
कि जैसे-जैसे जीवन और आजीविका के साधन घटते जाएंगे, रार बढ़ती जाएगी। आज, महंगाई पर रार है; कल को भूमि, पानी, बिजली जैसे संसाधनों से लेकर अस्पताल में इलाज व रोजगार को लेकर रार बढ़ेगी। अमीर-गरीब, किसान-उद्योगपति, किसान-व्यापारी, सरकार-समाज के वर्ग संघर्ष बढ़ेंगे। रोजगार में आरक्षण के कारण जाति संघर्ष बढ़ेंगे। जलवायु परिवर्तन का यह दौर, भारत में भी छीना-झपटी, वैमनस्य, हिंसा और अपराध का नया दौर लाने वाला साबित होगा। दुखद है कि तापमान वृद्धि रोकने जैसे जीवन रक्षा कार्य में भी दुनिया, मसलों में बंट गई है। भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने भी ‘बेसिक’ नाम से अपना एक अलग मंच बना लिया है।