Sunday, March 22, 2026
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दीपेश का मोबाइल खोलेगा भ्रष्टाचार के ‘राज’

  • किन-किन अधिकारी एवं नेताओं से पेमेंट को लेकर हुई आत्महत्या से पहले बातचीत

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गंगानगर निवासी ठेकेदार दीपेश अग्रवाल के सुसाइड पर नगर निगम के अपर आयुक्त के द्वारा प्रेसनोट जारी कर बयान जारी किया गया कि नगर निगम से मृतक का कोई संबंध नहीं हैं, लेकिन मृतक ठेकेदार के मोबाइल में उपलब्ध निगम के अधिकारियों के मोबाइल नंबर की सीडीआर एवं उनसे बाचतीत की रिकॉर्डिंग नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार के राज को खोलेगी।

दीपेश के मोबाइल को पुलिस ने कब्जे में ले लिया हैं तथा उसे सील कर दिया हैं। उसके कमरे से नकद 45 हजार रुपये भी मिले थे। नगर निगम से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं, जिनको पुलिस ने कब्जे में ले लिया हैं। इन तमाम तथ्यों को लेकर पुलिस ने छानबीन की तो यह तय मानियेगा कि इसमें नगर निगम के अफसरों की गर्दन भी फस सकती हैं।

दीपेश ने निगम के द्वारा भुगतान नहीं करने के बाद आत्महत्या जैसा दुस्साहसिक कदम जो उठाया, वह तब उठाया जब उसकी निर्माण कार्यों के भुगतान की फाइल को पास कर भुगतान नहीं किया गया। इस दौरान उसने हाल फिलहाल में पेमेंट को लेकर निगम के किस बडे अधिकारी एवं किस बडे नेता से बातचीत की। फिलहाल पुलिस दीपेश के सुसाइड को लेकर तमाम बिंदुओं पर जांच कर रही है,

वहीं मोबाइल की सीडीआर एवं रिकार्डिंग की भी गहनता से जांच कर रही है,जोकि नगर निगम में बडे भ्रष्टाचार का राज खोल सकती है और जिसके चलते निगम के उन अधिाकारियों की गर्दन फंस सकती है,जोकि उसे नगर निगम का ठेकेदार तक मानने को तैयार नहीं हैं। भले ही वह किसी फर्म के साथ मिलकर ठेकेदारी ही क्यों न कर रहा हो।

नगर निगम के अधिकतर पाषर्दो के द्वारा ठेकेदारों के निर्माण का पेमेंट समय पर नहीं किया जाने और निगम के अधिकारियों पर मनमाने ठंग से ठेकेदारों का पेमेंट करने का आरोप लगाया हैं,वहीं जब नगर निगम के अधिकारी किसी ठेकेदार से निर्माण आदि कराते हैं,उस समय तो उनके लिये वह ठेकेदार होता है,

लेकिन जब किसी मामले में निगम के अधिकारियों की गर्दन फंसती है तो वह ऐसे किसी भी मामले या व्यक्ति की जानकारी से पल्ला झाड़ने का प्रयास करते हैं। इसी में मंगलवार को दीपेश अग्रवाल की सुसाइड के मामले में देखने को सामने आया,पुलिस की प्रथम दृष्टता जांच में मामला नगर निगम में ठेकेदारी के रुपये का पेमेंट नहीं होने के चलते डिप्रेशन में आत्महत्या करने का बताया गया,

लेकिन निगम के अपर आयुक्त के द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मृतक ठेकेदार देवेश अग्रवाल के निगम से किसी तरह का संबध नहीं होने की बात कही हैं, लेकिन नगर निगम के पार्षद एवं निगम के कर्मचारी दीपेश ठेकेदार को निगम का ही ठेकेदार बताते हैं कि वह काफी समय से निगम में ठेकेदारी कर रहा था। उसके नाम व फर्म से ठेका था या नहीं, इन सब बातों पर मृतक दीपेश का मोबाइल उसके निगम में ठेकेदार होने या न होने और निगम में भ्रष्टाचार की जड़ कितनी मजबूत है,

उसके राज खोलेगा। उसकी निर्माण कार्यों के पेमेंट को लेकर किन-किन अधिकारियों से कितनी बर बाचतीत हुई और रिकॉर्डिंग में क्या-क्या बात हुई, कितने कमीशन को लेकर उसका पेमेंट नहीं हो रहा था। जिसमें मृतक का मोबाइल नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार के राज की पोल खोलने को एक बड़ी अहम कड़ी हो सकती हैं। जिसके चलते नगर निगम के अधिकारियों की गर्दन मृतक के मोबाइल की सीडीआर व रिकॉर्डिंग से राज खुलने के बाद गर्दन फंस सकती है।

ये भी है एक तथ्य

महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि जब दीपेश निगम का ठेकेदार नहीं है तो फिर उसके खिलाफ रेल विभाग ने मलियाना में नाला निर्माण के दौरान एफआईआर दर्ज क्यों कराई थी? एफआईआर इसलिए हुई थी कि नगर निगम से दीपेश ने टेंडर लिया था, जिसके बाद नाले का निर्माण कराया जा रहा था। इसी वजह से ठेकेदार होने के नाते दीपेश के खिलाफ ही रेल विभाग की तरफ से मुकदमा दर्ज कराया गया था।

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