Thursday, March 5, 2026
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Dhanteras 2025: सुख-समृद्धि के लिए इस विधि से करें धनतेरस की पूजा, जानें पूजन सामग्री और शूभ मुहूर्त

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम् वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। धनतेरस दीपावली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और यह दिन अत्यंत शुभ एवं मंगलकारी होता है। यह पर्व न केवल नई खरीदारी और धन की वृद्धि से जुड़ा है, बल्कि स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति की कामना के लिए विशेष पूजा-अर्चना का भी अवसर प्रदान करता है। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन विधि-विधान से की गई पूजा घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और दरिद्रता व नकारात्मकता को दूर करती है।

साल 2025 में धनतेरस का पर्व 18 अक्तूबर, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा का विशेष महत्व होता है। सही मुहूर्त में पूजा करने और आवश्यक पूजन सामग्री के साथ धार्मिक विधियों का पालन करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में खुशहाली आती है।

तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

तिथि: 18 अक्तूबर दिन शनिवार

प्रदोष काल: सायं 5:48 बजे से रात्रि 8:20 बजे तक

वृषभ काल: सायं 7:16 बजे से रात्रि 9:11 बजे तक

धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त: सायं 7:16 बजे से रात्रि 8:20 बजे तक

पूजा के लिए उत्तम समय: वृषभ काल में ही पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है

पूज्य देवी-देवता: भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव

लाभ: इस समय पूजा करने से धन, स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है

पूजा विधि

सबसे पहले घर और पूजा स्थान की अच्छे से सफाई करें। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और दीपक लगाएं, ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो।

घर के उत्तर-पूर्व कोने में एक चौकी रखें और उस पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। यही पूजा का मुख्य स्थान होगा।

एक तांबे या मिट्टी का कलश लें। उसमें गंगाजल और स्वच्छ पानी भरें, आम के पत्ते लगाएं और ऊपर एक नारियल रखें। यह शुभता और समृद्धि का प्रतीक होता है।

भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और गणेश जी की मूर्तियाँ या चित्र चौकी पर स्थापित करें।

पूजन में हल्दी, कुमकुम, चंदन, अक्षत (चावल), फूल, धूप, दीप, मिठाई, मेवे और दक्षिणा चढ़ाएं। श्रद्धा के साथ मंत्रों का उच्चारण करें।

पूजा के दौरान गाय के घी का एक बड़ा दीपक जलाएं। साथ ही 13 छोटे दीपक घर के अलग-अलग स्थानों पर जलाएं। यह दीर्घायु और समृद्धि का प्रतीक होता है।

खील, बताशे, मिठाई और मेवे का भोग लगाकर सभी देवताओं की आरती करें। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करें।

पूजा सामग्री लिस्ट

भगवान धन्वंतरि, लक्ष्मी माता और कुबेर जी की मूर्तियाँ या चित्र

गंगाजल और स्वच्छ पानी

हल्दी, कुमकुम, चंदन, और इत्र

ताजे फूल और फूलों की माला

कलावा (मौली) और जनेऊ

पूजा के लिए एक चौकी और उस पर बिछाने के लिए लाल या पीले रंग का कपड़ा

कलश, आम के पत्ते, और नारियल

भोग के लिए खील, बताशे, मिठाई और मेवे

अक्षत (चावल) और साबुत धनिया

13 मिट्टी के दीये, गाय का घी, कपूर, और अगरबत्ती

दक्षिणा और थोड़ी मात्रा में नमक

चांदी या सोने का सिक्का, या कोई नई धातु की वस्तु

एक नई झाड़ू

धनतेरस पर खरीदें ये चीजें

चांदी या सोने के सिक्के मां लक्ष्मी और कुबेर जी का प्रतीक माने जाते हैं।

खासकर पीतल, तांबे या स्टील के बर्तन ये समृद्धि का प्रतीक हैं।

नई झाड़ू को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और दरिद्रता दूर करने वाला।

मोबाइल, लैपटॉप या घरेलू उपकरण आदि खरीदना शुभ होता है।

वाहन या कोई नई धातु की वस्तु खरीदना नई शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है।

धनतेरस पर न खरीदें ये चीजें

कांच के सामान नाजुक होते हैं और टूटने की संभावना से अशुभ माने जाते हैं।

एल्यूमिनियम और लोहे के बर्तन को अशुद्ध धातु माना गया है।

काले कपड़े, जूते आदि; ये नकारात्मकता से जुड़ी मानी जाती हैं।

छुरी, कैंची या चाकू जैसी नुकीली वस्तुएं क्लेश और कटुता का प्रतीक मानी जाती हैं।

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