Friday, February 20, 2026
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कहने को ग्रीन बेल्ट, लेकिन बन गई बड़ी-बड़ी इमारतें

  • मास्टर प्लान: 2031 ग्रीन बेल्ट में बंधक रहेगी किसानों की जमीन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: किसानों की जमीन अभी और बंधक रहने वाली हैं। एनएच-58 पर हाइवे के सेंटर से 100 मीटर तक ग्रीन बेल्ट 2031 में भी रहने वाली हैं। यही नहीं, जो भी हाइवे है, उन सभी पर ग्रीन बेल्ट फाइनल कर दी गई हैं। सिर्फ उन स्थानों को ग्रीन बेल्ट से मुक्त रखा गया है, जहां पर एमडीए की आवासीय योजना हैं। एमडीए की आवासीय योजना को छोड़कर ही ग्रीन बेल्ट फिर से प्लानिंग कर दी गई हैं, जिससे किसानों को बड़ा झटका लगने वाला हैं।

किसान लंबे समय से ग्रीन बेल्ट को खत्म करने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन एमडीए है कि मानता ही नहीं। किसान की जमीन पर ग्रीन बेल्ट और एमडीए की आवासीय योजना आते ही ग्रीन बेल्ट स्वत: ही खत्म हो जाती हैं। किसान ही ग्रीन बेल्ट का सामना करेंगे।

एनएच-58 पर यूपी की सबसे बड़ी ग्रीन बेल्ट दी गई है, जो 100 मीटर की हैं। यह हाइवे के बीच से है। वैसे भी सड़क के दोनों तरफ है। 2031 महायोजना में किसानों को उम्मीद थी कि हाइवे की ग्रीन बेल्ट को खत्म कर दिया जाएगा, लेकिन एमडीए ने ऐसा नहीं किया। किसानों को फिर से झटका दे दिया हैं। इसको लेकर किसान आक्रोशित हैं। हाइवे पर ग्रीन बेल्ट छोड़कर ही निर्माण किया जा सकता हैं।

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ग्रीन बेल्ट में यदि किसी ने निर्माण कर दिया है तो उसे गिराया जा सकता हैं। इसमें एमडीए को पूर्ण अधिकार हैं। फिर ऐसे में एनजीटी भी ग्रीन बेल्ट को लेकर सख्त हैं। बागपत रोड, एनएच-58 पर 50 से अधिक निर्माण गिराये जा चुके हैं। इसकी रिपोर्ट भी एनजीटी ने तब मांगी थी जब एनजीटी में याचिका दायर कर दी गई थी। अब फिर महायोजना 2031 में भी किसानों की जमीन बंधक रहने वाली हैं। जमीन किसान की है, लेकिन अधिकार एमडीए को हैं। इस पर किसी तरह का निर्माण एमडीए से बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता हैं।

सरधना रोड: मेरठ-करनाल हाइवे पर भी रहेगी ग्रीन बेल्ट

उम्मीद की जा रही थी कि सरधना बाइपास से दांयी साइड में ग्रीन बेल्ट को मास्टर प्लान 2031 में खत्म किया जा सकता हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। करनाल हाइवे पर ग्रीन बेल्ट सिर्फ एक साइड में लगाई हैं, क्योंकि एक साइड में एमडीए की सैनिक विहार योजना हैं। इसलिए बायी साइड को ग्रीन बेल्ट से मुक्त रखा गया है।

क्योंकि ये जमीन किसानों को नहीं थी, इसलिए यहां पर ग्रीन बेल्ट नहीं लगाई गयी है। ग्रीन बेल्ट सिर्फ वहीं पर लगाई गयी है, जहां पर एमडीए की कॉलोनी नहीं हैं। इस तरह से ग्रीन बेल्ट सरधना रोड पर 60 मीटर लगा दी गई हैं। 60 मीटर बेल्ट दांयी तरफ छोड़ी गई हैं।

