Sunday, March 22, 2026
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योगी सरकार में भी गोवंशों की हो रहीं दुर्दशा

  • खुले में घूम रही गाये, खा रही कूड़ा-करकट
  • नगर निगम, प्रशासन से नहीं संभाली जा रही व्यवस्था

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मंच पर दावे कुछ हों, कितनी भी बड़ी-बड़ी बातें क्यों न हों, लेकिन हकीकत और फसाने में काफी अंतर होता है। बात समझने के लिये हमें मेरठ के आवारा पशुओं का जिक्र करना होगा। मेरठ में गोवंश की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। गोवंश खुलेआम सड़कों पर घूम रहे हैं, लेकिन अधिकारियों के दावे अलग हैं। आम लोगों का नहीं पता, लेकिन यहां के अधिकारी गोवंश, उनके रखरखाव, उनकी देखभाल को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। जबकि सीएम खुद इसे लेकर निर्देश जारी कर चुके हैं। यहां गोशालाओं में पशुओं के चारे में भी लापरवाही बरती जा रही है।

प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोपाष्टमी से एक दिन पूर्व प्रदेश में गायों और गोवंश के संरक्षण, संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा था कि एक तरफ गायों की पूजा और दूसरी तरफ उनका दूध निकालकर उन्हें सड़कों पर लावारिस छोड़ देने की प्रवृत्ति लोगों की कथनी और करनी में अंतर को दिखाता है। उन्होंने गायों के लिये प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किये थे।

उन्होंने कहा था कि यदि कोई किसान गोवंश को पालना चाहता है तो प्रति किसान चार गोवंश देने के साथ ही प्रति गोवंश भरण-पोषण के लिए उसे 900 रुपये भी दिए जाएंगे। इसके अलावा कुपोषित बच्चों वाले परिवार को एक ब्यायी गाय देने की व्यवस्था भी गई। उस गाय के भरण पोषण के भी 900 रुपये दिए जा रहे हैं, लेकिन इन सबके बावजूद मेरठ में हालात सुधरने को तैयार नहीं हैं।

यहां अधिकारियों की अनदेखी के चलते हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। यहां मेरठ की सड़कों पर गायों को कूड़ा-करकट खाते देखा जा सकता है। हालात इतने खराब है कि पशु सड़कों पर खुलेआम घूम रहे हैं और कोई इनका ध्यान रखने वाला नहीं है। भाजपा की सरकार आने और योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार ने अवैध बूचड़खानों पर लगाम कसी और गोकशी पर सख्ती हुई।

इसका परिणाम ये निकला कि आवारा पशुओं की आबादी तेजी से बढ़ने लगी और आज हालात ऐसे हैं कि इनके चलते जहां एक तरफ सड़क हादसों की संख्या में इजाफा हुआ है तो वहीं किसानों को भी भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। जैसी स्थिति इन पशुओं की है ये कहना अतिश्योक्ति नहीं है कि सरकार इनको लेकर बड़ी-बड़ी बातें तो खूब कर रही है। मगर बात जब इनके रखरखाव की आ रही है तो शासन और प्रशासन दोनों ही एक-दूसरे की बगले झांकते नजर आ रहे हैं।

चारे में भी की जा रही घोर लापरवाही

इन गोशालाओं में पशुओं को दिये जाने वाले चारे में भी लापरवाही बरती जाती है। शहर की अधिकांश सरकारी गोशालाओं में यही हाल है। अधिकारी निगरानी करते नहीं है और कर्मचारी यहां अपनी मनमानी करते हैं। चारे के नाम भी बड़े बड़े घोटाले किये जाते हैं। कई बार यहां गोशालाओं में पशुओं को सड़ा हुआ चारा तक खिला दिया जाता है, लेकिन योगी सरकार में भी इस प्रकार की लापरवाही बरती जाती है और अधिकारी आंखे मूंदे बैठे रहते हैं। शहर में परतापुर, मोहकमपुर, दौराला समेत सभी गोशालाओं में कुछ ऐसा ही हाल है।

कर्मचारियों की लापरवाही से जाती है पशुओं की जान

शहर की गोशालाओं के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। वहां क्षमता से अधिक पशुओं को रखा जाता है। जिस कारण उनका रखरखाव नहीं हो जाता है। इसमें परतापुर स्थित कान्हा गोशाला की बात की जाये तो इसके संचालन का जिम्मा नगर निगम है। यहां 300 के आस पास पशुओं को रखने की क्षमता है, लेकिन यहां 400 से ऊपर पशुओं को रखा जा रहा है। जिस कारण हालात खराब होते जा रहे हैं। पिछले कुछ माह पहले की बात करें तो यहां कर्मचारियों की लापरवाही के चलते तीन गोवंश की मौत भी हो गई थी और आये दिन इस प्रकार के हादसे होते रहते हैं।

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