- निरीक्षण में अवकाश पर मिले दोनों शिक्षक
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: सरकारी विद्यालयों की शिक्षा गुणवत्ता पर सवाल उठना कोई नई बात नहीं रह गया है। गुरुवार को अधिकारियों ने सरधना के कुलंजन गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय का निरीक्षण किया तो शिक्षा के स्तर की पोल खुल गई। विद्यालय में उर्दू के दो-दो शिक्षक तैनात होने के बाद भी बच्चे उर्दू लिखना तो दूर पढ़ भी नहीं पाए। यह देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। शिक्षकों को तलब किया गया तो पता चला कि दोनों ही अवकाश पर हैं। अधिकारी रिपोर्ट तैयार करके ले गए। जो उच्चाधिकारियों को पेश की जाएगी।
गुरुवार को उप निदेशक अर्थ एवं सांख्यिकी डा. शोएब अहमद व बीडीओ सुनीत भाटी टीम के साथ कुलंजन गांव में विकास कार्याें का जायजा लिया। इस दौरान टीम कंपोजिट विद्यालय का निरीक्षण करने पहुंची। उन्होंने सबसे पहले मध्यांतर भोजन का जायजा लिया। जो लगभग संतोषजनक पाया गया।
इसके बाद अधिकारियों ने शिक्षकों और बच्चों से बात की। अधिकारी को पता चला कि विद्यालय में उर्दू भी पढ़ाई जाती है। जिसके लिए दो शिक्षक भी तैनात हैं। इस पर अधिकारी ने बड़ी उम्मीद के साथ बच्चों से उर्दू लिखने को कहा, लेकिन वह लिख नहीं पाए। यहां तक कि बच्चे अपना नाम भी नहीं लिख पाए।

आगे बढ़ते हुए उर्दू पढ़ने के लिए कहा गया। अफसोस कि बच्चे उर्दू पढ़ने में भी समक्ष नहीं थे। मतलब बच्चों को उर्दू का कोई ज्ञान नहीं था। इस पर अधिकारी ने शिक्षकों को तलब किया। मगर पता चला कि दोनों ही शिक्षक निजी कारणों से अवकाश पर हैं। व्यवस्था पर अधिकारी ने नाराजगी जताई और रिपोर्ट तैयार करके वापस लौट गए। इस सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि भारी भरकम वेतन लेने वाले शिक्षक बच्चों को पढ़ा क्या रहे हैं। कम वेतन में प्राइवेट स्कूल में जो बच्चों को शिक्षा मिल पा रही है।
सरकारी स्कूलों में मोटी सैलरी लेने वाले शिक्षक नौनिहालों को क्यों नहीं दे पा रहे हैं। वहीं, अधिकारी ने ब्लॉक पहुंच कर बच्चों के आधार कार्ड, आंगनबाड़ी सुपर वाइजर व शिक्षा विभाग के अधिकारियों से समीक्षा बैठक भी की। इस संबंध में बीडीओ सुनीत कुमार भाटी का कहना है कि कुलंजन में विकास कार्यों का जायजा लेने गए थे। विद्यालय में बच्चे उर्दू नहीं पढ़ पाए। वहीं, एबीआरसी विरेंद्र सिंह का कहना है कि सूचना पर मैं विद्यालय गया था। विद्यालय लंबे समय से बंद होने के कारण बच्चे उर्दू नहीं पढ़ पाए।

