Saturday, March 7, 2026
- Advertisement -

‘सीजफायर’ की आड़ में नाटक

Samvad 45

2025 में जब एक ओर भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर घर्षण ने युद्ध की शक्ल ले ली और दूसरी ओर ईरान और इस्राइल के बीच गहराते टकराव ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया, तब एक देश—संयुक्त राज्य अमेरिका—फिर से सीजफायर की मध्यस्थता के नाम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सबसे पहले सामने आया। यह दृश्य कोई नया नहीं है; अमेरिका बीते कई दशकों से हर क्षेत्रीय या वैश्विक संघर्ष में एक नियंता, मध्यस्थ और ‘शांति-स्थापक’ के रूप में खुद को प्रस्तुत करता आया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह भूमिका वास्तव में वैश्विक स्थिरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का संकेत है, या फिर ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के रणनीतिक मंसूबों का विस्तार है, जिसमें हर युद्ध अमेरिका के लिए एक अवसर है—अपनी शक्ति, नीति और नैतिकता को जबरन स्वीकार करवाने का?

आज जब भारत-पाक युद्ध को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्रालय बार-बार ‘तत्काल युद्धविराम’ की अपील करता दिखता है और ईरान-इस्राइल संघर्ष में अमेरिका खुलकर इस्राइल के पक्ष में होते हुए भी सीजफायर का संदेश देता है, तो यह समझना जरूरी हो जाता है कि क्या अमेरिका की कूटनीति निष्पक्ष है या हितसाधक? हर बार युद्ध में आग बुझाने की भूमिका निभाने वाला अमेरिका दरअसल वैश्विक भू-राजनीति में अपने खोते प्रभुत्व को फिर से स्थापित करने की कोशिश करता है, ताकि एक तरफ वह अपने रक्षा उद्योग को बढ़ावा दे सके, दूसरी तरफ शांति की छाया में ‘पॉवर प्रोजेक्शन’ के हथियारों से अपने भू-राजनीतिक प्रभाव क्षेत्रों को पुन: प्राप्त कर सके। अमेरिका का यह दोहरा चरित्र विशेष रूप से तब उजागर होता है जब वह भारत-पाक जैसे संघर्षों में ‘कूटनीतिक संतुलन’ बनाए रखने की बात करता है, जबकि हथियारों की आपूर्ति और रणनीतिक दबाव के जरिए एक पक्ष को लाभ पहुंचाने में संकोच नहीं करता। 2025 के भारत-पाक संघर्ष में अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र में युद्धविराम प्रस्ताव लाना और उसी समय पाकिस्तान को आपात सैन्य सहायता का संकेत देना इस ‘तटस्थता’ के खोखलेपन को स्पष्ट करता है। यही खेल ईरान और इस्राइल के संदर्भ में और भी स्पष्ट हो जाता है, जहां अमेरिका एक ओर इस्राइल को लगातार सैन्य सहयोग देता है और दूसरी ओर ईरान से संयम की अपेक्षा करता है, लेकिन फिर भी ‘शांति’ के नाम पर खुद को तटस्थ मध्यस्थ के रूप में चित्रित करता है। क्या यह दोहरा मापदंड उस अमेरिकी नैतिकता का हिस्सा है, जो ‘शांति’ की बात करते हुए दरअसल ‘शर्तों वाली शांति’ लादना चाहती है?

अमेरिकी थिंक टैंक्स और रणनीतिक दस्तावेज स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि शांति की पहल सिर्फ एक औजार है जिसके माध्यम से अमेरिका अपने वैचारिक और सैन्य प्रभाव को विस्तारित करता है। ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ की नीति सिर्फ घरेलू अमेरिकी राजनीति नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय विजन है जो प्रत्येक संघर्ष को एक अवसर की तरह देखता है—नैतिक श्रेष्ठता, कूटनीतिक नियंत्रण और आर्थिक हितों को सुरक्षित करने के लिए। 2025 के घटनाक्रमों में अमेरिका की भूमिका केवल मध्यस्थता तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह सुरक्षा परिषद में प्रस्तावों के माध्यम से, नाटो के जरिए दबाव निर्माण करके, और अपने मीडिया एवं थिंक टैंक नेटवर्क द्वारा ‘नैरेटिव’ गढ़कर एक बार फिर यह संदेश देने में सफल रहा कि अमेरिका ही वह शक्ति है जो युद्ध रोक सकता है—भले ही वह युद्ध की शुरुआत में कहीं न कहीं अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहा हो। इस स्थिति में वैश्विक समुदाय को यह प्रश्न करना चाहिए कि क्या युद्धविराम की अमेरिकी पहल वास्तव में मानवता की रक्षा है या ‘ग्लोबल पावर आर्किटेक्चर’ का पुन: लेखन? क्या अमेरिका का ‘सीजफायर’ मॉडल केवल उसकी सुरक्षा और आर्थिक रणनीति का विस्तार है, जहां सैन्य ठेकेदारों, तेल लॉबी और एशिया व पश्चिम एशिया में रणनीतिक ठिकानों को बनाए रखने की प्रवृत्ति हावी रहती है?

