- संसद में कैंट ऐक्ट पारित होने की स्थिति में पहले भी कराए जा सकते हैं चुनाव
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कैंट बोर्ड का कार्यकाल एक बार फिर छह माह के लिए बढ़ा दिया गया है। हालांकि रक्षा मंत्रालय के इस आशय के आदेश में छह माह से पूर्व भी चुनाव कराए जाने की गुंजाइश रखी गयी है। दरअसल उपाध्यक्ष के चुनाव कैसे कराए जाए इसको लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। उपाध्यक्ष के चुनाव के तरीके को लेकर तस्वीर पूरी तरह से साफ होते ही रक्षा मंत्रालय की ओर से चुनाव का ग्रीन सिग्नल मिल जाएगा। छह माह के लिए कैंट बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाए जाने का आदेश मंत्रालय की बेवसाइट पर शुक्रवार की देर शाम को अपलोड हुआ था।
कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष का बजाय सदस्यों के सीधे पब्लिक मतदान द्वारा कराए जाने के लिए देश भर की छावनियों से सरकार की ओर से राय मांगी गयी थी। मेरठ छावनी से भी इस पर राय भेजी गयी थी। जो आपत्ति व संशोधन भेजे गए थे, उनका प्रस्ताव बनाकर मंत्रालय की ओर से सरकार को भेजा गया है।
सरकार को इन संशोधनों को संसद से पारित कराना है। यदि संसद में प्रस्ताव पारित हो जाता है तो फिर बोर्ड उपाध्यक्ष का चुनाव सीधे पब्लिक द्वारा कराए जाने का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि इसके लिए सरकार की ओर से एक अधिसूचना जारी की जाएगी।
जरूरी नहीं कि उपाध्यक्ष का सीधे पब्लिक द्वारा चुना जाना टल भी सकता है। जानकारों का कहना है कि इसको लेकर कैंट ऐक्ट संशोधन यदि पास नहीं हो पाता तो ये भी संभव है कि फिलहाल सरकार की ओर से पुरानी व्यवस्था को ही बहाल रखा जाए। या फिर कुछ समय के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर चुनाव ही टाल दिए जाएं, लेकिन ये तमाम कयास भर हैं। जो आदेश मंत्रालय की ओर से अपलोड किया गया है। उसमें तो चुनाव किसी भी समय कराए जाने की गुंजाइश छोड़ी गयी है।
तैयारियों को लगा झटका
जो संभावित प्रत्याशी कैंट बोर्ड चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। चुनाव को फिलहाल टाल दिया जाना उनके लिए बुरी खबर है। वहीं, दूसरी ओर कुछ पुराने व धुरंधर माने जाने वाले ऐसे भी प्रत्याशी है जो दूसरी पारी की शुरूआत के लिए अखाडे में उतरने के लिए ताल ठोक रहे हैं, उनके लिए इसको चुनावी तैयारियों के लिहाज से अच्छी खबर भी माना जा रहा है।
सीईओ से मिले बोर्ड सदस्य
चुनाव टाले जाने की जैसे ही भनक लगी कैंट बोर्ड के तमाम सदस्य सीईओ नवेन्द्र नाथ से मिलने को कैंट बोर्ड पहुंच गए। सीईओ से सदस्यों की क्या बातचीत हुई है हालांकि इसका अधिकृत ब्योरा तो अभी नहीं मिल सका है, लेकिन माना जा रहा है कि कैंट बोर्ड के बढे हुए कार्यकाल में कैसे काम करना है इसी पर चर्चा की गयी है। बोर्ड के सदस्यों ने कार्यकाल बढ़ाए जाने की पुष्टि की है।
सोढ़ी, अनिल के वार्ड गारवेज फ्री, सर्टिफिकेट का इंतजार
स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग के लिए कैंट के सभी आठों वार्ड के सदस्यों के वार्ड गारवेज फ्री सर्टिफिकेट का होना जरूरी है। वार्ड एक की रिनी जैन, दो की बुशरा कमाल, वार्ड तीन की बीना वाधवा, वार्ड चार के नीरज राठौर, वार्ड छह की मंजू गोयल, वार्ड सात के धर्मेंद्र सोनकर के सदस्यों के वार्ड गारवेज फ्री के सर्टिफिकेट आ गए हैं, लेकिन उपाध्यक्ष विपिन सोढी व वार्ड पांच के सदस्य अनिल जैन के सर्टिफिकेट का अभी इंतजार किया जा रहा है।
उनकी ओर से इसके प्रारूप के अध्ययन की बात कहीं गयी सुनी जाती है। वहीं, दूसरी ओर शनिवार को कई सदस्य सीईओ से मिलने के लिए कैंट बोर्ड पहुंचे। सीईओ से मुलाकात में कुछ सदस्यों ने अपने वार्ड के कामों में देरी की भी शिकायत की है। हालांकि कोई भी सदस्य सीईओ से हुई मुलाकात को लेकर मुंह खोलने को तैयार नहीं।

