- 24 घंटे में मिल रहा सिर्फ टोकन, दूसरे दिन मिल रहा आॅक्सीजन सिलेंडर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रोजाना आॅक्सीजन प्लांटों पर आॅक्सीजन आ रही है। तीन से चार हजार आॅक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति की जा रही है। उसके बावजूद प्लांटों से भीड़ हटने का नाम नहीं रहे रही है। हालात यह हो चुके हैं कि लोग एक दिन लाइन में लगकर सिर्फ टोकन प्राप्त कर पा रहे हैं और दूसरे दिन आॅक्सीजन सिलेंडर के लिये लाइन में लगते हैं। उसके बाद ही उनकों आॅक्सीजन सिलेंडर मिल पाता है।
कुछ प्लांटों पर तो हाल यह है कि वहां लोग सिर्फ लाइन में ही लगे रह जाते हैं उन्हें न तो आॅक्सीजन सिलेंडर ही मिल पाता है और न ही टोकन।
आॅक्सीजन प्लांटों पर हालात सुधरने के नाम नहीं ले रहे हैं। अब तो यहां लोगों को लाइन में लगने की आदत सी हो गई है। अग्रवाल गैस प्लांट के हालात तो बद से बदतर हो चुके हैं। वहां पर लोगों को आसानी से सिलेंडर ही नहीं मिल पाते हैं जिसके चलते लोग आॅक्सीजन प्लांटों पर सिर्फ चक्कर ही लगा रहे हैं।
वहीं, दूसरी ओर माहेश्वरी प्लांट पर एक दिन लोगों को टोकन दिया जा रहा है और दूसरे दिन सिलेंडर बांटा जाता है। यहां लोगों को दो दिन लाइन में लगना पड़ता है उसके बाद एक सिलेंडर मिल पाता है।

बता दें कि मेरठ में पांच प्लांटों पर आॅक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। इनमें से बिजौली स्थित मेरठ मेडिआॅक्सी प्लांट पर अस्पताल संचालकों को आॅक्सीजन दी जा रही है। शनिवार को यहां 14 टन आॅक्सीजन प्लांट पर आई। कन्सल गैस एजेंसी पर भी शनिवार को पांच टन आॅक्सीजन आई।
यहां पर भी केवल अस्पताल वालों को आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा कृष्णा एयर प्रोडक्ट से भी सिर्फ अस्पतालों को ही आॅक्सीजन की सप्लाई की जा रही है। मेरठ में सिर्फ दो आॅक्सीजन प्लांटों पर आम आदमी को आॅक्सीजन की सप्लाई की जा रही है इनमें अग्रवाल गैस प्लांट और माहेश्वरी प्लांट पर। अग्रवाल गैस प्लांट पर शनिवार को चार टन आॅक्सीजन आयी उसके बावजूद यहां लोगों को आॅक्सीजन की सप्लाई नहीं की गई।
लोगों का आरोप था कि यहां प्लांट संचालक सेटिंग करके लोगों को आॅक्सीजन की आपूर्ति करा रहा है। इसके अलावा माहेश्वरी प्लांट पर भी हाल बुरा है। यहां लोग एक दिन लाइन में लगकर सिर्फ टोकन प्राप्त कर पाये। उनसे कहा गया कि कल आना और आॅक्सीजन सिलेंडर लेकर चले जाना। इस प्रकार से लोगों को 36 घंटे के बाद एक आॅक्सीजन सिलेंडर प्राप्त हो रहा है। अगर यही हालात रहे तो ऐसे में मरीजों का क्या हाल होगा।
सुबह से लाइन में, मिला सिर्फ टोकन
माहेश्वरी प्लांट पर लाइन में लगे नवीन ने बताया कि उन्हें लाइन में लगकर कुछ हासिल नहीं हुआ है। वह यहां सुबह से लाइन में लगे हैं और उन्हें अब जाकर टोकन दिया गया। यहां पहले उन लोगोें को आॅक्सीजन दी जा रही है जो लोग शुक्रवार में आकर यहां से टोकन लेकर गये थे। आज लाइन में लगने वालों को सिर्फ टोकन दिया गया और जो लोग कल टोकन लेकर गये थे उन्हें आज सिलेंडर दिया जा रहा है।
उनके मरीज की हालत खराब है। वह होम आइसोलेशन में है। डॉक्टर ने आॅक्सीजन की मांग की है। अगर जल्द ही आॅक्सीजन नहीं मिली तो कुछ भी हो सकता है। ऐसे में अब आज लाइन में लगकर सिर्फ टोकन मिला है और कल सिलेंडर की व्यवस्था हो जाएगी। इससे तो काफी देर हो जाएगी। प्रशासन को सभी प्लांटों पर आम आदमी के लिये एक अलग से काउंटर पर बना देना चाहिए जिससे उन्हें परेशानी न हो।

500 के लिये लाइन में लग रहे श्रमिक
