Thursday, February 12, 2026
- Advertisement -

पुण्य अर्जन

Amritvani


एक बार ऋषियों और मुनियों में विवाद छिड़ा कि किस प्रकार अल्पकाल में ही थोड़े से परिश्रम से महान पुण्य अर्जित किया जा सकता है? जब किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे तो वे मुनि वेद व्यास के पास गए। व्यास ऋषि उस समय गंगा नदी पर स्नान के लिए गए हुए थे। व्यासजी ने योग की शक्ति से जल के भीतर ही मुनियों के आने का उद्देश्य जान लिया। कुछ देर बाद उन्होंने नदी के बाहर अपना सिर निकाला और जोर से कहा, कलियुग ही सबसे श्रेष्ठ है।

यह कहकर व्यासजी ने पुन: डुबकी लगा ली। कुछ देर बाद उन्होंने अपना सिर बाहर निकाला और जोर से कहा, शूद्र ही सर्वश्रेष्ठ है- शूद्रस्साधु: कलिस्साधुरित्येवं…और फिर डुबकी लगा ली। तीसरी बार उन्होंने पानी से अपना सिर बाहर निकाला और कहा, स्त्रियां ही धन्य हैं, वे ही साधु हैं- योषित: साधु धन्यास्तास्ताभ्यो धन्यतरो अस्ति क:। व्यासजी कुछ देर बाद जल से बाहर निकल आए।

पूजा से निवृत्त हुए तो उनका ध्यान ऋषियों की ओर गया। व्यासजी ने उनसे पूछा, साधुजनों! मैं आप लोगों के आगमन का कारण जान सकता हूं? ऋषि बोले, आप यह बताने की कृपा करें कि आपने यह क्यों कहा कलियुग ही सबसे श्रेष्ठ है, शूद्र ही सर्वश्रेष्ठ है और स्त्रियां ही धन्य हैं? इस पर व्यास जी ने कहा, हजारों वर्ष पहले तप करने से ही पुण्य प्राप्त होता था, वह कलियुग में केवल भगवान् का नाम लेने से ही प्राप्त हो जाता है। शूद्र्र सफाई का काम करते हैं और मल-मूत्र तक साफ करते हैं।

इसी प्रकार स्त्रियां कुटुंब की सेवा में दिन-रात लगी रहती हैं। वे अपने सेवा कार्यों से ही महान पुण्यों का अर्जन करते हैं। इसीलिए मैंने कहा था कि कलियुग, शूद्र और स्त्रियां सर्वश्रेष्ठ धन्य हैं। ऋषियों ने कहा, महर्षि हम जिस काम के लिए आए थे, वह अपने आप पूरा हो गया।
                                                                                                        प्रस्तुति: राजेंद्र कुमार शर्मा


janwani address 9

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Air India: एअर इंडिया हादसा, इटली मीडिया ने पायलट पर लगाया गंभीर आरोप

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: एअर इंडिया के विमान हादसे...

World News: व्हाट्सएप-यूट्यूब पर रूस की बड़ी कार्रवाई, यूजर्स को लगा झटका

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: रूस में कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय...
spot_imgspot_img