रामपुर गांव के आधुनिकतावादी ‘फरेब लाल’ ने जब इस बार प्रधानी का चुनाव लड़ा, तो उन्होंने गांव की परंपराओं को ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (एआई) के तड़के के साथ परोस दिया। उनका मुख्य चुनावी मुद्दा था—’पंचांग का डिजिटलाइजेशन और प्रिडिक्टिव कर्मकांड’। फरेब लाल का तर्क था कि अब तक गांव के लोग पुराने मोटे पंचांगों के चक्कर में अपनी किस्मत खराब कर रहे थे, जबकि असली भविष्य तो ‘एल्गोरिदम’ में छिपा है। उन्होंने घोषणा की कि जीतते ही वे हर घर में एक ‘एआई-भविष्यवक्ता’ यंत्र लगवाएंगे, जो सुबह ही बता देगा कि आज किस पड़ोसी से उधार मांगना है, किस गली में सांड से बचकर निकलना है, किस सड़क पर नहीं जाना है। गांव के लोग, जो अपनी कुंडली के दोषों से परेशान थे, अचानक इस ‘सिलिकॉन अध्यात्म’ के जाल में ऐसे फंसे कि उन्हें लगने लगा कि अब विधाता का सारा डेटा फरेब लाल के सर्वर पर लोड हो चुका है।
प्रचार के अंतिम सप्ताह में फरेब लाल ने गांव के पुराने कुएं के पास एक ‘पाप-पुण्य कैलकुलेटर’ लगाया, जो वास्तव में एक पुराना कबाड़ हो चुका एटीएम मशीन का ढांचा था। उन्होंने दावा किया कि जो भी व्यक्ति उन्हें वोट देने का संकल्प लेकर अपनी उंगली इस मशीन के सेंसर (जो असल में एक रबर का छल्ला था) पर रखेगा, उसके पिछले सात जन्मों का डेटा ‘रीसेट’ हो जाएगा और उसे एक नया ‘ई-मोक्ष कार्ड’ मिलेगा। विपक्षी उम्मीदवार ‘बुधई राम’ सरकारी स्कूलों और खाद की बात कर रहे थे, लेकिन जनता को तो उस एआई की चिंता थी जो उनके अगले जन्म को ‘अपग्रेड’ करने वाला था। फरेब लाल ने गांव के लड़कों को टैबलेट लेकर घर-घर भेजा, जो ग्रामीणों को उनके पूर्वजों की आवाज में (जो असल में वॉयस चेंजर का कमाल था) फरेब लाल को वोट देने की सलाह दिलवा रहे थे। जनता को लगा कि अब तो पितृ लोक ने भी डिजिटल क्रांति अपना ली है।
जिस दिन चुनाव का परिणाम आया और फरेब लाल ने ऐतिहासिक जीत हासिल की, पूरा गांव अपना ‘ई-मोक्ष कार्ड’ और भविष्य जानने के लिए उनके दरवाजे पर कतारबद्ध हो गया। फरेब लाल अपनी नई चमचमाती एसयूवी से उतरे और सबके हाथ में एक-एक ‘खाली सफेद कागज’ थमाते हुए बोले— ‘भाइयों, एआई ने बताया है कि आपका भविष्य अभी ‘लोड’ हो रहा है!’ जनता हक्की-बक्की रह गई, ‘हुजूर, यह तो कोरा कागज है, हमारा मोक्ष कहां है?’ फरेब लाल ने अपनी मूंछों पर ताव दिया और ठहाका मारकर बोले, ‘मूर्खों! कोरा कागज इसलिए है क्योंकि जिस जनता ने एक मशीन के चक्कर में अपनी अक्ल और वोट दोनों मुझे दे दिए, उसका भविष्य तो अब मैं खुद अपने पेन से लिखूंगा! असली एआई तो मैं हूं, यानी ‘आॅल-इन-वन’ जो तुम्हारा चंदा भी डकारेगा और विकास का डेटा भी ‘डिलीट’ करेगा।’ जनता सन्न खड़ी अपनी ही परछाई को उस कोरे कागज पर देख रही थी और फरेब लाल ‘स्मार्ट-घोटाले’ की नई फाइल सबमिट करने शहर रवाना हो गए।

