- जल दिवस विशेष: लगातार घट रहा जलस्तर
- मेरठ में कई ब्लॉकों में डार्क जोन में पहुंच चुका है जल स्तर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जल ही जीवन है, जल को बचाना है, जैसे नारे यहां समाज सेवी संस्थाओं के मुंह और प्रशासन की ओर से बार-बार सुनने को मिल सकते हैं, लेकिन जल संरक्षण को लेकर कार्यों की जमीनी स्तर पर बात की जाये तो कार्य न के बराबर है। मेरठ की बात करें तो यहां 12 ब्लॉकों में से कई ब्लॉकों में लगातार जल स्तर घटता जा रहा है। उसके बावजूद यहां जल संरक्षण को लेकर कोई खास कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। विकास के नाम पर लगातार पर्यावरण का शोषण हो रहा है। पानी को जमीन में रोकने के लिये पेड़ों को होना जरूरी है, लेकिन वन क्षेत्र लगातार घट रहा है। हाइवे के नाम पर पेड़ों को काटा जा रहा है। जिसका असर जलस्तर पर पड़ रहा है।
आगामी 22 मार्च को जल दिवस है। जिसे लेकर कई समाज सेवी संस्थाएं तैयार हो चुकी हैं कि किस प्रकार भूजल के घटते स्तर को रोका जाये, लेकिन इससे पहले यह सभी संस्थाएं चुप रहती हैं, लेकिन अब जैसे ही दिवस नजदीक है तो तैयारी भी तेज है। पर्यावरण की बात की जाये तो लगातार शहरी क्षेत्र बढ़ता जा रहा है। मेरठ में भी शहर के चारों ओर डवलपर्स कालोनी काट रहे हैं। जिसके लिये पेड़ों को भी काटा जाता है। विकास के नाम पर हो रहे पर्यावरण के शोषण को लेकर पर्यावरण विद अनिल जोशी ने भी चिंता व्यक्त की है।
खुलेआम आम बहाया जा रहा स्वच्छ जल
शहर में कई जगहों पर खुलेआम स्वच्छ जल को वेस्ट किया जा रहा है। यहां शहर में सैकड़ों की संख्या में कार और बाइक वॉशिंग सेंटर खुले हुए हैं। जिनसे साफ पानी को बर्बाद किया जाता है। प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। शहर में हापुड़ रोड, गढ़ रोड, दिल्ली रोड समेत पूरे शहर में हजारों की संख्या में ऐसे सेंटर हैं, जो नियम विरुद्ध चल रहे हैं और यहां सबमर्सिबल लगाकर पानी को बर्बाद किया जाता है, लेकिन जिला प्रशासन भी इस ओर से आंखे मंूदे बैठा है।
वर्षा जल संचयन को अब चलेंगे अभियान
बारिश के पानी को बचाने के लिये स्कूलों और समाजसेवी संस्थाओं की ओर से अभियान चलाये जाते हैं, लेकिन शहर में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की बात की जाये तो उनकी हालत बद से बदतर हो चुकी है। उनमें सुधार के लिये कोई कार्य नहीं किया जाता है। जिससे पानी का संरक्षण हो सके।
हालांकि देहात की बात की जाये तो गांवों में सोख्ता गड्ढा बनाकर पानी को संरक्षित करने की पहल जरूर शुरू हुई है, लेकिन अब देखना यह है कि कहां तक इसका कार्य हो पाता है। मुख्य विकास अधिकारी के संरक्षण में कई गांवों में प्राथमिक विद्यालयों और सामुदायिक केन्द्रों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाये गये हैं। अब भी इस संबंध में कई कार्य चल रहे हैं।
पर्यावरण विद अनिल जोशी ने की पेड़ लगाने की अपील
प्रख्यात पर्यावरण विद डा. अनिल प्रकाश ने कहा कि कोरोना महामारी ने मनुष्य को उसकी अहमियत बता दी है। कोरोना प्रकृति से मनुष्य द्वारा की गयी छेड़छाड़ का परिणाम है। वनों के दोहन और पेड़ों के कटान के कारण यह स्थिति उत्पन्न हो गयी थी कि लोगों को सांस लेने के लिए आॅक्सीजन के महंगे सिलेंडर खरीदने पड़े। आज के दौर में विकास के नाम पर प्रकृति का शोषण किया जा रहा है यह अनुचित है।
वर्तमान समय में यह आवश्यक है कि पर्यावरण को ध्यान में रखकर देश का विकास किया जाये, बड़ी इमारतें बनाने के लिए जंगल काट दिये गए हैं, नदियों पर बांध बना दिये गये हैं। यह विकास खोखला है, विकास के करण जब पृथ्वी पर मानव ही असुरक्षित है तो प्रगति और विकास किस काम का मानव को यह समझना होगा। विकास के नाम पर प्रकृति का शोषण सही नहीं है।
जल संरक्षण के लिए व्यक्तिगत स्तर पर करें प्रयास
- तीन दिन में केवल एक बार नहायें, स्नान करने में एक व्यक्ति 20 से 50 लीटर पानी बर्बाद कर देता है।
- कपड़े बर्तन आदि धोते समय नल खुला न छोडेÞं।
- ग्लास में पानी उतना ही लें जितनी आवश्यकता हो।
- काली नदी बचाने के लिये करें सामुहिक प्रयास।
- नदी के आसपास अधिक से अधिक मात्रा में वृक्षारोपण करें।
- नदी के जल को दूषित न होने दें।
मेरठ में पांच ब्लॉक हैं डार्क जॉन में
भूगर्भ जलस्तर तेजी से गिरने के कारण जिले के 12 ब्लॉकों में से पांच ब्लॉक खतरे में आ गए हैं। केंद्र सरकार ने इन पांच ब्लॉकों का चयन कर जल शक्ति अभियान में शामिल किया था। वर्ष 2020 की ही बात करें तो जिले के खरखौदा, माछरा, मेरठ, परीक्षितगढ़ और रजपुरा में हालात ज्यादा खराब थे।
इन ब्लॉकों को डार्क जोन में शामिल किया गया था। यहां पानी के घटते जल स्तर को रोकने के लिये कुछ अभियान भी चलाये गये। जिसमें वर्षा के जल का संचयन, पौधरोपण, बॉडी एंड वॉटर शेड डेवलपमेंट, रियूज एंड बोरवेल डिस्चार्ज स्ट्रक्चर आदि शामिल हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां हालात ठीक नजर नहीं आ रहे हैं। डार्क जोन में शामिल पांच ब्लॉकों में खरखौदा में जलस्तर तेजी से कम हुआ था। यहां वर्ष 2020 तक पिछले पांच सालों में 3.18 मीटर जलस्तर गिरा था।
इतना गिरा जलस्तर (मीटर में)
खरखौदा 3.18
माछरा 3.12
मेरठ 1.39
परीक्षितगढ 2.55
रजपुरा 2.42
हस्तिनापुर 0.83
दौराला 0.49
जानीखुर्द 0.31
मवाना 0.21
रोहटा 0.81
सरधना 0.21
सरूरपुर 0.33

