Friday, March 27, 2026
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सीएचसी होने के बाद भी 20 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है उपचार के लिए

  • सीएचसी के कमरों में भरे हुए उपले और लकड़ी, गंदगी के लगे हुए है अंबार

जनवाणी संवाददाता |

दाहा: कस्बा टीकरी मेें पीएचसी से सीएचसी बनने पर लोगों में एक खुशी की लहर दौड़ी थी कि सीएचसी पर सभी रोगों के चिकित्सक बैठेंगे और कस्बे में भी उपचार संभव हो सकेगा। लेकिन यहां पर कोई भी महिला चिकित्सक नहीं है, जिसके चलते महिलाओं को 20 किलोमीटर दूरी पर उपचार कराने के लिए जाना पड़ता है। इसके अलावा सीएचसी के कमरों में गोबर के उपले व लकड़ी भरी हुई है। सफाई कर्मचारी नहीं होने से गंदगी के ढेर लगे हुए है।

बता दे कि कस्बा टीकरी में बहुत पुराने समय से पीएचसी बनाई गई थी। पीएचसी बनने के बाद भी यहां पर कोई भी चिकित्सक नहीं पहुंचा और बिल्डिंग में लोगों ने कब्जा कर लिया। पीएचसी परिसर में एक बार तो भेसा बुग्गी खड़े होने लगी थी और महिलाओं ने गोबर के उपले पाथने शुरू कर दिए थे। देखने में पीएचसी के बजाए एक घेर नजर आने लगा था। जिसकी हालत बदहाल होती चली गई।

जिसके बाद लोगों ने धरने-प्रदर्शन करने के बाद आवाज उठाई कि पीएचसी को सीएचसी में तब्दील किया जाए और यहां पर चिकित्सकों की तैनाती की जाए, ताकि मरीजों को कस्बे में भी उपचार मिलना शुरू हो जाए और कहीं पर बाहर नहीं जाना पड़े। लेकिन सीएचसी बनने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ और यहां पर किसी महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई।

जिसके चलते महिलाओं को कस्बे से 20 किलोमीटर दूर उपचार कराने के लिए जाना पड़ता है। यहीं नहीं अभी भी सीएचसी के कुछ कमरों में गोबर के उपले व लकड़ी भरी हुई है। सीएचसी पर कोई भी सफाई कर्मचारी मौजूद नहीं है, जो उपचार कर सके। सीएचसी पर तैनात फार्मासिस्ट संजे सिंह का कहना है कि गत तीन माह से सफाई कर्मचारी नहीं है और नहीं वार्ड ब्वाय है।

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