- 6 सितंबर तक मेरिट में नाम आने वाले अभ्यर्थी ले सकेंगे प्रवेश
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में संचालित बी-फार्मा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए शैक्षिक सत्र 2023-24 की प्रथम वरीयता सूची (मेरिट लिस्ट) 4 यानि सोमवार को प्रकाशित की जाएगी। प्रथम वरीयता सूची के आधार पर विश्वविद्यालय परिसर के चरक स्कूल आॅफ फॉर्मेसी में 4 से 6 तक (तीन कार्य दिवस) में प्रवेश किए जाएंगे। विभाग द्वारा विश्वविद्यालय पोर्टल पर 6 सितंबर तक समस्त प्रवेशित अभ्यर्थियों को संपुष्ट (कंफर्म) सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है।
बता दें कि पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए समस्त अभ्यर्थी अपनी लॉगइन आईडी से पंजीकरण फॉर्म एवं आॅफर लेटर डाउनलोड करेंगे। पंजीकरण फॉर्म एवं आॅफर लेटर के शैक्षिक प्रमाण, सम्बंधी प्रमाण, मूल निवास, आधार आदि समस्त प्रमाण पत्रों की स्व प्रमाणित छाया प्रति संलग्न करते हुए मूल प्रमाण पत्रों के साथ विश्वविद्यालय परिसर के चरक स्कूल आॅफ फॉर्मेसी में प्रवेश के लिए सपंर्क करेंगे।
बता दें कि विश्वविद्यालय के चरक स्कूल आॅफ फामेर्सी विभाग में यह चार वर्षीय बी-फार्मा पाठ्यक्रम इसी वर्ष से शुरु हो रहा है। इसकी पात्रता के लिए अभ्यर्थी का पीसीबी या पीसीएम में 12वीं पास होना अनिवार्य है। सर छोटूराम इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी कॉलेज परिसर स्थित एक ब्लॉक में चरक स्कूल आॅफ फार्मेसी विभाग को बनाया गया है, जिसमें बी-फार्मा कोर्स शुरू किया गया है।
इसके लिए फामेर्सी काउंसिल आॅफ इंडिया ने 100 सीट पर प्रवेश की अनुमति दी है। नियमानुसार ईडब्ल्यूएस का 10 फीसदी आरक्षण होता है यानी विवि 110 सीटों पर प्रवेश कर सकेगा। 100 से ज्यादा जितने भी प्रवेश होंगे वह सिर्फ ईडब्ल्यएस अभ्यर्थी के होंगे। निदेशक चार वर्षीय बी-फार्मा पाठ्यक्रम में मेरिट लिस्ट के आधार पर प्रवेश होंगे।
नीट: फोटो में सुधार के लिए फिर से खुली करेक्शन विंडो
नीट एसएस परीक्षा के लिए करेक्शन विंडो एक बार फिर ओपन हो गई है। नेशनल बोर्ड आॅफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज, एनबीईएमएस ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) सुपर स्पेशलिटी एप्लीकेशन फॉर्म में हुई गलतियों को सुधार करने के लिए सुधार विंडो दोबारा खोली है। यह 5 सितंबर तक ओपन रहेगी। इस दौरान तक अभ्यार्थी अपने आवेदन पत्र में की गई भूल को सुधार कर सकते हैं।
बता दें कि पहले करेक्शन करने की लास्ट डेट 28 अगस्त, लेकिन कुछ अभ्यर्थियों ने फॉर्म में ठीक से फोटो अपलोड नहीं की है। इसके अलावा कुछ अभ्यार्थी ने सिग्नेचर भी तय फार्मेट में नहीं किए हैं, जिसके चलते उम्मीदवारों को दोबारा सुधार करने के लिए कहा गया है। एनबीई ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अंतिम मौका है। इसके बाद कोई करेक्शन मान्य नहीं होगा। सुधार करने के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा।
एनईबी की ओर से इस संबंध में जारी सूचना में कहा गया है कि अपलोड की जाने वाली फोटो तीन माह से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। उम्मीदवारों की तस्वीर हाई रिजॉल्यूशन में और 5-मेगापिक्सेल रिजॉल्यूशन से अधिक होनी चाहिए। इसकी चौड़ाई 35 मिमी और ऊंचाई 45 मिमी होनी चाहिए। इसके अलावा, सिग्नेचर काली या डार्क नीली स्याही वाले पेन से किया जाना चाहिए
और छवि 5-मेगापिक्सेल रिजॉल्यूशन से अधिक होनी चाहिए। इसके साथ ही नेशनल बोर्ड आॅफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज, एनबीईएमएस ने यह भी कहा है कि फोटो अपलोड करने से पहले उम्मीदवार एक बार फिर से फोटो अपलोड करने के निदेर्शों को ध्यान से पढ़ें और फिर पिक्चर अपलोड करें, क्योंकि इस बार अगर अभ्यर्थी सही तस्वीर नहीं अपलोड करते हैं तो उनका फॉर्म मान्य नहीं किया जाएगा।
विवि इस वर्ष भी नहीं शुरू कर पाएगा ओडीएल कोर्स
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय इस वर्ष ओडीएल (आॅनलाइन डिस्टेंसिंग कोर्स) शुरू करने की स्थिति में नहीं है। क्योंकि अभी तक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सीसीएसयू को ओडीएल शुरु करने की अनुमति प्रदान नहीं की है और न विवि ने अभी तक पाठ्यक्रम तैयार किया है। ऐसे हालात में विवि के सामने प्राइवेट कोर्स कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं है
बता दें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत विवि और उससे संबंधित कॉलेजों में परंपरागत (बीए, बीएससी, बीकॉम, एमए, एमकॉम व एमएससी आदि) के अलावा ज्यादा से ज्यादा रोजगारपरक पाठ्यक्रम चलाने हैं। एनईपी के तहत सेमेस्टर परीक्षाएं कराई जाती है। एनईपी की वजह से प्राइवेट कोर्स का संचालन नहीं हो सकता है क्योंकि सेमेस्टर की परीक्षाएं कराना अनिवार्य है। ऐसे में सीसीएसयू ने ओडीएल पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला लिया।
इसके लिए यूजीसी से अनुमति के लिए आवेदन किया हैं मगर कई माह गुजरने के बाद भी अभी तक अनुमति नहीं मिल सकी है। विवि भी ओडीएल का पाठ्यक्रम तैयार नहीं कर सका है। ऐसे में विवि फिलहाल ओडीएल शुरू करने की स्थिति में नहीं है। ओडीएल को लेकर विवि कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला का कहना है कि यूजीसी से काफी प्रयास के बावजूद अभी तक ओडीएल पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति नहीं मिली है। ओडीएल शुरू नहीं होने पर सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल है। इसलिए छात्र हित में जल्द ही निजी पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला लिया जाएगा।