इन सभी संदर्भों में 2025 का समय अमेरिकी कूटनीति की विडंबना को एक आईने की तरह पेश करता है—जहाँ वह बार-बार ‘सीजफायर’ के मंच से वैश्विक नैतिकता का ढोंग करते हुए, एक बार फिर से खुद को ‘दुनिया का पापा’ और शांति का स्वघोषित पहरेदार बनाने की कोशिश करता है। लेकिन आज की वैश्विक जनता, विशेषकर वैश्विक दक्षिण, अब इस छद्म नैतिकता को चुनौती देने के लिए तैयार है। भारत जैसे देश जहां एक ओर अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी बनाए रखते हैं, वहीं अब उनकी विदेश नीति में आत्मनिर्भरता और बहुध्रुवीयता का आग्रह स्पष्ट रूप से उभरता है, जो अमेरिका की हर मध्यस्थता को ‘अंतिम समाधान’ मानने से इनकार करता है। ऐसे समय में ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के पीछे छिपी हर वैश्विक कार्रवाई को समझना, विश्लेषण करना और उसके असली प्रभावों को उजागर करना आवश्यक है, क्योंकि आज के युद्ध सिर्फ मैदान में नहीं लड़े जाते—वे नैरेटिव्स, दबाव और शांति की शब्दावली के भीतर भी छिपे रहते हैं, जिन पर अमेरिका जैसे देश अपनी शक्ति की नींव रखते हैं। इसलिए, अमेरिका की हर ‘सीजफायर पहल’ अब केवल एक कूटनीतिक कदम नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति-संतुलन को प्रभावित करने वाला एक राजनीतिक उपकरण है, जिसकी आलोचनात्मक विवेचना अनिवार्य है।

सीजफायर की आड़ में वैश्विक राजनीति का जो नाटक अमेरिका बार-बार मंचित करता है, वह न केवल उसकी कूटनीतिक चालबाजियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ जैसा नारा वास्तव में विश्व नेतृत्व की आड़ में खोखले वर्चस्व का प्रदर्शन मात्र है। हर बार जब दुनिया किसी संकट, युद्ध या संघर्ष के मुहाने पर होती है—चाहे वह यूक्रेन-रूस युद्ध हो, गजा-पट्टी में इस्राइल-फिलिस्तीन संघर्ष या फिर वर्तमान ईरान-इस्राइल टकराव—अमेरिका स्वयं को एकमात्र संकटमोचक और शांति-दूत के रूप में प्रस्तुत करता है, जबकि उसका सैन्य-औद्योगिक तंत्र इन युद्धों से हथियारों की आपूर्ति और राजनीतिक सौदों के जरिये आर्थिक लाभ उठाता है। यह विरोधाभास न केवल अमेरिका की वैश्विक छवि को द्वैध बनाता है, बल्कि एक नई साम्राज्यवादी सोच की पुष्टि भी करता है जिसमें युद्ध और शांति दोनों पर नियंत्रण बनाए रखना एक ही समय में उसका उद्देश्य हो गया है।

‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि उस वैश्विक शक्ति-प्रदर्शन का प्रतीक बन गया है, जिसमें अमेरिका अपने हितों को सर्वोपरि रखकर, विश्व मंच पर नैतिकता, अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार की भाषा का उपयोग केवल रणनीतिक आवरण के रूप में करता है। सीजफायर वास्तव में युद्ध समाप्त करने के लिए है या अमेरिका को फिर से महान दिखाने के लिए? यही प्रश्न इस संपादकीय का सार है, और यही वह चेतावनी है जिसे वैश्विक दक्षिण और स्वतंत्र आवाजों को अब और अनदेखा नहीं करना चाहिए।

janwani address 212
spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ आवाज है ‘सूबेदार’

अस्सी-नब्बे के दशक में बॉलीवुड में अन्याय और भ्रष्ट...

यूं ही नहीं हैं शाहरुख खान ‘किंग’

रजनीकांत स्टारर फिल्म 'जेलर' (2023) को बहुत पसंद किया...

बिहार, बिहार ही रहेगा रेल तो संभालो

जब रेल पटरी से उतरने लगे तो चिंता होना...

जंगल सिर्फ पेड़ नहीं एक जीवित तंत्र है

वृक्षारोपण और प्राकृतिक वन के बीच पारिस्थितिक अंतर को...

अपने-अपने ‘एपस्टीन

इस साल की शुरुआत में उछली ‘ज्येफ्री एपस्टीन फाइल्स’...
spot_imgspot_img