- पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक को अलीगढ़ से चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी में सपा
- जाट लैंड को संदेश देने का प्रयास, पूर्व में भी अलीगढ़ से सांसद रह चुके हैं सत्यपाल मलिक
अमित पंवार |
बागपत: लोकसभा चुनावी मैदान में सियासत हर दिन मोड ले रही है। किसान आंदोल का समर्थन करने वाले एवं भाजपा को निशाने पर रखने वाले पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक पर समाजवादी पार्टी दांव खेलने की जुगत में जुट गई है। उन्हें अलीगढ़ से चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी हो रही है। सपा एक तरफ जहां किसानों को संदेश देना चाहती है वहीं सत्यपाल मलिक का बागपत के मूल निवासी होने पर यहां जाट लैंड में संदेश देने का प्रयास हो रहा है। माना जा रहा है कि लखनऊ से सियासत का दांव बागपत तक असर डाल सकता है।
बागपत जनपद के हिसावदा निवासी एवं पांच राज्यों के राज्यपाल रहे चुके सत्यपाल मलिक लगातार भाजपा को निशाने पर रख रहे हैं। 22 फरवरी को उनके यहां एक मामले में सीबीआई की छापेमारी भी हुई थी, लेकिन कुछ खास उनके यहां से नहीं मिला था। उन्होंने तब भी कहा था कि किसान का बेटा हूं, डरूंगा नहीं। क्योंकि वह लगातार किसानों का समर्थन कर रहे हैं। किसान आंदोलन को लेकर भाजपा को निशाने पर रख रहे हैं। किसानों की मांगों को जायज ठहरा रहे हैं। किसानों के समर्थन में बोलने पर अब समाजवादी पार्टी उन्हें अपनी ओर करने में जुट गई है।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक की मुलाकात में किसानों से लेकर आगामी चुनाव तक की चर्चा हुई है। यहां तक कहा जा रहा है कि उन्हें सपा मुखिया ने अलीगढ़ सीट से चुनाव लड़ने का आॅफर दिया है। अब वह चुनाव लड़ेंगे या नहीं? यह भविष्य में देखा जाएगा, लेकिन समाजवादी ने यहां एक तीर से दो निशाने चलकर एक संदेश किसानों के बीच देने के प्रयास की फिल्डिंग बिछानी शुरू कर दी है। सपा लगातार किसानों के समर्थन में बोल रही है और पूर्व राज्यपाल भी किसानों के साथ खड़े नजर आते हैं। एक तरफ सपा किसानों को संदेश देना चाहती है कि किसान की आवाज को उठाने वाले पूर्व राज्यपाल के घर पर भाजपा जहां सीबीआई की रेड डलवा रही है वहीं वह उन्हें जनता के बीच में सेवा के लिए भेजना चाहते हैं। यही नहीं दूसरा संदेश बागपत के मूल निवासी होने पर यहां जाटलैंड में एक संदेश देने का भी प्रयास होगा। क्योंकि बागपत जनपद उनका गृह जनपद है और यहां जाटों के बीच समाजवादी अपना प्रभाव भी मजबूत करने की जुगत में लंबे समय से लगी हुई है।
यही कारण है कि जाटों को साधने के प्रयास में ही समाजवादी ने पिछले दिनों पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं छपरौली से दो बार चुनाव लड़ चुके मनोज चौधरी को लोकसभा प्रभारी बनाया है। इसके अलावा मुजफ्फरनगर सीट पर पहले ही समाजवादी पार्टी जाट चेहरे के रूप में हरेंद्र मलिक को चुनावी मैदान में उतार चुकी है। यानी वेस्ट यूपी से जाटों के बीच लोकसभा चुनाव से पहले मजबूत चेहरों को उतारने की तैयारी में समाजवादी पार्टी जुटी है। यह भी माना जा रहा है कि बागपत लोकसभा सीट पर भी जाट चेहरे को ही उतारने की तैयारी में समाजवादी पार्टी है। जातिगत समीकरणों को देखकर सपा चुनावी फिल्डिंग बिछा रही है। अलीगढ़ सीट पर पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक को आॅफर करना जाटलैंड को संदेश देने का प्रयास अवश्य कहा जाएगा। अब यह अलग बात है कि सत्यपाल मलिक चुनाव लड़ेंगे या नहीं, लेकिन समाजवादी पार्टी ने अपनी ओर से आॅफर देकर संदेश दे दिया है। अब देखना यह है कि सत्यपाल मलिक इस आॅफर को स्वीकारते हैं या नहीं? क्योंकि वह पहले भी अलीगढ़ से सांसद रह चुके हैं। अगर उन्होंने इसे स्वीकार किया तो वह दूसरी बार अलीगढ़ से चुनाव लड़ेंगे।
पुलवामा हमले पर साधा था निशाना
जम्मू कश्मीर के राज्यपाल के तौर पर सत्यपाल मलिक रह चुके हैं। पुलवामा में हुए हमले पर उन्होंने भाजपा को निशाने पर लिया था और तमाम सवाल खड़े किए थे। उसके बाद किसान आंदोलन को उन्होंने खुलेआम समर्थन दिया था। देखा जाए तो वह राज्यपाल रहते हुए भी भाजपा से मुखर नजर आते थे। वह भाजपा को ही निशाने पर रखने से पीछे नहीं हटते थे। अब भी वह लगातार भाजपा पर निशाना साध रहे हैं।
1974 से की थी राजनीति की शुरुआत
हिसावदा निवासी पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक सांसद भी रहे और राज्यसभा भी गए थे। उनकी राजनीति का सफर वर्ष 1974 से शुरू हुआ था। उस समय वह पहली बार बागपत विधानसभा सीट से विधायक बने थे। वह चौधरी चरण सिंह के करीबी माने जाते थे। उसके बाद रालोद की ओर से उन्हें 1980 में राज्यसभा भेजा गया। 1984 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इसके बाद उन्हें कांग्रेस ने भी राज्यसभा भेजा था। हालांकि वर्ष 1987 में कथित बोफोर्स घोटाले के बाद सत्यपाल मलिक ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद वर्ष 1988 में वीपी सिंह के नेतृत्व वाले जनता दल में सत्यपाल मलिक शामिल हो गए और 1989 में अलीगढ़ से लोकसभा का चुनाव जीत कर सांसद चुने गए। वर्ष 1996 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर फिर से अलीगढ़ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद सत्यपाल मलिक कभी चुनाव नहीं जीत सके।
वर्ष 2004 में वह सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए और बागपत से चुनाव लड़ा, लेकिन यहां भी हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2012 में भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था। वर्ष 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद सत्यपाल मलिक को वर्ष 2017 में बिहार का राज्यपाल बनाया गया। बिहार के बाद उन्हें जम्मू कश्मीर की जिम्मेदारी मिली। वर्ष 2018 में उन्हें जम्मू कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया।
उन्हीं के कार्यकाल में धारा 370 को हटाया गया। वर्ष 2019 में उन्हें गोवा का राज्यपाल बनाया गया। वहां से 2020 में उन्हें मेघालय का राज्यपाल बनाया गया। अब वह दिल्ली में निवास करते हैं और बागपत में अपने पैतृक घर पर उनका आना जाना नहीं है। यहां कार्यक्रमों में जरूर वह आए हैं। वर्तमान में भी वह किसान आंदोलन में मांगों को सही बता रहे हैं।

