Tuesday, March 24, 2026
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अब निपट जाएगा मेरठ और अमरोहा का विवाद

  • सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट पर हुआ सीमांकन, बाउंड्री पोल का निर्माण शुरु
  • मेरठ की मवाना और अमरोहा की धनौरा तहसीलों में खादर की भूमि को लेकर तीन दशक से था विवाद

जनवाणी ब्यूरो |

किठौर: खादर में करीब तीन दशक से चल रहे मेरठ और अमरोहा की दो तहसीलों के सीमा विवाद के निस्तारण को सरकार ने अमलीजामा पहना दिया।

सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा तय की गई सीमा पर चिन्हितीकरण के बाद बुधवार को लोक निर्माण विभाग ने स्तंभ निर्माण शुरु कर दिया। कार्य का उद्घाटन विभागीय अधिशासी अभियंता ने किया।

मेरठ की मवाना और अमरोहा की धनौरा तहसील का काफी क्षेत्र गंगा के खादर में मिलाजुला था। इसलिए यहां की खेतीहर भूमि पर संशय की स्थिति बनी रहती थी।

अधिकतर बैनामों और भूमियों की पैमाईशों के दौरान तहसील क्षेत्र को लेकर समस्या और भी विकराल हो जाया करती थी। क्योंकि, यहां की भूमियों पर मवाना और धनौरा तहसील प्रशासन अपने-अपने अधिकार का दावा करता रहता था।

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इसको लेकर कई बार दोनों जिलों और तहसीलों के प्रशासनिक अमले एकसाथ मौके पर भी आए लेकिन नतीजा सिफर रहा। 2015 में दोनों जिलों और तहसीलों के प्रशासन ने वार्ता के बाद सीमांकन के लिए सर्वे ऑफ इंडिया को रिपोर्ट भेजी।

जिस पर सर्वे ऑफ इंडिया ने मेरठ से धनौरा तक के पूरे क्षेत्र का सर्वे कर मवाना और धनौरा तहसीलों का न सिर्फ सीमांकन किया बल्कि अपनी रिपोर्ट में मेरठ के मुकीमपुर से धनौरा तक पूरे क्षेत्र में लगभग 56 प्वाइंटों पर स्तंभ बनाने की सलाह दी।

जिसको सरकार ने माना और 12 सितंबर 2017 को प्रांतीय खंड लोनी-बी मेरठ ने इसका टेंडर बुलंदशहर की मैसर्स साईं कन्सटक्शन को दे दिया। फर्म ने किठौर के ढकैनी में अपना प्लांट लगाकर कार्य शुरु कर दिया है।

बुधवार को मेरठ-अमरोहा सीमा की बाउंडी स्तंभ के उदघाटन के मौके पर कांटेक्टर धर्मवीर सिंह और अधिशासी अभिंयता अरविंद कुमार ने बताया कि स्तंभ निर्माण का यह कार्य गत जनवरी में शुरु होना था।

गेहूं और गन्नें की फसलें खड़ी होने के कारण किसानों ने इसको अप्रैल तक के लिए रुकवा दिया। इसी बीच 22 मार्च को लॉकडाउन लग गया।

फर्जीवाड़ों पर भी लगेगा ब्रेक

सीमा विवाद का सर्वाधिक लाभ खादर के भू माफिया को मिलता था। भू माफिया दोनों तहसीलों की सीमा के आस-पास की खेतीहर भूमि को सेटिंग कर फर्जीवाड़े से बेच देते थे। फिर खरीददार को कभी मवाना तो कभी धनौरा दौड़ाया जाता था। ऐसे में दोनों तहसीलों के अधिकारी एक-दूसरे के पाले में गेंद डालकर खरीददार खूब कमाई करते थे। माना जा रहा है कि सीमांकन होने के बाद इस तरह के फर्जीवाड़ों और विवादों पर ब्रेक लग जाएगा। बता दें कि किठौर के खादर का काफी क्षेत्र दोनों तहसीलों के बीच विवादित था।

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