Sunday, May 10, 2026
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निगम अफसरों की हठधर्मिता से गई ठेकेदार की जान !

  • दीपेश अपने जीजा की फर्म में करता था काम
  • मॉडर्न इंजीनियरिंग कंपनी के नाम पर नगर निगम में करता था ठेकेदारी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम में तानाशाही चल रही हैं। निगम अफसर कमीशनखोरी के चलते ठेकेदारों का भुगतान नहीं कर रहे हैं, जिसके चलते आहत एक ठेकेदार ने मंगलवार सुबह अपने ही मकान में पंखें से लटककर फांसी लगा ली। ठेकेदार के परिजनों ने आरोप लगाया है कि नगर निगम अफसरों की हठधर्मिता के चलते ये घटना घटी है।

हालांकि निगम अफसरों को यह कहकर कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है कि करीब 10 करोड़ का भुगतान निगम अफसरों ने कमीशन नहीं मिलने पर रोक दिया था, जिसके बाद ही आत्महत्या की हैं। आत्महत्या की घटना हड़कंप मच गया। हालांकि निगम के आला अफसर इस मामले में कोई भी बयान देने से बच रहे हैं। उधर, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

ये घटना मंगलवार सुबह नौ बजे की हैं। नगर निगम में मॉडर्न इंजीनियरिंग कंपनी के नाम पर निर्माण कार्य करने वाले अनूपशहर निवासी ठेकेदार दीपेश अग्रवाल (38 वर्ष) ने मंगलवार को आत्महत्या कर ली। आत्महत्या की घटना गंगानगर स्थित मकान में की। यहां छत के पंखे से लटककर जीवन खत्म कर दिया। जिस मकान में फांसी लगाई, उस मकान में ये परिवार किराये पर रह रहा था।

घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तथा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। ठेकेदार दीपेश अग्रवाल अपने बहनोई नवीन गर्ग की फर्म मॉडर्न इंजीनियरिंग कंपनी के नाम पर थी, जिसके नाम पर ही नगर निगम में काम किया जा रहा था। नवीन गर्ग का पूरा काम दीपेश अग्रवाल ही देखते थे। दोनों इस फर्म में पॉर्टनर थे। उधर, ठेकेदार के परिवार वालों का आरोप है कि नगर निगम में लगभग 10 करोड़ से अधिक के विकास कार्य किए हुए हैं,

जिनमें जेल रोड पर लोहिया पार्क, मलियाना में नाला निर्माण समेत दर्जन भर से अधिक विकास कार्य किए हुए हैं। नगर निगम प्रशासन कमीशनखोरी और जांच के नाम पर भुगतान अटकाये हुए हैं। दो दिन पहले भी दीपेश अग्रवाल नगर निगम में पहुंचकर नगर निगम के अधिकारी और निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंताओं से मिले थे। बताया जा रहा है कि निगम के इंजीनियर और अधिकारियों ने सभी निर्माण कार्यों की जांच के बाद ही भुगतान की बात कहकर ठेकेदार को टरका दिया था।

परिवार के लोगों का यह भी आरोप है कि तीन दिन से दीपेश अग्रवाल नगर निगम से भुगतान नहीं होने पर काफी टेंशन में थे। कारण है कि सभी मजदूर और जिन लोगों से निर्माण सामग्री खरीदी गई थी, वह सब अपने भुगतान के लिए लगातार दबाव बना रहे थे और उनके घर पर आकर बुरा-भला भी कह रहे थे। पूरी स्थिति से निगम के अफसरों को भी ठेकेदार दीपेश अग्रवाल ने अवगत करा दिया था,

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लेकिन इसके बाद भी निगम अफसरों ने कमीशनखोरी के चक्कर में उसका भुगतान नहीं किया। ऐसा आरोप दीपेश के परिजन लगा रहे हैं। इसी वजह से ठेकेदार डिप्रेशन में चला गया, जिसके बाद ही दीपेश अग्रवाल ने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया।

पहले भी ठेकेदार की जा चुकी जान

ठेकेदार दीपेश अग्रवाल द्वारा आत्महत्या करने की पहली घटना नहीं, बल्कि निगम अफसरों के रवैये और भ्रष्टाचार से त्रस्त होकर ठेकेदार योगेश गुप्ता ने भी 10 अगस्त को आत्महत्या कर ली थी। योगेश गुप्ता के परिजनों ने भी आरोप लगाया था कि योगेश गुप्ता निगम अफसरों ने कमीशनखोरी के चलते भुगतान रोक लिया था,

