Monday, April 13, 2026
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अब शामली की जिला पंचायत अध्यक्ष बनेगी दलित महिला, पढ़िए रिपोर्ट

2013 में नवगठित शामली के पहले जिपं अध्यक्ष बने थे मनीष चौहान

2015 में प्रसन्न चौधरी की धर्मपत्नी संतोष देवी पहली महिला अध्यक्ष बनीं


राजपाल पारवा |

उप्र सरकार द्वारा प्रदेश में जिला पंचायत के अध्यक्ष पद का आरक्षण जारी करने के साथ ही जनपद शामली में भी तस्वीर साफ हो गई है। जनपद में पहली बार अनुसूचित जाति की महिला जिला पंचायत अध्यक्ष पद की बागडोर संभालने जा रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने पर जनपद के दलित समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई है।

प्रस्तुत है शामली ब्यूरो चीफ राजपाल परवा की रिपोर्ट:


ऐसे बना शामली जनपद
प्रबुद्धनगर जनपद के गठन की घोषणा 28 सितंबर 2011 को बसपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने शामली में आकर की थी। उससे पहले शामली मुजफ्फरनगर जनपद का हिस्सा हुआ करता था। सपा सरकार ने जनता की मांग पर जुलाई 2012 में प्रबुद्धनगर से जनपद का नाम शामली कर दिया। जिस वक्त शामली जिला बना तो सिर्फ दो तहसील कैराना और शामली थी। जनपद के मानक के अनुसार, तीन तहसीलों का होना जरूरी था। जिस पर तत्कालीन सपा सरकार ने 4 जुलाई 2015 को ऊन को जनपद की तीसरी तहसील घोषित किया।

2012 में शामली जिपं बोर्ड का गठन
शामली जनपद और तहसील का मानक पूरा होने के बाद 2012 में सपा सरकार ने जिला पंचायत बोर्ड के गठन का शासनादेश जारी किया। साथ ही, जिला पंचायत मुजफ्फरनगर से 16 वार्ड नवगठित शामली जनपद का हिस्सा बने। इससे इन वार्डों की जिम्मेदारी मुजफ्फरनगर जिला पंचायत की अध्यक्ष इंतकाब राणा संभाल रही थीं। शामली जिला पंचायत बोर्ड का गठन होने के बाद दिसंबर 2012 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हुई।

मनीष चौहान बने पहले जिपं अध्यक्ष
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद जनवरी 2013 में हुए चुनाव में पूर्व कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र सिंह के पुत्र मनीष चौहान ने कांटे की टक्कर में बिजेंद्र मलिक किवाना को 9-7 के अंतर से पराजित कर शामली जनपद के प्रथम जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का गौरव हासिल किया। चुनाव के अंतिम समय तक मनीष चौहान और बिजेंद्र मलिक किवान के पास 8-8 वोट थीं लेकिन अंतिम समय में बिजेंद्र मलिक किवाना की एक वोट क्रास होकर मनीष चौहान की झोली में चली गई।

संतोष देवी बनीं पहली महिला जिपं अध्यक्ष
वर्ष 2015 के त्रिस्तरीय पंचायत में जिला पंचायत के लिए नया परिसीमन हुआ। नए परिसमन में जिला पंचायत के 3 वार्ड बढ़कर कुल 19 वार्ड हो गए। राजनीति में तब नवप्रवेशी माने जाने वाले प्रसन्न चौधरी की धर्मपत्नी संतोष देवी ओबीसी के लिए आरक्षित जिला पंचायत के वार्ड-19 से चुनाव जीती। उसके बाद उन्होंने अनारक्षित जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए ताल ठोंक दी। तब माना जा रहा था कि राजनीति के नौसिखिए प्रसन्न चौधरी के लिए राजनीति के दिग्गज गुर्जर क्षत्रप वीरेंद्र सिंह के सामने पार पाना मुश्किल होगा। क्योंकि पूर्व कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र सिंह ने अपनी पुत्रवधू शैफाली चौहान को जिला पंचायत के अध्यक्ष के लिए चुनाव मैदान में उतार दिया था। लेकिन जाट राजनीति की बिसात पर प्रसन्न चौधरी अपनी धर्मपत्नी संतोष देवी को ना केवल जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने में सफल हो गए थे बल्कि 12-7 के अंतर से हुई जीत ने साबित कर दिया था कि भले ही वे राजनीति में नौसिखिए हों लेकिन जनसमर्थन उनके साथ है।

पहली बार जिपं अध्यक्ष बनेगी दलित महिला
शासन ने एक दिन पहले प्रदेश के 75 जनपदों में जिला पंचायत अध्यक्ष का आरक्षण घोषित किया। जिसके तहत शामली जनपद के जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इससे साफ है कि अगले कुछ माह के भीतर शामली जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर दलित महिला की ताजपोशी होने जा रही है। इसको लेकन दलित समाज में हर्ष की लहर है। बसपा के जिलाध्यक्ष राकेश पाल ने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए पूरी तैयारी के साथ दलित समाज की सक्षम महिला को चुनाव मैदान में उतारा जाएगा।

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