- निगम क्षेत्र में नाले नहीं हुए साफ, तीन प्रमुख और छह छोटे नालों के सहारे बरसात के पानी को बाहर निकालने व्यवस्था
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हर साल नगर निगम बरसात से पहले लाखों रुपये नालों की सफाई पर खर्च करता है। इनमें से तीन प्रमुख नाले व छह सहायक नाले हैं, जिनकी सफाई होती है। इसके पीछे उद्देश्य यह रहता है कि बरसात के मौसम में होने वाले जलभराव से आम आदमी को दो चार न होना पड़े।

साथ ही निगम हर साल दावें करता है कि इस बार शहर के निचले इलाकों में बरसात का पानी नालों के रास्ते निकल जाएगा। मगर हर बार यह दावे हवाई साबित होते है। इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही बन गए हैं।
कुल तीन प्रमुख नाले
शहर को जलभराव, गंदगी से निजात दिलाने के लिए निगम के अधिकार क्षेत्र में कुल तीन प्रमुख नाले आते हैं। इनमे से आबू नाला प्रथम, आबू नाला द्वतीय व ओडियन नाला प्रमुख है। वहीं कोटला नाला भी बड़े नालों में ही शामिल है, लेकिन इसकी गिनती सहायक नालो में होती है। साथ ही शहर में छह छोटे नाले है जो प्रमुख नालों से जाकर मिलते है। यानी कुल 10 नाले निगम क्षेत्र में आते हैं। इन नालों की सफाई कराने की जिम्मेदारी भी निगम की है। जिस पर हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं।
15-20 लाख का खर्च हुआ
नालों की सफाई पर निगम द्वारा 15 से 20 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। यह रकम केवल निगम द्वारा नालों की सफाई में लगाई गई मशीनरी के तेल पर ही व्यय हुए है। जबकि इसके अलावा किसी अन्य संसाधन पर कोई पैसा खर्च नहीं हुआ है। निगम के पास अपनी खुद की मशीनरी है, बाहर से या किराए पर कोई उपकरण नहीं लेना होता है, यानी मशीन के किराए पर भी कोई पैसा खर्च नहीं होता है, लेकिन हर साल इतनी बड़ी रकम नालों की सफाई पर खर्च होने के बावजूद हालात जस के तस बने रहते हैं।
निगम के पास अपनी खुद की मशीनरी है, बाहर से कोई मशीन किराए पर नहीं मंगवाई जाती। जितना भी खर्च होता है, वह केवल मशीनरी में फुंकने वाले तेल पर होता है। शहर में सभी प्रमुख नालों की सफाई कराई जा रही है। इस बार जलभराव जैसी समस्या नहीं होगी।
-ब्रजपाल सिंह, सहायक नगर आयुक्त