आज जब लोगों के पास काम नहीं है तो कुछ लोगों ने आॅक्सीजन सिलेंडर के लिये लगने वाली लाइनों में लगकर ही रुपये कमाने का रास्ता ढूंढ़ लिया है। बता दें कि लोग 500 रुपये लेकर लाइन में लग रहे हैं। बड़ी-बड़ी गाड़ियों में आने वाले लोग यहां लोगों को लाइन में लगा रहे हैं और इसके बदले उन्हें 500 रुपये दिये जाते हैं।
ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिसे लेकर अग्रवाल गैस प्लांट पर लोगों ने हंगामा भी किया, लेकिन किसी पर इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ा हालात वैसे के वैसे ही हैं। आॅक्सीजन प्लांटों के आस-पास आपकों ऐसे लोग मिल जाएंगे जो लाइन में लगने का कार्य कर रहे हैं।
सभी प्लांटों पर मिले आॅक्सीजन
प्रदीप कुमार का कहना कि प्रशासन की ओर से आॅक्सीजन दिलाने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन को यह प्रक्रिया और आसान करनी चाहिए जिससे आसानी से आॅक्सीजन मिल सके। प्रदीप ने बताया कि वह अग्रवाल प्लांट पर पहले लाइन में लगा था, लेकिन उसे वहां पर आॅक्सीजन नहीं मिल पाई जिसके बाद वह आगर यहां माहेश्वरी प्लांट पर लाइन में लग गया, लेकिन यहां लोग ब्लैक करने का आरोन लगा कर हंगामा कर रहे हैं। उसने कहा कि यहां भी पहले लाइन में लगकर उसे सिर्फ टोकन ही मिला है अब कल न जाने कितने घंटे और लाइन में लगना पड़ेगा और उसके बाद ही उसे आॅक्सीजन मिल पायेगी।
आर्मी ने संभाली कमान
कोराना वायरस के खिलाफ जंग में अब सेना ने भी कमान संभाल ली है। तैयारियों के साथ उतर रही सेना ने शहर के छावनी में हर जगह अपनी व्यवस्था चाक-चौबंद कर रही है। लोगों को विशेष तौर पर पूर्व सैनिकों, वीर नारियों व वेटरन आॅफिसर को आॅक्सीजन सिलेंडर व एंबुलेंस सेवाएं मुहैया करा रही है।
वहीं सेना ने अब सैनिक अस्पताल के सामने कोविड मैनेजमेंट सेल बनाया है, जिसकी इलाज के लिए आने वाले मरीजों के ध्यान में रखकर बनाया गया है। यहां पर प्राथमिक उपचार के बाद ही अस्पताल में भेजा जाता है।
इन्हें मिलेगा कोविड मैनेजमेंट का लाभ
छावनी स्थित चार्जिंग रैम डिवीजन की ओर से तैयार किए गए इस कोविड मैनेजमेंट सेल में पूर्व सैनिकों, वीर नारियों व उनके स्वजनों को मदद मुहैया कराई जाएगी। सैनिक अस्पताल में दिखाने आने वाले सैनिकों व पूर्व सैनिकों के साथ उनके स्वजन भी होते हैं।
स्वजन को अस्पताल के भीतर भीड़ से बचाने के लिए यह व्यवस्था की गई है। कोविड मैनेजमेंट सेल में पहुंचने पर सभी का सैनिटाइजेशन व थर्मल स्कैनिंग करने के बाद उनकी प्राथमिक जांच भी की जा रही है। प्राथमिक जांच में जिन्हें अस्पताल भेजने की जरूरत है, उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए मौके पर ही ई-रिक्शा भी तैनात किए गए हैं। जिन लोगों को अस्पताल में किसी भी बीमारी के लिए दिखाने के लिए जाना पड़ता है, उनके स्वजन यहां बैठ कर इंतजार कर सकते हैं।

सिलेंडर तो मिला, लेकिन चली गई मां
माहेश्वरी प्लांट पर आॅक्सीजन लेने पहुंचे इकराम को सिलेंडर मिलने से पहले ही उसकी मां ने उसका साथ छोड़ दिया। आॅक्सीजन प्लांटों पर आजकल इसी तरह के मामले सामने आ रहे हैं। लापरवाह सिस्टम के कारण लोगों को इलाज नहीं मिल पा रहा है और वह दुनिया छोड़कर चले जाते हैं।
कई लोग ऐसे हैं जो लाइन में लगते हैं एक आॅक्सीजन सिलेंडर के लिये लेकिन जब तक उन्हें सिलेंडर मिलता है तब तक उनके अपने उन्हें छोड़कर जा चुके होते हैं। शनिवार को माहेश्वरी प्लांट पर भी एक ऐसा ही मामला सामने आया। इकराम अपनी मां के लिये आॅक्सीजन का सिलेंडर लेने पहुंचे थे, लेकिन उनकी मां तो उन्हें छोड़कर चली गर्इं लेकिन उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। जानकारी मिलने पर वह बिना आॅक्सीजन के ही वापस लौट गये।
