- मेडा अफसरों की चुप्पी पर सवाल या फिर मान ले कि हादसे का है इंतजार
- खड़ौली एनएच-58 पर ईदगाह के सामने खेत में सीमेंट, कंक्रीट के बेस बगैर बन रहा होटल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लोकसभा चुनाव में आचार संहिता के दौरान मेडा के अफसरों ने खड़ौली बाइपास पर ईदगाह के सामने प्राधिकरण के जोन सी-वन महज 55 दिन में होटल तैयार कराने का कारनामा कर डाला। हाथरस के हादसे में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने के बाद पूरे देश में सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ी हुई है। जिला प्रशासन ने तमाम ऐसे भवनों और आयोजनों की रिपोर्ट तलब कर ली है, जहां हादसे मुंह बाएं बैठे हैं। तमाम सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर तैयार किए जा रहे जिस पांच मंजिला होटल का यहां जिक्र किया जा रहा, तकनीकी जानकारों की मानें तो पांच मंजिला होटल बनाने वाले लोगों की जिंदगी का मौत से सौदा करने का काम कर रहे हैं। इसके लिए सबसे बड़े कसूरवार मेडा के वो लोग हैं, जो इस पर कार्रवाई को हाथ खोलने के बजाए हाथ बांधे हैं।
जिस तरह से इसको बनाया जा रहा है, वो बड़े हादसे का कारण तो बने ही सकता है, साथ ही जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार की बदनामी की वजह भी बन सकता है। ऐसे हादसे जब भी होते हैं मुसीबत उन अफसरों को उठानी पड़ती है जो उस वक्त मौजूद होते हैं। पूर्ववर्ती अफसरों की इस प्रकार की लापरवाही भरी कारगुजारी की कीमत घटना के वक्त मौजूद अफसरों को चुकानी पड़ती है। तकनीकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के भवनों में हादसे की आशंका बनी रहती है। ऐसे भवनों के निर्माण से पहले जो मजबूत बुनियाद तैयार की जानी चाहिए, उसकी अनदेखी कर दी गयी। खासतौर से जब निर्माण कृषि भूमि में कराया जा रहा हो, जहां की भूमि दलदली होती है। पहली बात तो यह कि कृषि भूमि में किसी भी निर्माण का मेडा तब तक मानचित्र पास नहीं कर सकता, जब तक कि भू-उपयोग परिवर्तित न करा लिया जाए।
यह काम तहसील से संभव है। जहां पांच मंजिला होटल बना है, उस जगह का भू-उपयोग परिवर्तित किया गया है या नहीं, स्पष्ट नहीं किया गया। इसके अलावा फायर एनओसी ली गयी है या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया। हैरत की बात यह है कि पांच मंजिला बिल्डिंग खड़ी करने के लिए सीमेंट, कंक्रीट का बेस तैयार करने के बजाए लो ग्रेड के आयरन पर स्ट्रक्चर तैयार करने के चलते ही सवाल पूछा जा रहा है कि किन लोगों की जान की कीमत पर इसकी अनुमति दी गयी है। या फिर यह मान लिया जाए कि मेडा अफसर अब इसी प्रकार के टाउन की प्लानिंग करेंगे, जिसमें रहना जोखिम भरा भी हो सकता है। हालांकि टाउन प्लानर विजय सिंह का कहना है कि पांच मंजिला होटल का मानचित्र स्वीकृत है। उनका यह भी तर्क है कि इस प्रकार के भवन अब बहुत ज्यादा चलन में हैं, लेकिन यहां बड़ा सवाल लोगों की सुरक्षा का है।

