Friday, March 20, 2026
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मेरठ: सरकारी जमीनों पर कब्जा दे रही कैंट बोर्ड सरकार से निडर, कब होगी कार्रवाई ?

  • आखिर अवैध निर्माण पर चुप्पी क्यों ?
  • रातों-रात रविंद्रपुरी खटीक मोहल्ला में अवैध निर्माण, सरकारी जमीन पर किया गया कब्जा
  • पूरे मामले में सेनिटेशन स्टाफ, बोर्ड सदस्य और सदस्य पति की भूमिका संदिग्ध

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: छावनी के वार्ड चार रविंद्रपुरी खटीक मोहल्ला में रातों रात पांच दुकानों कर लिया गया। इस मामले को लेकर कैंट बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियर व सीईओ कैंट की चुप्पी पर हैरानी जतायी जा रही है। सबसे बड़ा सवाल तो ये पूछा जा रहा है कि स्टाफ के जो लोग खुद को पाक साफ साबित करने की कोशिश करते हैं, उन्होंने भी अफसरों को क्यों गुमराह किया। इस मामले में कैंट बोर्ड के एक सदस्य तथा एक सदस्य पति की भी भूमिका संदिग्ध है।

ये है पूरा मामला

वार्ड चार के रविंद्रपुरी खटीक मोहल्ला इलाके में सरकारी टॉयलेट के समीप सरकारी जमीन पर एक शख्स ने कब्जा किया। सुनने में आया है कि बाद में सोतीगंज के एक कबाड़ी जिसका नाम मुरसलीम है, उसको करीब 50 लाख कीमत में ये सरकारी जगह बेच दी गयी।

सरकारी जगह बेचे जाने में सदस्य व सदस्य पति की भूमिका की चर्चा आम है। उसके बाद जब कब्जायी गयी सरकारी जगह पर रातोंरात पांच दुकानों का अवैध निर्माण लिया गया तो इसमें कैंट बोर्ड का स्टाफ भी कूद पड़ा।

सूचना के बजाय हो गए शामिल

रातोंरात पांच दुकानों के निर्माण की इलाके के सैनिटेशन इंस्पेक्टर व सुपरवाइजर को सफाई स्टाफ ने तो सूचना दे दी थी, लेकिन इस सूचना पर आगे कार्रवाई के बजाय इंस्पेक्टर व सुपरवाइजर उस पर कुंडली मारकर बैठ गए। इसके बाद मुंह बंद रखने के नाम पर शुरू हुआ सौदेबाजी का खेल और अपुष्ट सूत्रों की माने तो एक भारी भरकम रकम कार्रवाई के बजाए मामले को दबाने के लिए तय की गयी।

इन पर उठ रही अंगुली

इस पूरे खेल में कैंट बोर्ड के एक सभासद तथा एक सभासद पति पर अंगुली उठ रही है। टॉयलेट के समीप वाली खाली जगह में कब्जे से लेकर कब्जा करायी गयी जमीन को सोतीगंज के कबाड़ी को बेचने तथा बेची गयी जमीन पर रातोंरात दुकानें बनाने में कैंट बोर्ड के स्टाफ को साधन में दोनों की भूमिका प्रमुख बताया जाती है।

इंजीनियरिंग सेक्शन क्यों चुप

पांच दुकानों के अवैध निर्माण के मामले में मोटे लेन-देन के इस खेल की जानकारी कैंट बोर्ड के पूरे स्टाफ को है, इसके बावजूद इंजीनियरिंग सेक्शन की चुप्पी जरूर हैरान करने वाली है। जबकि इस प्रकार के अवैध निर्माणों को बगैर किसी देरी के जमींदोज करने की परम्परा अब तक इंजीनियरिंग सेक्शन की रही है, लेकिन इस बार चुप्पी पर हैरानी जतायी जा रही है।

प्रवक्ता का नो रिप्लाई

इस मामले में जब कैंट बोर्ड प्रशासन के प्रवक्ता से बात की गयी तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। ये कोई पहला मामला नहीं है। जब कैंट बोर्ड प्रवक्ता इस प्रकार के मामलों में बजाय सीईओ का पक्ष रखने के मीडिया से कन्नी काट रहे हैं।

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