Friday, March 20, 2026
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खेती किसानी के बुनियादी ढांचे की मजबूती, आत्म निर्भर बनेंगे किसान

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक के प्रोफेसर डा. आरएस सेंगर ने बजट को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि बजट 2021-22 पेश करते समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे स्वीकार बनाने में कोई कसर नहीं की।

उन्होंने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और खेती किसानी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक लाख करोड़ का आवंटन किया है इसे लगता है कि आने वाले वर्षों में किसानों की आय बढ़ेगी साथ ही किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाई जा सकेंगे यदि इन योजनाओं पर अमल किया गया तो निश्चित रूप से आने वाले वर्षों में किसानों की आर्थिक स्थिति अच्छी हो सकेगी।

कृषि विकास को एक नई दिशा मिलेगी। वर्तमान आंदोलन एवं कृषि कानूनों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बजट के जरिए किसानों को एक बार फिर बड़ा संदेश दिया है और कहा है कि एमएसपी पर खरीद जारी रहेगी। किसी और इंफ्रा विकास पर खर्च से एग्री वैल्यू चैन को मजबूती देने की बड़ी मदद मिलेगी जिसका दूरगामी प्रणाम किसानों की खेती बाड़ी को लाभकारी बनाने पर पड़ेगा।

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इस आम बजट में किसानों की आमदनी को वर्ष 2022 तक बढ़ाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास किया गया है कृषि क्षेत्र विकास दर को रफ्तार देने के लिए किसी से उत्पादों पर विशेष बल देते हुए कई तरह के प्रोत्साहन की घोषणा भी की गई है।

कृषि की लागत में कटौती करने के साथ उपज को बेहतर कीमत दिलाने का भरोसा दिलाया गया है आयात होने वाले कृषि उत्पादों को रोकने के प्रस्ताव किए गए हैं ताकि घरेलू किसानों को अच्छी कीमतों पर अपने उत्पाद बेचकर लाभ मिल सके। बजट में मांग आधारित खेती को बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

उनकी आए इसी तरह विदेश से आयात होकर घरेलू बाजार को प्रभावित करने वाले अन्य कृषि उत्पादों मसूर काबुली चना मटर अरहर कपास सेब फूल सोयाबीन और पाम आयल सूरजमुखी तेल समेत अन्य खाद्य तेलों के अलावा फर्टिलाइजर और यूरिया पर उपकर एग्री सेसलगा दिया गया है।

साथ ही इस बात का भी भरोसा दिया गया है कि ना एमएसजी प्रभावित होगी और ना ही खरीद प्रणाली में कोई बदलाव किया जाएगा इसी प्रकार माइक्रो इरिगेशन से सिंचाई को बढ़ाने के लिए विशेष ध्यान दिया गया है। किसानों के साथ पशुपालकों डेयरी और मछली पकड़ने के क्षेत्र में लगे लोगों की रियायती दरों पर अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराने पर भी है।

इसलिए किसान क्रेडिट का लाभ पशुपालन डेयरी वालों और मछुआरों को भी दिया जा रहा है परंपरागत फसलों के साथ नगदी फसलों और खेती के उद्यमों पर सरकार का ज्यादा जोर है कृषि सुधारों के मार्फत इन क्षेत्रों के विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से उन्हीं क्षेत्रों पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है जिन अनाजों की मांग अधिक है निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि सरकार द्वारा चलाई गई इन योजनाओं पर यदि ठीक से अमल किया जाता है तो आने वाले वर्षों में किसानों की बेहतरी के लिए यह बजट काफी लाभकारी होगा।

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