- सरकार का मिलेगा सहयोग, कोरोना काल में लोगों के छिन गए थे रोजगार
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोरोना महामारी से दुनिया भर में करोड़ों लोग प्रभावित हुए हैं। महामारी के चलते कई लोगों को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा। आज भले ही कोरोना महामारी का प्रभाव काफी कम हो चुका है, लेकिन इसका दंश आज भी कई लोग झेल रहे हैं। रोजगार चले जाने के बाद कई लोग अपने खुद के व्यापार को शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
अगर आप भी एक नए बिजनेस को शुरू करने वाले हैं, तो मधुमक्खी पालन किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प होगा। इस व्यापार को शुरू करने पर आपको सरकार का भी सहयोग मिलेगा। ऐसे में आपके कई काम काफी आसान हो जाएंगे। मधुमक्खी पालन के व्यापार को शुरू करने में आपको लागत भी कम आएगी और मुनाफा भी शानदार होगा। देश विदेश में शहद की काफी मांग है। ऐसे में इस कारोबार को शुरू करके आप हर महीने लाखों रुपयों की कमाई कर सकते हैं।
मधुमक्खी पालन से करें मोटी कमाई
शहद का इस्तेमाल दवाइयों से लेकर खाने के कई प्रोडक्ट्स में होता है। इस व्यापार को शुरू करने में काफी फायदा है। यही एक बड़ी वजह है, जिसके चलते कई किसान खेती छोड़कर मधुमक्खी पालन का काम कर रहे हैं। मधुमक्खी पालन को शुरू करने पर आपको सरकार का भी सहयोग मिलता है।

इसमें आपको मधुमक्खी पालन के लिए शहद प्रसंस्करण इकाई लगानी होगी। इसके अलावा प्रोसेसिंग प्लांट की मदद से मधुमक्खी पालन का बिजनेस शुरू करके आप अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं। आप मधुमक्खी के शहद से कई प्रोडक्ट्स को तैयार करके बाजार में बेच सकते हैं। शहद के जरिए आप बीजवैक्स, प्रोपोलिस, रॉयल जेली या मधुमक्खी पराग जैसे प्रोडक्ट्स को बना सकते हैं।
इन प्रोडक्ट्स की बाजार में काफी मांग रहती है। अगर आपका कारोबार अच्छा चलता है तो इसके जरिए आप लाखों रुपयों की कमाई कर सकते हैं। अगर आप इस बिजनेस को शुरू करते हैं तो सरकार से इसके लिए आपको सब्सिडी भी मिलती है। राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड, नाबार्ड के साथ मिलकर भारत में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रहा है।
छोटे किसानों के लिए बेहतर विकल्प
देश में मधुमक्खी पालन का व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है। शहद उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण ही भारत से निर्यात में भी तेजी आई है। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों के लिए मधुमक्खी पालन एक जबरदस्त विकल्प है। कम लागत में उन्हें अधिक मुनाफा हासिल करने में मदद मिलेगी।
देश भर में स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों से किसान मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षण ले सकते हैं। यहां के वैज्ञानिक किसानों को न सिर्फ मदद करते हैं बल्कि समय-समय पर आकर मधुमक्खी पालन के कार्य का निरीक्षण भी करते हैं और इस काम में आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए किसानों को सलाह देते हैं।
शहद में होते हैं कई गुण
मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे आसानी से कोई भी कर सकता है। इस काम में खर्च काफी कम आता है, लेकिन इसे शुरू करने के लिए प्रशिक्षण बहुत जरूरी है। शहद को धरती का अमृत कहा जाता है। शहद अपने आप में एक संपूर्ण भोजन है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा 70 से 80 फीसदी होती है। इसके अलावा शहद में ग्लूकोज, सुक्रोज और फ्रक्टोज भी पाया जाता है। कुछ मात्रा प्रोटीन की भी होती है।
शहद में 18 तरह के अमीनो एसिड भी मौजूद हैं। ये शरीर में उत्तकों का निर्माण करते हैं, जो हमें स्वस्थ बनाते हैं। शहद में पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्निशियम और आयरन जैसे 11 तरह के मिनरल भी पाए जाते हैं। यहीं वजह है कि 80 फीसदी शहद दवा के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। कॉस्मेटिक और कन्फेक्शनरी में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है। मधुमक्खियां फूलों पर मंडरा कर शहद चुनती हैं और एक फूल से दूसरे फूल पर जाने की वजह से फसल में परागण की क्रिया तेज हो जाती है, जिससे किसान को ज्यादा फसल मिलती है।

