Wednesday, February 28, 2024
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खस्ताहाल इज्जत घर, बेखबर अफसर

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  • सरधना में बने अधिकांश सामुदायिक शौचालयों की हालत खराब, कई पर लटके हैं ताले
  • कागजों में संचालित हो रहे नगर के सभी शौचालय

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: नगर में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए सामुदायिक शौचालय अनदेखी की शिकार हो रहे हैं। इन शौचालयों पर लापरवाही के ताले लटके हुए हैं। जो इस्तेमाल हो रहे हैं, उनकी हालत भी बेहद खराब है। अधिकांश शौचालय कागजों में ही उपयोग में लाए जा रहे हैं। मतलब ज्यादातर शौचालयों पर ताले लटके हुए हैं। बाकी की हालत बेहद खराब हो चुकी है।

शौचालयों पर क्लीनर बैठना तो दूर की बात है। इतनी मोटी रकम खर्च होने के बाद भी यह शौचालय किसी काम के नहीं हैं। इस बात से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शौच के लिए राहगीरों को कहां जाना पड़ता है। कारण कुछ भी हो, लेकिन फिलहाल यह शौचालय देखरेख के अभाव में इस्तेमाल होने से पहले ही खंडहर हो रहे हैं। शौचालयों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था। इसके लिए सरधना नगर पालिका में भी मोटा पैसा आया। जिसे इस तरह इस्तेमाल किया गया कि फाइलों में सरधना चमक गया। करीब चार वर्ष पूर्व पालिका द्वारा नगर में 13 सामुदायिक शौचालायों का निर्माण कराया गया था। जिनमें रामलीला मैदान के सामने महिलाओं के लिए एक पिंक शौचालय भी बनाया गया।

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प्रत्येक शौचालय की लागत करीब पांच लाख रुपये है। पहले तो शौचालयों के निर्माण में ही खेल कर दिया गया। शौचालयों में गुणवत्ता की हालत देखें तो सिर चकरा जाए कि पांच लाख रुपये लगे कहां हैं। उसमें भी ज्यादातर शौचालय आज तक इस्तेमाल नहीं हुए हैं। अधिकांश शौचालयों पर आज तक ताले लटके हुए हैं। मतलब यह शौचालय बनने के बाद से अभी तक इस्तेमाल ही नहीं हुए हैं। 13 शौचालयों में से कुल 4-5 शौचालय ही इस्तेमाल हो सके हैं।

जिनमें एक तो खुद पालिका में ही है। जबकि दूसरा तहसील व तीसरा चर्च परिसर में। बाकी शौचालय देखरेख के अभाव में खंड़हर बन रहे हैं। जो शौचालय इस्तेमाल हो रहे हैं, वह भी गंदगी की मार झेल रहे हैं। ऐसे में खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि राहगीर शौच करने कहा जाते हैं। अब इस एक करोड़ रुपये की बर्बादी का हिसाब लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। स्वच्छ भारत मिशन का खुलकर मजाक बनाया जा रहा है।

जो इस्तेमाल हुए वह भी जर्जर

पालिका द्वारा प्रत्येक सामुदायिक शौचालय पर पांच लाख रुपये खर्च किए गए हैं। मगर शौचालयों की हालत देखें तो किसी का भी सिर चकरा जाए। कोई नहीं बता पाएगा कि पांच लाख रुपये शौचालय में कहां खपा दिए गए। हालत यह है कि जिन 4-5 शौचालयों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उनकी दशा भी खराब हो गई है। दरवाजे टूटने लगे हैं। शौचालयों की टंकी का कुछ पता नहीं है।

यहां बनवाए गए थे शौचालय

नगर पालिका द्वारा कुल 13 शौचालय बनवाए गए थे। जिनमें तहसील परिसर, नगर पालिका परिसर, थाना परिसर, पुलिस चौकी चौराहा, नंगला रोड, संत चार्ल्स इंटर कॉलेज, चर्च परिसर, मंदिर परिसर, तहसील रोड स्थित कब्रिस्तान परिसर, छावनी मोहल्ला, टंकी परिसर और रामलीला गेट के सामने महिलाओं के पिंक शौचालय का निर्माण कराया गया।

केयर टेकर भी नहीं आते नजर

नियमानुसार सामुदायिक शौचालयों पर केयर टेकर रखे गए हैं। मगर केयर टेकर भी कागजों में ही ड्यूटी कर रहे हैं। शौचालयों पर कोई केयर टेकर नजर नही आता है। इसके अलावा शौचालयों में साबुन, तोलिया आदि सामान की बात करना तो बेमानी सी है।

कोतवाली के निकट शौचालय की हालत खराब

नगर पालिका से चंद कदम की दूरी पर कोतवाली के पास बने शौचालय की हालत बेहद खराब है। शौचालय जर्जर हालत है। दरवाजे टूटे पड़े हैं। गंदगी इतनी रहती है कि कोई उनमें जाने की हिम्मत नहीं करता है।

  • सफाई व्यवस्था पर दिया जा रहा पूरा ध्यान

सरधना में कुल 13 शौचालयों का निर्माण कराया गया था। जिनको नियमित इस्तेमाल में लाया जा रहा है। सफाई व्यवस्था पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। यदि किसी शौचालय में मरम्मत की जरूरत है तो इस ओर ध्यान दिया जाएगा।
-सबीला अंसारी, चेयरपर्सन नगर पालिका परिषद सरधना

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