इसको छोड़कर ही मकान या फिर व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा सकता हैं, लेकिन यहां तो एमडीए के इंजीनियरों ने ग्रीन बेल्ट में ही निर्माण करा दिये हैं। सिर्फ कागजों में ही ग्रीन बेल्ट चल रही हैं। मोके पर ग्रीन बेल्ट का कोई पालन नहीं हो रहा हैं। हर रोज निर्माण चल रहे हैं, लेकिन इससे एमडीए इंजीनियरों को कोई लेना-देना नहीं है। ग्रीन बेल्ट में दो-दो या फिर तीन-तीन मंजिल खड़ी कर दी गई हैं।

रैपिड रेल रूट को मुक्त रखा ग्रीन बेल्ट से

मोदीपुरम से लेकर परतापुर तक रैपिड रेल का रूट हैं, वहां पर ग्रीन बेल्ट को मुक्त रखा गया है। इसमें परिवर्तन किया गया हैं। हालांकि पहले मोदीपुरम में भी ग्रीन बेल्ट लागू थी। अब खत्म कर दी गई हैं। नया नियम लागू किया गया हैं।

फ्रेट कॉरिडोर: 220 किमी सिंगल लाइन

फ्रेट कॉरिडोर खुर्जा से लेकर सहारनपुर तक सिंगल लाइन बनेगा। इसका काम भी तेजी से चल रहा हैं। यह करीब 220 किलोमीटर की दूरी हैं। फ्रेट कॉरिडोर यहां सिंगल लाइन क्यों बनाया जा रहा हैं? यह बड़ा सवाल है। कहा जा रहा है कि किसानों ने जमीन अधिग्रहण करने के लिए नहीं दी। कम जमीन मिली है, ऐसे में कॉरिडोर सिंगल लाइन का बनाया जा रहा हैं। हालांकि जो पुल बनाये जा रहे है, वो डबल ट्रेक के बनाये जा रहे हैं।

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क्योंकि भविष्य में डाबल लाइन की प्लानिंग पहले से ही करके चली जा रही हैं। इस भीड़ भरे दौर में कम से कम फोर लाइन की प्लानिंग के साथ जमीन का अधिग्रहण किया जाना चाहिए था, मगर ऐसा नहीं हुआ। किसानों ने जमीन अधिग्रहण करने के लिए क्यों नहीं दी? इसको लेकर भी जिला स्तर के अधिकारियों को किसानों से बातचीत करनी चाहिए थी। क्योंकि बार-बार कॉरिडोर बनने वाले नहीं हैं।

दरअसल, खुर्जा तक फ्रेट कॉरिडोर डबल लाइन में होगा। इसके लिए पर्याप्त जमीन भी रेल विभाग के पास मौजूद हैं, लेकिन यहां पर आते ही परेशानी खडी हो गई हैं, वैसे ऐसा विरोध भी किसानों ने नहीं किया, लेकिन फिर भी सिंगल रेलवे टेÑक बिछाया जा रहा हैं। कुछ क्षेत्र में ट्रेक तैयारी की तरफ तेजी से बढ़ रहा हैं। हालांकि पहले मेरठ में किसी तरह का स्टेशन का प्रावधान नहीं था, लेकिन वर्तमान में कैंट स्टेशन के नाम से स्टेशन भी बनेगा।

यह स्टेशन दौराला के आसपास बनाने का प्रस्ताव हैं। वैसे कहा यह भी जा रहा है कि मेरठ-करनाल हाइवे के समीप यदि किसानों से जमीन मिलती है तो इस रोड पर भी कैंट स्टेशन फ्रेट कॉरिडोर का बनाया जा सकता हैं। सांसद राजेन्द्र अग्रवाल भी कह चुके हैं कि डबल रेल लाइन बननी चाहिए। क्योंकि एक बारगी जो काम हो जाता है तो फिर किसी तरह की दिक्कत नहीं होती। अब डबल हो गया तो हो गया, फिर भी दिक्कत होगी ही। इस बात को जनप्रतिनिधि भी जानते हैं।

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