- तमाम आपत्तिजनक दस्तावेज, बैंक खातों की डिटेल कब्जे मेें ली
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: महानगर के प्रमुख एक्सपोर्टर शारदा ग्रुप के आवास, फैक्ट्री और प्रतिष्ठानों पर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की छापेमारी करीब 22 घंटे तक चली और बुधवार दोपहर जाकर खत्म हुई। छापेमारी में क्या कुछ मिला, यह तो आधिकारिक रूप से कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया, लेकिन माना जा रहा है कि ईडी तमाम जरूर कागजात, जिनमें बैंक आदि की डिटेल है, साथ ले गई है। पुलिस और खुफिया विभाग के अफसर जो भीतर से आते जाते रहे, ने भी इस संबंध में कोई जानकारी होने से इंकार कर दिया।
शारदा एक्सपोर्ट के मालिक जितेंद्र गुप्ता का कालीन का काफी बड़ा कारोबार है। विदेशों तक इनकी पहुंच है और माल एक्सपोर्ट होता है। बीते मंगलवार सुबह करीब आठ बजे तीन टीमों ने यहां एक साथ छापेमारी शुरू की थी। एक टीम साकेत स्थित आवास पर तो एक टीम रेलवे रोड के कोल्ड स्टोरेज व प्रतिष्ठान तथा तीसरी टीम रिठानी स्थित फैक्ट्री पहुंची थी और जांच पड़ताल की। टीमें लगातार जांच पड़ताल करती रहीं और बुधवार दोपहर जाकर उनका काम पूरा हुआ। इनके अलावा शारदा एक्सपोर्ट के मालिक जितेंद्र गुप्ता की कंपनी की सहयोगी कंपनी हसैंडा प्रोजेक्टस प्रा. लि. कंपनी के दिल्ली, चंडीगढ़ और गोवा स्थित 11 ठिकानों पर भी छापेमारी की गयी।
इस दौरान संपत्ति के दस्तावेज, लेपटॉप और बैंक खातों की डिटेल जब्त करके ले गई। ईडी की मानें तो हसैंडा कंपनी के जरिये बिल्डर ने लग्जरी फ्लैट बनाने के लिए लोटस 300 नाम से प्रोजेक्ट लांच किया था। इसके जरिये 330 फ्लैट बनाने शुरू किए। इस दौरान ही कंपनी ने निवेशकों से 636 करोड़ रुपये फ्लैट बुक कराने के नाम पर लिये। तय समय पर जब प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ तो इसमें निवेशकों को अनियमित्ताओं का पता चला। निवेशकों ने इसकी शिकायत की। इस बावत ईओडब्लू ने मुकदमा दर्ज किया। हाईकोर्ट के आदेश पर ईडी ने भी मामले की जांच शुरू की। यह छापेमारी इसी कड़ी में की गई बतायी जा रही है।
ईडी का दावा है कि बैंक खातों व कार्यालय से मिले दस्तावेजों की जांच पड़ताल हो रही है। इसमें तमाम खामियां मिली हैं। सभी दस्तावेजों की जांच होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। मामले में जब शारदा एक्सपोर्ट के जितेंद्र गुप्ता से बात करने की कोशिश की गयी तो उन्होंने सिर्फ यही कहा कि टीम नोएडा के किसी मामले की जांच करने आयी थी। शारदा एक्सपोर्ट पर करीब 22 घंटे प्रवर्तन निदेशालय ने जांच की। इस बीच किसी को भी बाहर जाने की इजाजत नहीं थी। संबंधित थानों की पुलिस को पूरी प्रक्रिया से अलग रखा गया। पुलिस और खुफिया पुलिस भी पहुंची, लेकिन ईडी के अफसरों ने किसी से मुलाकात नहीं की।