- आरटीआई के तहत मांगी गयी सूचना न देने पर नगरायुक्त ने थमाए नोटिस
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सीएम के आईजीआरएस पोर्टल पर की गई एक शिकायत के संबंध में मांगे के जवाब को लेकर नगर निगम के अफसरों ने शासन को झूठी सूचना भेज दी। इसको लेकर जब शिकायर्ता ने आपत्ति की तो अफसरों में हड़कंप मच गया।
करीब एक माह बाद जिस कर्मचारी के संबंध में आईजीआरएस पोर्टल पर सूचना मांगी गयी थी उसकी त्रुटि को दूर कर सही सूचना भेजी जा सकी। सीएम के शिकायत पोर्टल पर निगम अफसरों की इस कारगुजारी के सामने आने पर वरिष्ठ अफसर भी हैरान हैं। माना जा रहा है कि इस संबंध में शासन स्तर से कोई कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है।
ये है पूरा मामला
आईजीआरएस पर की गयी शिकायत संख्या 1513200059287 के संबंध में नगरायुक्त द्वारा 26 नवंबर 2020 को जिलाधिकारी के माध्यम से सीएम पोर्टल पर मांगी गई जानकारी का जवाब भेजा गया। इसमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 107 एवं धारा 119 के अंतर्गत तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति, स्थानांतरण एसवं कार्य आवंटन/विभाजन का अधिकार नगर आयुक्त में निहित है।
जिसके अंतर्गत प्रदीप जोशी लिपिक का स्थानांतरण नगर आयुक्त के आदेश संख्या 976/पीएस-न.आ. 2020 द्वारा 2.9.2020 द्वारा नगर निगम के निर्माण विभाग से स्वास्थ्य विभाग में मुख्य लिपिक के पद पर किया गया है।
झूठी थी दी गयी जानकारी
आरोप है कि नगरायुक्त की मार्फत निगम अफसरों से जिलाधिकारी को जो सूचना भेजी थी वह झूठी थी। सीएम के आईजीआरएस पोर्टल पर जिस प्रदीप जोशी नाम के कर्मचारी के संबंध में जानकारी मांगी गयी थी उनका हस्तातंरण स्वास्थ्य विभाग में किया ही नहीं गया था। शिकायतकर्ता बीके गुप्ता ने जब इसका खुलासा किया तो अफसरों में हड़कंप मचा गया।
गलती मानने में लगा एक माह
मामले में कार्मिक विभाग की कारगुजारी जब सामने आयी तो आनन-फानन में 12 दिसंबर 2020 को नगरायुक्त की ओर से जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में इस चूक में सुधार किया गया। साथ ही बताया गया कि प्रदीप जोशी लिपिक निर्माण विभाग में तैनात किए गए हैं।
नियुक्ति सवालों के घेरे में
प्रदीप जोशी की नियुक्ति भी सवालों के घेरे में है। बकौल शिकायतकर्ता चुंगी अनुचर पूर्ण चंद्र जोशी के निधन के बाद उनके पुत्र प्रदीप जोशी को चतुर्थ श्रेणी कर्मी के तौर पर नियुक्ति मिली थी, लेकिन घालमेल कर इन्होंने कनिष्ठ लिपिक के पद पर नियुक्ति करा ली।
आरोप है कि इस प्रमोशन के लिए न तो कोई समिति ही गठित की गयी न ही शासन से किसी भी प्रकार के आदेश लेने आदि की प्रक्रिया अपनायी गयी। जबकि इनसे कई वरिष्ठक्रम के कर्मचारी कतार में थे। सीएम पोर्टल पर इसके संबंध में कार्रवाई का आग्रह किया गया है।
जब निगम प्रशासन की ओर से शासन को इस प्रकार की भ्रामक सूचना दी जाएगी तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रकरण में किस प्रकार कार्रवाई संभव है, लेकिन अब कार्मिक विभाग के कर्ताधर्ताओं की कारगुजारी से पर्दा उठ जाने के बाद माना जा रहा है कि शासन स्तर से मामले में कार्रवाई की जा सकती है।
नगरायुक्त ने थमाया नोटिस
आरटीआई के तहत मांगी गयी जानकारी न देने पर नगरायुक्त ने निगम के कई अनुभागों को नोटिस थमा दिया है। उनसे कारण बताने को कहा गया है। ऐसे चार आरटीआई कार्यकर्ता हैं जिनके सवालों के उत्तर नहीं दिए गए हैं। इस संबंध में शासन को भी शिकायत भेजी गयी है।

