Saturday, March 14, 2026
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पीएम आवास योजना में मिलीभगत से किया जा रहा खेल

  • जिनके थे पक्के मकान, उनको दिया गरीब मकान का पैसा
  • नगर निगम की बाहरी सीमा में भी दिला दिया किस्त का पैसा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सरकार योजना बनाती है कि हर गरीब, बेसहारा के सिर पर छत हो, लेकिन जिनके पास गरीबों के सिर छुपाने की छत बनाने की जिम्मेदारी है, उन्हें मतलब अपने कमीशन से होता है। फिर चाहे वह पैसा लेने वाला अमीर हो तथा उसके सिर पर भले ही पक्का मकान हो, लेकिन यह घोटालेबाज अफसर उसको भी गरीब मकान का पैसा दिलाकर उसकी बंदरबांट कर लेंगे। पीएम आवास योजना में फिर से खेल को अंजाम दिया जा रहा है। घोटाला करने में माहिर अधिकारियों ने कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर नगर निगम की सीमा से बाहर भी आवंटी दिखाकर उनके नाम पर मोटी रकम डकार ली। अब इस मामले की लीपापोती के प्रयास किये जा रहे हैं।

जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) में रिश्वत के मामले सामने आते रहते हैं। लोगों का कहना है कि डूडा में ऐसे कई लोग हैं जो वसूली में लिप्त हैं। दावा है कि डूडा के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना में घर-घर जाकर वसूली हो रही है। जब तक पैसे नहीं मिलते हैं तो किस्त नहीं आती। या फिर किस्त आते ही वसूली के लिए लोग पहुंच जाते हैं। गत वर्ष जुलाई में डूडा कार्यालय में 20 हजार रुपये का लेनदेन का वीडियो वायरल होने के बाद जांच में पुष्टि हुई। डूडा कार्यालय में बैठकर आॅपरेटर खुलेआम पैसा लेते पाया गया। पैसे के लेन-देन के साथ लोगों ने वीडियो बनाया। वीडियो वायरल हुआ। लोगों का कहना है कि प्रशासन यदि गोपनीय जांच कराए तो पैसे के लेन-देन के कई मामले सामने आ सकते हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना में आवेदन के साथ वसूली के लिए एजेंट सक्रिय हो जाते हैं। आवेदन होते ही वसूली के लिए आवेदकों के आसपास चक्कर काटना शुरू कर देते हैं। घर-घर जाकर लोगों से वसूली होने लगती है। लोग यह भी कहते हैं कि जब तक पैसा नहीं, तब तक किस्त जारी नहीं होती। कई बार तो बैंक खाते में पैसा पहुंचा नहीं कि मिठाई के नाम पर पैसा मांगना शुरू कर देते हैं। इसका कारण यह है डूडा की कार्रवाई पारदर्शी नहीं है। आवेदन हो गया तो पता ही नहीं चलता कि कब स्वीकृति होगी। कब किस्त जारी होगी।

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तीन किस्त में पैसा, तीनों में होती है वसूली

प्रधानमंत्री आवास योजना में तीन किस्त में ढाई लाख रुपये दिये जाते हैं। तीनों किस्त में वसूली होती है। पहली और तीसरी किस्त 50-50 हजार की है। दूसरी किस्त डेढ़ लाख रुपये की है। लाभार्थी के खाते में पैसा आते ही वसूली के लिए लोग पहुंचने लगते हैं।

विजिलेंस जांच में फंसे डूडा के अधिकारी और कर्मचारी

शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जाहिद अंसारी ने बताया कि आवेदन आमंत्रित करने के दौरान डूडा में पूर्व से सक्रिय दलालों के माध्यम से ऐसे लोगों ने भी आवेदन कर दिया, जिनके पास अपना कोई प्लाट या कच्चा मकान नहीं था। यही नहीं, कुछ ऐसे लोग भी रहे जिनके पास पहले से पक्का मकान था, लेकिन सेटिंग के खेल में सबका चयन हो गया। जिनके पास भूखंड नहीं था, उनके साथ मिलकर बड़े लोगों ने खेल खेला। इन लोगों ने अपने 100 मीटर के भूखंड को तीन लोगों के नाम अलग-अलग हिस्सों में नोटरी पर बेचा हुआ दिखा दिया और डूडा ने इसे स्वीकार भी कर लिया। इसी नोटरी पर तैयार प्लाट के बिक्री पत्र के आधार पर एक ही व्यक्ति के प्लाट पर आवास की तीन इकाईयां खड़ी कर दी गयी।

जिन लोगों के पास पहले से पक्का मकान था, उनका दोमंजिला मकान तैयार कर दिया गया। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जाहिद अंसारी का कहना है कि हमने एक दर्जन से ज्यादा मामले शासन को शिकायत करते भेजे। जिनपर जांच अधिकारी अभय पांडेय को मेरठ भेजा गया। हमने जांच अधिकारी को तमाम फर्जीवाड़े का मौका मुआयना भी करा दिया है। अब इस मामले में डूडा के अधिकारियों व दोषी कर्मचारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।

केस-1

मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश विहार कॉलोनी में एक कोठी प्रधानमंत्री आवास निर्माण योजना से बनाई गई। कोठी पहले से ही बनी थी, लेकिन फोटो किसी और प्लाट पर खींचकर लाभ लिया गया। इस कोठी के नाम पर ढाई लाख का लाभ ले लिया गया।

केस-2

फतेहउल्लापुर क्षेत्र में भी भ्रष्टाचार का कारनामा अंजाम दिया गया। नदीम नाम के शख्स को डूडा के अफसरों ने पीएम आवास निर्माण योजना का लाभ दे दिया, लेकिन इसी प्लॉट पर अफसाना नाम की एक महिला को भी पैसे दिए गए। नदीम का मकान ज्यादातर बन गया, लेकिन 50 हजार की किस्त आनी बाकी है।

किसी को भी पैसा देने की जरूरत नहीं है। कोई पैसा मांगता है या परेशान करता है तो सीधे मुझसे मिलें। शिकायत करें। गोपनीय तौर से बताएं। कार्रवाई होगी। -हर्ष अरविन्द, परियोजना अधिकारी, डूडा, मेरठ।

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