Sunday, February 15, 2026
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नक्शे के अनुसार बनी ईदगाह, होगी ‘वर्ल्ड क्लास’

  • शाही ईदगाह के आधुनिक लुक का नक्शा तैयार, लेकिन धनाभाव में अधर में लटका प्रोजेक्ट
  • 18 मंजिल प्रस्तावित, मुम्बई के मशहूर आर्किटेक्ट से बनवाया गया था नक्शा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शाही ईदगाह को गड्डों से निकालकर उसे इबादत के लायक बनाने वाले ईदगाह के पूर्व मुतवल्ली व प्रसिद्ध इस्लामी स्कॉलर सैयद आसिम अली सब्जवारी भले ही इस दुनिया को अलविदा कह चुके हों, लेकिन वो जब तक हयात (जिन्दा) रहे शाही ईदगाह के विकास के लिए हीजद्दोजहद करते रहे। उन्होंने अपनी जिन्दगी में इस ईदगाह के आधुनिक लुक का सपना देखा और कोशिशें भी शुरु कर दीं थीं।

उनके बेटे सैयद अनस सब्जवारी बताते हैं कि अब से 35 साल पहले उनके अब्बू ने देश के पहले 10 बड़े आर्किटेक्ट में शुमार मुम्बई के अहमद कासू से ईदगाह को आधुनिक लुक देने का नक्शा बनवाया था। हालांकि सैयद अनस सब्जवारी कहते हैं कि ईदगाह का जो नक्शा बनकर तैयार हुआ उसमें कई खास पहलु हैं। यह कई हजार करोड़ का प्रोजेक्ट है। वर्तमान में जब तक धनाड्य मुस्लिम वर्ग साथ नहीं आएगा तब तक शाही ईदगाह को आधुनिक लुक देने का सपना साकार नहीं हो पाएगा।

इस तरह ईदगाह का नक्शा बदलने की है तैयारी

मुम्बई के मशहूर आर्किटेक्ट अहमद कासू ने जो नक्शा बनाया उसमें कई बिल्डिंग्स बनाई जानी प्रस्तावित हैं। सैयद अनस सब्जवारी बताते हैं कि ईदगाह का इस्तमाल साल में सिर्फ दो घंटे के लिए ही किया जाता है। एक बार ईद तो दूसरी बार बकरीद की नमाज के लिए। बाकी समय पूरा ईदगाह परिसर वीरान रहता है। पूर्व मुतवल्ली सैयद आसिम अली सब्जवारी ने इस परिसर को मल्टी लेवल औ मल्टी पर्पस इस्तेमाल के लिए ही इसका नक्शा तैयार करवाया था। इसमें दो बिल्डिंग्स 18-18 मंजिल की हैं जबकि तीन बिल्डिंग्स 6, 7 और 8 मंजिलों की हैं। ईदगाह परिसर के बीच का हिस्सा पूरी तहर खुला रखा गया है।

ईदगाह का पिछला व साइडों का हिस्सा मल्टी पर्पस के लिए रखा गया है। इसमें एक ऐसा संस्थान बनाना भी प्रस्तावि है जिसमें मुस्लिमों के लिए जकात से लेकर फतवों, शरीयत और रिसर्च वर्क जैसे कामों को अंजाम दिया जा सके। इसमें हॉस्टल से लेकर गेस्ट हाउस तक का निर्माण शामिल है। 35 साल पहले प्रोजेक्ट का नक्शा तैयार हुआ, लेकिन अभी तक भी इस पर काम क्यों नहीं हुआ, इस पर सैयद अनस बताते हैं कि एक तो फाइनेंशियल स्ट्रक्चर का कमजोर होना दूसरा मुखालफतों (विरोध) ने काम में बाधा पैदा की। इस समय शाही ईदगाह कुल 35 बीघा में हैं।

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