जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर चुनाव आयोग ने एक बार फिर तीखा पलटवार किया है। राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेताओं का नाम लिए बिना आयोग ने कहा है कि “बिना सबूत आरोप लगाने की बजाय लिखित शिकायत दर्ज कराएं, ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।”
चुनाव आयोग ने बयान में कहा कि “’एक व्यक्ति, एक वोट’ का सिद्धांत भारतीय लोकतंत्र का मूल आधार है और यह 1951-52 से अब तक हर चुनाव में लागू होता रहा है। अगर किसी के पास किसी भी व्यक्ति द्वारा दो बार मतदान करने का कोई सबूत है, तो उसे शपथ पत्र के साथ आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।”
‘वोट चोर’ जैसे शब्द मतदाताओं का अपमान: चुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने कहा कि “‘वोट चोर’ जैसे गंदे शब्दों का इस्तेमाल कर मतदाताओं और चुनाव कर्मचारियों पर सीधा हमला किया जा रहा है।” आयोग ने इस प्रकार के बयानों को न केवल “राजनीतिक गैर-जिम्मेदारी”, बल्कि “भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की साजिश” बताया।
पहले भी राहुल गांधी को भेज चुका है चुनाव आयोग नोटिस
इससे पहले कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर वोट चोरी और भाजपा से मिलीभगत के आरोपों पर भी आयोग ने तीखा रुख अपनाया था। आयोग ने साफ कहा था कि यदि राहुल गांधी अपने आरोपों को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें अपने विश्लेषण को लेकर एक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने चाहिए।
चुनाव आयोग का कहना था, “अगर वह अपने आरोपों पर विश्वास रखते हैं, तो शपथ पत्र देने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यदि नहीं करते, तो उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।”
राहुल गांधी के आरोप क्या हैं?
राहुल गांधी ने हाल ही में दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर दावा किया था कि:
भाजपा और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत हुई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ 25 सीटों के मामूली अंतर से सत्ता में लौटे।
“चुनाव आयोग भाजपा को भारत की चुनावी व्यवस्था नष्ट करने में मदद कर रहा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि आयोग कर्नाटक की महादेवपुर विधानसभा सीट से जुड़े आंकड़े नहीं दे रहा।
राहुल का दावा है कि यदि अन्य सीटों पर भी इसी तरह से आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए, तो “हमारे लोकतंत्र की सच्चाई सामने आ जाएगी।”
दो टूक संदेश: शपथ पत्र दो या माफी मांगो
चुनाव आयोग ने विपक्ष को दो विकल्पों के रूप में पेश किया है:
शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करें और आरोपों को दस्तावेजी रूप में दर्ज कराएं,
या फिर देश से माफी मांगें, क्योंकि बिना प्रमाण के गंभीर आरोप लगाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है।
क्या कहता है यह विवाद?
यह ताज़ा विवाद इस ओर इशारा करता है कि 2024 लोकसभा चुनाव के परिणामों को लेकर राजनीतिक असंतोष अभी भी जीवित है, और विपक्ष यह मुद्दा छोड़ने के मूड में नहीं है। वहीं चुनाव आयोग अपने ऊपर लग रहे हर आरोप का जवाब संवैधानिक और कानूनी आधार पर दे रहा है।

