
सोनी मल्होत्रा |
मधुमेह कोई नई बीमारी नहीं है। इसके नाम से सभी परिचित हैं, पर पिछले कुछ सालों में विश्व में इस रोग के रोगियों की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि हुई है। भारत में हर 20 व्यक्तियों में से एक इस रोग का शिकार है और कितने ही ऐसे रोगी हैं, जिन्हें यह पता ही नहीं कि वे इस रोग के शिकार हैं। दुर्भाग्य से इस रोग को खत्म नहीं किया जा सकता पर पिछले कुछ समय में चिकित्सा क्षेत्र में हुए नए प्रयोगों ने ऐसी दवाओं की खोज कर डाली है जिससे इस बीमारी पर नियंत्रण संभव हुआ है। सही डाइट, व्यायाम व दवाओं द्वारा एक मधुमेह रोगी स्वस्थ सामान्य जीवन बिता सकता है।
हमारे शरीर को एनर्जी मिलती है शर्करा, स्टार्च व अन्य खाद्य पदार्थों से। पेनक्रियाज में उत्पादित हार्मोन इंसुलिन शर्करा व स्टार्च को एनर्जी में परिवर्तित करता है। मधुमेह में हमारा शरीर आवश्यक इंसुलिन उत्पादित नहीं कर पाता या इंसुलिन का सही प्रयोग करने में असमर्थ होता है। शर्करा इस स्थिति में रक्त में एकत्र होने लगती है या मूत्र के जरिए शरीर से बाहर आने लगती है। हमारे शरीर के टिश्यूज को शर्करा नहीं मिल पाती।
रक्त में ग्लूकोज की अधिक मात्र को ही मधुमेह या डायबिटीज के नाम से जाना जाता है। मधुमेह दो प्रकार की होती है। टाइप-1 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन नहीं बनाता। इसे इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज भी कहा जाता है। यह वायरल इन्फेक्शन या आॅटोइम्युन डिसआर्डर के कारण हो सकता है जिससे शरीर में इंसुलिन बनना ही बंद हो जाता है क्योंकि इंसुलिन बनाने वाले सेल्स पेनक्रि याज में नष्ट हो जाते हैं। यह टाइप वन बच्चों व जवान लोगों में अधिक देखी जा सकती है।
टाइप – 2 डायबिटीज को नॉन इंसुलिन डिपेंडेंट के नाम से जाना जाता है और यह अधिकतर वृद्ध लोगों में अधिक देखने को मिलती है। टाइप-2 होने की संभावना उन लोगों में अधिक होती है जो मोटापे से ग्रस्त हों। उनके परिवार में वंशानुगत यह रोग चला आ रहा हो जो लोग निष्क्रि य जीवन शैली व्यतीत करते हों।
मधुमेह के प्रमुख लक्षणों में है मूत्र अधिक आना, धुंधला दिखाई देना, किसी कारण के बिना वजन कम होना, अधिक प्यास लगना, कमजोरी रहना, चिड़चिड़ापन, बहुत अधिक भूख लगना आदि। डायबिटीज के कारण कई रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है जैसे उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, गुर्दे संबंधी रोग, आंखों संबंधी रोग, पैरों संबंधी अल्सर आदि, इसलिए इस पर नियंत्रण रखना बहुत आवश्यक है। अगर आप कोई ऐसा लक्षण पा रहे हैं जो मधुमेह की ओर संकेत कर रहा हो तो तुरन्त विशेषज्ञ से रक्त जांच करवाएं जिससे आपको ज्ञात हो सके कि कहीं आप इस जानलेवा रोग के शिकार तो नहीं।
टाइप-टू डायबिटीज के लिए मुख्यत: तीन बातों पर विशेषज्ञ जोर देने की सलाह देते हैं। विशेषज्ञ मुख्यत: रेशेदार खाद्य पदार्थों, कम वसा युक्त आहार पर जोर देते हैं। तले हुए खाद्य पदार्थों का कम सेवन करें। आॅलिव आयल, सनफ्लॉवर आयल तथा कॉर्न आयल का सेवन करें। नियमित समय पर भोजन ग्रहण करें। सब्जियों का सेवन अधिक करें। मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। अपने डाइट-चार्ट के लिए अपने विशेषज्ञ से सम्पर्क करें व उसी अनुसार आहार ग्रहण करें।
एक्सरसाइज या व्यायाम भी इस रोग में लाभप्रद हैं। कौन सी एक्सरसाइज आपके लिए सही है व आपकी शारीरिक फिटनेस के लिए आवश्यक है, इसके लिए विशेषज्ञ से राय लें। सैर करना आपके लिए लाभदायक व्यायाम है। प्रतिदिन 3० मिनट सैर करें। इससे कैलोरी खर्च होगी और आपका वजन नियंत्रित रहेगा।
व्यायाम से रक्त संचार बढ़ता है और अच्छे कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ता है व बुरे कोलेस्ट्रोल का स्तर कम होता है। व्यायाम से तनाव दूर रहता है। एक्सरसाइज करते समय अपने पैरों में आरामदेह व फिट जूते पहनें और ध्यान रखें कि पैरों में कोई चोट न आए। अगर आपका रक्त शर्करा स्तर नियंत्रित नहीं है तो व्यायाम न करें।
डायबिटीज में विशेषज्ञों के अनुसार दवाएं लेते रहें व बिना डॉक्टर से पूछे किसी भी अन्य दवा का सेवन न करें। डायबिटिज में यह भी आवश्यक है कि आप अपने रक्त शर्करा स्तर को मॉनीटर करते रहें। इसके लिए आप विशेषज्ञ से समय-समय पर जांच करवा सकते हैं या स्वयं भी घर पर ग्लूकोमीटर द्वारा जांच कर सकते हैं। मधुमेह से ही जुड़ा है हाइपोग्लाइकेमिया या रक्त शर्करा के स्तर का कम होना। यह मधुमेह से जुड़ी एक समस्या है।
कई बार इंसुलिन की अधिक मात्र या एंटीडायबिटिक दवाओं की अधिक मात्र, अधिक शारीरिक श्रम या व्यायाम, अधिक तनाव, अल्कोहल के अधिक सेवन से यह समस्या हो जाती है। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। रक्त में शर्करा का स्तर कम हो जाने से सिर दर्द, धुंधला दिखाई देना, कमजोरी पसीना आना, कंपनशीलता आदि लक्षण उभरते हैं। इस स्थिति में 2-3 चम्मच ग्लूकोज या चीनी तुरन्त लें व इसके बाद कोई फल या सैंडविच खाएं। अगर आपको बेहोशी आ रही है तो तुरन्त विशेषज्ञ के पास जाएं या अस्पताल जाएं। इस अवस्था में कुछ न खाएं।
हाइपोग्लाइकेमिया से सुरक्षा के लिए ध्यान रखें कि अपने साथ हमेशा चीनी, ग्लूकोज या बिस्कुट रखें। समय पर खाना खाएं। दिन में तीन बार-भोजन लेने के स्थान पर 6 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं। डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं की सही मात्र का सेवन करें। अगर आपको लगातार हाइपोग्लाइकोमिया की शिकायत हो रही हो तो डॉक्टर को बताएं।
मधुमेह के रोगी को डॉक्टर से अपनी जांच नियमित करानी चाहिए। ध्यान रहे कि आपको कोई चोट न लगे, खासकर पैरों पर। अपनी रक्त शर्करा का नियमित रिकार्ड रखें व चीनी या मीठे भोज्य पदार्थों के सेवन पर नियंत्रण रखें।


