Saturday, March 14, 2026
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करोड़ों की लागत से बने कूड़ाघर, हो रहे बदहाल

  • कूड़ा निस्तारण की समस्या का नहीं कोई समाधान
  • स्वच्छ भारत मिशन का सपना ग्रामीण क्षेत्र में तोड़ रहा दम
  • डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को नहीं हैं पैसा और कर्मचारी

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: स्वच्छ भारत मिशन का सपना ग्रामीण क्षेत्र तक पहुंचने से पहले की दम तोड़ रहा है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। कूड़ा निस्तारण के लिए करोड़ों रुपये खर्च करके बनाए गए प्लांट सालों से खुद के स्वच्छ भारत मिशन में शामिल होने का इंतजार कर रहे हैं। ग्राम पंचायतों ने शासन से आया पैसे प्लांट बनाने के नाम पर खर्च कर दिया गया।

मगर उनको उपयोग में लाने के लिए पैसा या कोई योजना ही नहीं है। मैनेजमेंट के अभाव में यह ठोस एवं तरल अवशिष्ट प्रबंधन प्लांट धूल फांक रहे हैं। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के ग्राम पंचायतों के पास स्टाफ को देने के लिए पैसा ही नहीं है। कूड़ा कलेक्शन के लिए तय की गई टैक्स योजना भी ब्लॉक प्रशासन परवान नहीं चढ़ा पा रहा है। इस कारण करोड़ों खर्च के बाद भी गांवों में गंदगी की समस्या जस की तस बनी हुई है।

स्वच्छ भारत मिशन के सपने को पूरा करने के लिए सरकार शहार से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक मोटा पैसा खर्च कर रही है। जहां शहरों में कूड़ा निस्तारण के लिए बड़े प्लांट लगाए जा रहे हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र में भी कूड़ा निस्तारण के लिए पैसा जारी हो रहा है। ग्राम पंचायतों के अंतर्गत सरकार द्वारा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट बनवाए गए हैं। जिसके तहत घर-घर से कूड़ा उठवाकर उसका निस्तारण किया जा सके। पिछले करीब दो साल में प्रत्येक ब्लाक में इस तरह प्लांट तैयार कराए गए। सरधना ब्लॉक की बात करें तो यहां दर्जनभर ग्राम पंचायत चिह्नित की गई थी।

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प्रत्येक प्लांट को तैयार करने की अनुमानित लागत करीब 10 लाख रुपये है। प्लांट बनकर तो तैयार हो गए हैं। मगर उसमें काम करने के लिए स्टाफ नहीं है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए लगाए जाने वाले कर्मचारियों को वेतन देने को ग्राम पंचायतों पर पैसा नहीं है। नियमानुसार ग्राम पंचायतों को इसके लिए प्रत्येक घर पर टैक्स लगाना था। मगर टैक्स का प्लान आज तक परवान नहीं चढ़ सका। गांव में कोई टैक्स देने को तैयार नहीं है। जिसके चलते करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी प्लांट आज तक संचालित नहीं हो सके।

कर्मचारी लगाना सबसे बड़ी चुनौती

योजना में सबसे बड़ी समस्या यही आ रही है कि ग्राम पंचायत को कूड़ा कलेक्शन के लिए स्वयं कर्मचारी लगाने होंगे। उनको वेतन देने के लिए घर पर टैक्स लागू किया जाना है। मगर गांवों में टैक्स देने के लिए कोई राजी नहीं है।

इन गांवों में बनाए गए प्लांट

सरधना ब्लॉक में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट बनाने के लिए दस ग्राम पंचायत चिंहित की गई थीं। इनमें ग्राम पंचायत सरधना देहात, सलावा, रार्धना, कैली, कपसाड़ व कुशावली, खेड़ा, दादरी, रुहासा व सकौती शामिल हैं। लगभग सभी गांवों में प्लांट बनकर तैयार खड़े हैं। मगर संचालित नहीं होने के कारण यह उपयोग हुए बिना खुद कूड़ा हो रहे हैं।

रोजगार के अवसर भी खुलेंगे

कूड़ा निस्तारण लांट संचालित होने से ग्रामीण क्षेत्र में गंदगी की समस्या तो दूरी होगी। साथ ही बड़ी संख्या में लोगों को काम मिल सकेगा। प्लांट में प्लास्टिक, पॉलिथीन, गोबर, सब्जी-फल के अवशेष आदि को अलग करके निस्तारण किया जाएगा। गीले कूड़े से खाद बनाई जाएगी। वहीं, पॉलीथिन व बोतल आदि को भी अलग करके बेचा जाएगा। जिससे ग्राम पंचायत की आय बढ़ेगी। प्लांट से बनने वाले पैसे से ही स्वयं सहायता समूह को प्रतिशत के रूप में मुनाफा दिया जाएगा।

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