जिसके बाद ही योगेश ने भी आत्महत्या कर ली थी। तब इस मामले को निगम के अफसरों ने किसी तरह से दबा लिया था, लेकिन ठेकेदार दीपेश अग्रवाल की आत्महत्या की घटना के बाद से हंगामा खड़ा हो गया हैं तथा इस प्रकरण की ठीक से जांच होती हैं तो निश्चित रूप से निगम के अफसरों की गर्दन फंस जाएगी।

नगर निगम के ठेकेदार की मौत, जांच में जुटी पुलिस

नगर निगम के ठेकेदार दीपेश की आत्महत्या की घटना के बाद पुलिस जांच में जुट गई हैं। मरने वाला ठेकेदार अंतर्राष्टÑीय क्रिकेटर भुवनेश कुमार का पड़ौसी था तथा मूलरूप से अनूप शहर बुलंदशहर का रहने वाला था। थानाध्यक्ष गंगानगर डीपी सिंह व सीओ पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंची थी तथा जांच पड़ताल में जुट गई हैं। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का मानते हुये शव को पोस्टमार्टम के लिये भिजवा दिया था,

लेकिन पुलिस उन कारणों की जांच पड़ताल कर रही हैं, जो आरोप ठेकेदार के परिजनों ने लगाये हैं। कहा गया है कि नगर निगम के अफसरों को परिजनों ने कठघरे में खड़ा किया हैं, जिसके चलते पुलिस निगम के अफसरों से भी पूछताछ कर सकती हैं। अपर आयुक्त ने भी निगम के बचाव में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया मृतक ठेकेदार के नाम या फर्म से कोई ठेका नहीं है, उन्होंने दूसरे अन्य फर्म का नाम बताया,

जिसका ठेका निगम के द्वारा दिया गया हैं। वहीं नगर निगम के अधिकतर पार्षदों का कहना है कि निगम में अधिकतर ठेकेदारों का भुगतान लटका हुआ है। जिसमें नगरायुक्त एवं अपर आयुक्त समेत अन्य पदाधिकारी ठेकेदारों का पेमेंट समय पर नहीं करते, ऐसा आरोप ठेकेदारों ने लगाया हैं, जिसके चलते ठेकेदार डिप्रेशन में जा रहे हैं तथा आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं।

पार्षदों ने उठाए सवाल: नहीं होता समय से ठेकेदारों का भुगतान

नगर निगम वार्ड-7 के पार्षद महेंद्र सिंह भारती ने बताया कि नगर निगम के द्वारा अधिकतर ठेकेदारों का भुगतान समय पर नहीं किया जाता, जिसके चलते ठेकेदार परेशान रहते हैं और डिप्रेशन में आकर इस तरह का कदम उठा लेते हैं। नगर आयुक्त ठेकेदारों के साथ पेमेंट के मामले में अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं। वहीं, वार्ड-8 के पार्षद धर्मवीर सिंह ने भी नगर निगम के अधिकारियों पर ठेकेदारों का पेमेंट समय पर नहीं करने का आरोप लगाया।

बताया कि नगरायुक्त ठेकेदारों के भुगतान जारी करने में अनाकानी करते हैं। वार्ड-39 के सभासद राजीव का कहना है कि पूर्व में भी अतुल दीक्षित ठेकेदार निर्माण का भुगतान नहीं होने के कारण मानसिक रूप से बीमार हो गया था। वहीं, इसी तरह से दो माह पूर्व योगेंद्र गुप्ता नाम के ठेकेदार भी डिप्रेशन में आकस्मिक निधन हो गया था। मंगलवार को दीपेश अग्रवाल के आत्महत्या की घटना से अधिकतर पार्षद नगर निगम के इस रवैये से काफी आहत एवं दु:खी हैं।

वहीं, दीपेश अग्रवाल के सुसाइड पर उसके भुगतान को लेकर कोई बयान नगर निगम की तरफ से जारी नहीं किया गया, बल्कि अपर आयुक्त के द्वारा यह जरूर कहा जा रहा है कि जिस फर्म के नाम से ठेका है, उसमें मृतक का कोई संबंध नगर निगम से सीधे तौर पर नहीं हैं। फिलहाल दीपेश अग्रवाल के द्वारा डिप्रेशन में की गई आत्महत्या को नगर निगम के अधिकारियों की भुगतान को लेकर हठधर्मिता वाला रवैया बता रहे हैं।

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