- नौ साल में डॉल्फिन की संख्या बढ़कर हुई 50
- डॉल्फिन के अनुकूल हुआ गंगा का पानी
- बिजनौर से नरौरा तक पांच दिन चली डॉल्फिन की गणना
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: मेरी गंगा मेरी सूॅस अभियान के तहत विश्व प्रकृति निधि और वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिन तक चल डॉल्फिन गाना अभियान में डॉल्फिन की संख्या 41 से बढ़कर 50 हो गई। 2020 में जहां गंगा के इस इलाके में 41 डॉल्फिन थीं, वहीं इस बार इनकी संख्या 50 हो गई है। डॉल्फिन का कुनबा बढ़ने से प्रकृति प्रेमी खुश हैं। गढ़मुक्तेश्वर से नरौरा बैराज के बीच ये पांच डॉल्फिन बढ़ी हैं।
कहां मिली कितनी डॉल्फिन?
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सीनियर कोआर्डिनेटर संजीव यादव ने बताया कि इस बार गणना दो बोट पर अलग-अलग टीमों द्वारा की गई। उन्होंने बताया कि पांच दिन चली गणना में बिजनौर बैराज से सिरजेपुर मुजफ्फरनगर के 25 किलोमीटर क्षेत्र में 14 डॉल्फिन मिलीं। सिरजेपुर से कुंडा गांव तक 30 किलोमीटर के इलाके में 13 डॉल्फिन मिलीं।
कुंडा से गढ़मुक्तेश्वर तक पांच डॉल्फिन मिली हैं। इनमें कई डॉल्फिन ने सिरजेपुर क्षेत्र से इधर मूव किया है। गढ़मुक्तेश्वर से भगवानपुर तक 35 किलोमीटर तक छह डॉल्फिन मिली हैं। भगवानपुर से अनूपशहर तक 40 किलोमीटर के क्षेत्र में आठ डॉल्फिन मिली हैं। अनूपशहर से नरोरा बैराज तक 25 किलोमीटर तक के क्षेत्र में चार डॉल्फिन मिली हैं।
डॉल्फिन को पसंद आ रहा हस्तिनापुर अभ्यारण
डॉल्फिन के साथ ही गंगा के इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में कछुए, घड़ियाल और सारस का झुंड भी दिखाई दिया है। तरह-तरह के जलीय जीवों की संख्या बढ़ने से डॉल्फिन के लिए ये क्षेत्र और भी बेहतर होगा। बिजनौर बैराज से नरौरा बैराज तक गंगा का वातावरण डॉल्फिन को खूब भा रहा है। डॉल्फिन का कुनबा बढ़ने से प्रकृति प्रेमी खुश हैं। गढ़मुक्तेश्वर से नरौरा बैराज के बीच ये पांच डॉल्फिन बढ़ी हैं।
2009 में डॉल्फिन को किया था राष्ट्रीय जीव घोषित
मई 2009 को पर्यावरण और वन मंत्रालय की ओर से गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन को देश का राष्ट्रीय जलजीव घोषित किया गया था। जिसके बाद गंगा नदी में लगातार इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। सोमवार को विश्व प्रकृति निधि और वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में डॉल्फिन दिवस से पूर्व शुरू किये गये डॉल्फिन गणना कार्यक्रम की बिजनौर बैराज से मुख्य वन सरंक्षक मेरठ एन के जानू ने हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की।

