जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (एपीआई), सहारनपुर ब्रांच की मासिक वैज्ञानिक बैठक जी.पी.ओ. रोड स्थित एक होटल के सभागार में आयोजित की गई। बैठक में ग्राफिक एरा हॉस्पिटल, देहरादून से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस (अग्नाशय की तीव्र सूजन) विषय पर विस्तृत जानकारी साझा करते हुए इसके कारणों, लक्षणों, उपचार और बचाव के उपायों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सचिन देव मुंजाल ने बताया कि एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के प्रमुख कारणों में पित्त की थैली में पथरी तथा अत्यधिक शराब का सेवन शामिल है। इसके अतिरिक्त मिर्गी की कुछ दवाइयों के दुष्प्रभाव और रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स का अत्यधिक बढ़ जाना भी इस बीमारी का कारण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और उपचार से इस बीमारी की जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. हरि मंगलथ ने बताया कि एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के मरीजों को पेट में अत्यधिक तेज दर्द, उल्टी, मतली तथा बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में कई मामलों में इस बीमारी का सफल उपचार एंटीबायोटिक्स के बिना भी किया जा सकता है, बशर्ते सही समय पर उचित चिकित्सा उपलब्ध हो।वहीं डॉ. मुस्तफा ने पैंक्रियाटाइटिस से होने वाली जटिलताओं पर चर्चा करते हुए बताया कि इस बीमारी के दुष्परिणामस्वरूप बनने वाले स्यूडोसिस्ट (Pseudo Cyst) जैसी समस्याओं का आधुनिक सर्जिकल तकनीकों के माध्यम से प्रभावी उपचार संभव है।
उन्होंने जटिल मामलों में बहु-विषयक चिकित्सा दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी बल दिया।एपीआई सहारनपुर ब्रांच के अध्यक्ष डॉ. कलीम अहमद ने कहा कि पैंक्रियाटाइटिस के मरीजों को दवाओं के साथ-साथ अपने खान-पान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि आहार में ताजे फल, हरी सब्जियां, ओट्स, किनोआ और एवोकाडो जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना लाभकारी होता है। साथ ही शराब और धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाकर रखने की सलाह दी।कार्यक्रम के दौरान एपीआई के सचिव डॉ. विकास अग्रवाल ने सभी अतिथि चिकित्सकों का स्वागत किया।
बैठक का संचालन वैज्ञानिक सचिव डॉ. सौम्या जैन ने किया।इस अवसर पर डॉ. नरेश नौसरान, डॉ. प्रवीण शर्मा, डॉ. मोहन पाण्डेय, डॉ. जयपाल चन्द, डॉ. अंकुर उपाध्याय, डॉ. अतुल जैन, डॉ. प्रवीण चावला, डॉ. अंशुल गुप्ता, डॉ. अजय कुमार जैन, डॉ. आर.एस. पवार, डॉ. प्रवीण मित्तल, डॉ. अरिष्ट जैन, डॉ. रजत बंसल, डॉ. सुशान्त शर्मा, डॉ. अनिल मलिक, डॉ. एस.के. भण्डारी, डॉ. निशान्त सक्सेना, डॉ. सत्यानंद साथी, डॉ. संजय कपिल सहित जनपद के अनेक वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।बैठक के अंत में विशेषज्ञों ने चिकित्सकों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए पैंक्रियाटाइटिस के नवीनतम उपचार, निदान तकनीकों और मरीजों की देखभाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।

