घूमता देखा जा सकता है। जिसमें आवारा गोवंश सड़कों पर पॉलीथिन या कू ड़ा करकट खाकर पेट भरता है। वहीं यदि वह बीमार या सड़क हादसों में घायल हो जाये तो उसे उपचार भी नहीं मिल पाता। जिसके चलते वह तड़फ-तड़फ कर दम तोड़ देता है। प्रदेश सरकार के द्वारा पशुपालकों के लिये एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई है, लेकिन आवारा गोवंश को बीमार या घायल होने की स्थिति में यह एंबुलेंस सेवा लखनऊ कंट्रोल रूम 1962 पर सूचना के बाद भी उपचार नहीं करेगी।

सरकार ने केवल पशुपालकों के पशुओं के लिये यह सुविधा उपलब्ध कराई है न कि बीमार गोवंश या घायल निराश्रित गोवंश के लिये। जनपद में 8 एंबुलेंस मिली है, जोकि पशुपाल के घर पर जाकर पशुओं का तमाम ट्रीटमेंट करेगी। जिसमें लखनऊ के कंट्रोल रूम 1962 पर पशुपालन को सूचना देनी होगी। जिसके बाद जनपद की एंबुलेंस टीम एक्टिव होगी और पशुपाल के घर पहुंचकर सूचना को कवर करेगी। जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. अखिलेश गुप्ता ने बताया कि जो आठ एंबुलेंस मिली है। उनमें से दो सरधना पशु चिकित्सालय पर उपलब्ध हैं।
वहीं 2 एंबुलेंस परतापुर, 2 हस्तिनापुर व 2 मंशा देवी मंदिर मेरठ के निकट तैनात की गई है। जिसमें चार अलग-अलग रूटों पर रनिंग में रहती हैं और चार रिजर्व में रहती है। एक एंबुलेंस पर एक पशु चिकित्सक व एक सहायक चिकित्सक पेरावेट एक गाड़ी चालक रहता है। वहीं जिन पशुओं का उपचार कराना हो उसका पंजीकरण भी करना पड़ता है। जिसमें अलग-अलग पंजीकरण शुल्क जमा किया जाता है। गोवंश एवं भैंस के लिये 5-5 रुपये। कुत्तों के लिये 10 रुपये।
भेड़ व बकरी के लिये 2-2 रुपये का शुल्क रखा गया है। एंबुलेंस में सभी दवाइयां एवं बीमार पशुओं की देखभाल के लिये जो भी जरूरी दवाइयां चाहिएं वह सभी नि:शुल्क दी जाती है। पशुपालक सुबह 10 बजे से रात्रि आठ बजे तक कंट्रोल रूम पर सूचना देकर इस सेवा का लाभ उठा सकता है। वहीं जो आठ बजे के बाद सूचना मिलेगी उसे अगले दिन कवर किया जायेगा। वहीं जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अखिलेश गुप्ता ने बताया कि आवारा गोवंश एवं अन्य पशुओं के लिये यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।

