Monday, March 16, 2026
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हस्तिनापुर के ‘रण’ में हाथी की चिंघाड़ फीकी

  • बाहरी का नारा बसपा प्रत्याशी के गले की बना फांस

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: विधानसभा चुनाव में हस्तिनापुर की महाभारत जीतना बसपा के लिए आसान नहीं है। बाहरी होने का नारा यहां बसपा प्रत्याशी के गले की फांस बन गया है। यही वजह है कि इस बार इस सीट पर हाथी की चिंघाड़ फीकी दिख रही है।
बसपा ने हस्तिनापुर सीट पर संजीव जाटव को चुनावी मैदान में उतारा है।

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यहां के मतदाताओं के बीच लगातार संजीव का विरोध हो रहा है। प्रत्याशी के बाहरी होने के नारे क्षेत्र में गूंज रहे हैं। कई गांव में उनके सजातीय मतदाताओं के बीच बसपा प्रत्याशी को विरोध का सामना करना पड़ा है। यही वजह है कि इस बार के चुनाव में हस्तिनापुर का रण फतेह करना बसपा के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बसपा कार्यकर्ता इस बात को लेकर परेशान है कि आखिर उनके बीच से प्रत्याशी को चुनाव मैदान में क्यों नहीं उतारा गया?

दरअसल, संजीव जाटव का हस्तिनापुर से कोई लेना-देना नहीं हैं, वह बहारी प्रत्याशी हैं। इसी वजह से उन्हें विरोध का सामना भी करना पड़ रहा हैं। बसपा कभी हस्तिनापुर में मजबूत स्थिति में हुआ करती थी, लेकिन अब बसपा सबसे कमजोर पायदान पर खड़ी हैं। इसको बसपा नेता भी मानते हैं, लेकिन पैरासूट से उतारे गए प्रत्याशी को लेकर भी कार्यकर्ताओं ने मौन साध रखा हैं।

जगह-जगह बसपा प्रत्याशी का विरोध भी हो रहा हैं, जो बसपा सुप्रीमो तक भी बात पहुंच रही हैं। बता दें कि, 2007 के चुनाव में बसपा ने यहां जीत दर्ज की थी और राज्य में मायावती के नेतृत्व में सरकार बनी थी। 2012 में बसपा तीसरे व 2017 के चुनाव में दूसरे स्थान पर रही थी। बाहरी और कमजोर प्रत्याशी का नारा इस बार यहां बसपा को और कमजोर कर रहा है।

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