शायद बदले हालात…प्रशासन ने कहा-24 घंटे में आॅक्सीजन सिलेंडर घर
अब आॅक्सीजन प्लांटों से आॅक्सीजन के लिये मारामारी कम हो जाएगी। यह जिम्मा प्रशासन ने अपने हाथों ले लिया है। प्रशासन अब से होम आइसोलेट मरीजों के लिये आॅक्सीजन की होम डिलीवरी करायेगा। इसके लिये प्रशासन की ओर से टीम का गठन कर दिया गया है।
जिसके लिये नगरायुक्त को जिम्मा दिया गया है। साथ ही लोगों से खाली सिलेंडर जमा कराने के लिये भी कहा गया है इसके लिये तीन सेंटर बनाये हैं।
आॅक्सीजन भरपूर होने के बाद भी लोगों को आॅक्सीजन नहीं मिल पा रही है। आॅक्सीजन प्लांटों पर आॅक्सीजन के लिये मारामारी मची हुई है। लोगों को कई कई दिन लाइन में लगने के बाद भी आॅक्सीजन नहीं मिल पा रही है। आॅक्सीजन को ब्लैक किये जाने की शिकायते मिल रही हैं। इन सब समस्याओं को दूर करने के लिये आॅक्सीजन आपूर्ति का जिम्मा अब प्रशासन ने अपने हाथों में लिया है।
प्रशासन जिन लोगों को आॅक्सीजन की आवश्यकता है उन्हें उनके घरों पर ही आॅक्सीजन की पूर्ति कराया गया। जिसके लिये एक टीम का गठन किया गया है जिसकी जिम्मेदारी नगरायुक्त मनीष बंसल को सौंपी गई है। इसके लेकर प्रशासन की ओर से पूरी तैयारी कर ली गई है। जो लोग सेंटरों पर नहीं जा पाएंगे उन्हें आॅक्सीजन सिलेंडर घर पर ही मुहैया कराया जाएगा।
आॅक्सीजन सिलेंडर जमा कराने के लिये बनाये सेंटर
डीएम के. बालाजी ने कोरोना से प्रभावित होम आइसोलेशन में उपचार ले रहे मरीजों को बड़ी राहत दी है। आॅक्सीजन सिलेंडर के लिये अब लोगों को इधर उधर नहीं भटकना पड़ेगा। मरीजों की सुविधा के लिये आॅक्सीजन गैस सिलेंडर की आपूर्ति के लिये तीन सेंटर स्थापति कर दिये गये हैं। जहां लोग आॅक्सीजन सिलेंडर प्राप्त कर सकेंगे। 24 से 48 घंटे के अंदर यह व्यवस्था शुरू करने के निर्देश दिये गये हैं।
डीएम के निर्देशानुसार नवजात विद्यापीठ इंटर कालेज दिल्ली रोड, सामुदायिक केन्द्र डिफेंस एन्क्लेव कंकरखेड़ा और सामुदायिक केन्द्र शास्त्रीनगर डी ब्लॉक आदि स्थान पर आॅक्सीजन सिलेंडर संग्रह और वितरण किये जाएंगे। अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी तत्काल प्रभाव से लगाने के लिये कहा गया है। साथ ही आॅक्सीजन सिलेंडर की रिफलिंग अग्रवाल गैसेज और माहेश्वरी गैसेज से की जाएगी।
आॅक्सीजन प्राप्त करने के लिये दस्तावेज
- आधार कार्ड की फोटो कॉपी
- डाक्टर की दवाई का पर्चा
- आॅक्सीजन लेवल रिपोर्ट
- कोरोना की रिपोर्ट
ये रहेगा शुल्क
- डी टाइप बड़े आॅक्सीजन सिलेंडर के लिये 600 रुपये
- बी टाइप छोटे सिलेंडर के लिये 250 रुपये
आनंद अस्पताल में आॅक्सीजन खत्म, मचा हाहाकार
आनंद अस्पताल में एक बार फिर से शनिवार शाम को अचानक आॅक्सीजन खत्म हो गई। आॅक्सीजन के खत्म होते ही अस्पताल में ही हड़कंप मच गया और वहां भर्ती 100 से ज्यादा मरीजों की सांसे फूलने लगीं। हालांकि कुछ लोग अपने मरीजों के लिए खुद ही आॅक्सीजन सिलेंडर के इंतजाम करने में जुट गए। लेकिन अस्पताल प्रबंधन व स्वास्थ्य विभाग ने समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया।
अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल मेडिकल कॉलेज और संतोष अस्पताल से आॅक्सीजन मंगवाकर व्यवस्था की, तब मरीजों और तीमारदारों को राहत मिली। आनंद अस्पताल में आॅक्सीजन खत्म होते ही मेडिकल कॉलेज से 10, संतोष अस्पताल से चार, एंबुलेंस वाहनों से दो आॅक्सीजन सिलेंडर मंगाएं गए।
इस बीच करीब 45 मिनट तक हड़कंप मचा रहा। आनंद अस्पताल के मैनेजर मुनीष पंडित ने बताया कि अस्पताल की तरफ से 125 सिलेंडर भरवाने के लिए दिए गए थे, लेकिन 10 सिलेंडर ही आ पाए। इस वजह से दिक्कत हुई। मगर समय रहते व्यवस्था बना ली गई।

