Friday, May 31, 2024
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हैट्रिक लगाएगा कमल या बदलाव पर होगा अमल

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  • सरधना विधानसभा सीट पर आज तक खाता नहीं खोल पाई सपा
  • लगातार दो बार जीत दर्ज करा चुके भाजपा के विधायक सोम
  • तीसरी बार विकास के बल पर फिर जनता के दरबार में

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: यूपी में विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही चुनावी समीकरण पर भी माथा पच्ची शुरू हो गई है। मेरठ की सरधना विधानसभा सीट सूबे की सबसे हॉट सीट में एक मानी जाती है। कहने को यह सीट कई पहलुओं पर खास है, मगर उनमें एक बिंदू पर नजर डालें तो इस सीट पर सपा आज तक खाता नहीं खोल पाई है। सरधना विधानसभा सीट पर जातिगत तौर पर जाट व ठाकुर का दबदबा रहा है।

इस बार भी भाजपा ने दो बार विधायक का ताज पहन चुके ठाकुर संगीत सिंह सोम पर दाव खेला है। वहीं दूसरी ओर इस सीट पर गठबंधन प्रत्याशी के रूप में अतुल प्रधान फिर से मैदान में उतरे हैं। इसके अलावा बसपा प्रत्याशी संजीव धामा को भी गेम चेंजर के रूप में देखा जा रहा है।

यूपी में सरधना विधानसभा सीट का अलग ही इतिहास रहा है। यह सीट पूरे सूबे में सबसे हॉट सीटों में से एक मानी जाती है। इस सीट पर लगभग सभी पार्टी के प्रत्याशी जीत का जायका चख चुके हैं, मगर सपा को आज तक यह सौभाग्य प्राप्त नहीं हो सका है। तीन बार विधायक रहे प्रो. रविंद्र पुंडीर ने भी जब सपा से चौथी बार चुनाव लड़ा था तो यहां की जनता ने उन्हें नकार दिया था।

एक तरह से सरधना विधानसभा जमीं पर आज तक सपा का बीज नहीं फूट सका है। सपा से अतुल प्रधान 10 सालों से यहां किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन जनता उन्हें भी लगातार दो बार नकार चुकी है। कारण कुछ भी रहा हो, लेकिन इस विधानसभा की राजनीतिक सड़क पर सपा की साईकिल फिसलती रही है। वहीं, दूसरी ओर पिछले दो बार से यहां भाजपा के प्रत्याशी विधायक संगीत सिंह सोम जनता की पसंद रहे हैं।

अब विधानसभा चुनाव फिर से आ चुके हैं। ऐसे में चुनावी माथा पच्ची फिर से शुरू हो गई है। जहां एक ओर पार्टी का विश्वास जीत चुके तीसरी बार प्रत्याशी बने विधायक संगीत सोम हैट्रिक लगाकर इतिहास रचने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, सपा भी इस सीट पर जीत का जायका चखने को बेताब है। सपा-रालोद गठबंधन ने भी अतुल प्रधान पर फिर से दांव खेलने का मन बनाया है। वर्तमान की बात करें तो चुनावी मैदान में विधायक संगीत सोम और अतुल प्रधान दोनों ही मजबूत नजर आ रहे हैं।

वहीं बसपा के प्रत्याशी संजीव धामा भी गेम चेंजर के रूप में देखे जा रहे हैं। इस सीट के इतिहास पर नजर डालें तो लोकदल से अब्दुल वहीद कुरैशी, भाजपा से रविंद्र पुंडीर, बसपा से चंद्रवीर सिंह और वर्तमान में भाजपा से संगीत सोम विधायक रहे हैं। अब देखना यह है कि इस चुनाव में जनता कमल खिलाने की हैट्रिक लगाती है या फिर बदलाव के रास्ते चलती है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

सरधना विधानसभा सीट पर किसी एक दल का दबदबा नहीं रहा है। इस सीट पर बसपा और भाजपा के उम्मीदवार जीतते रहे हैं। इतिहास पर नजर डालें तो 2002 में भाजपा प्रत्याशी रविंद्र पुंडीर ने बसपा प्रत्याशी हरपाल सैनी को हराया था। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर चंद्रवीर सिंह ने रालोद प्रत्याशी तबस्सुम बेगम को हराया था। भाजपा प्रत्याशी विजयपाल सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे। 2012 में भाजपा प्रत्याशी संगीत सोम ने रालोद प्रत्याशी हाजी याकूब को कराया था। वर्ष 2017 में भाजपा प्रत्याशी संगीत सोम ने सपा प्रत्याशी अतुल प्रधान को हराया था।

कांग्रेस के पत्ते खुलने बाकी

सरधना विधानसभा सीट पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। यहां से कांग्रेस की सीट पर सपना सोम, सैय्यद रिहानुद्दीन व जितेंद्र पांचाल की दावेदारी है। मगर इनमें सबसे मजबूत दावेदारी सपना सोम की मानी जा रही है। सपना सोम को पार्टी में पुरानी होने के साथ ही प्रियंका गांधी के महिला प्रत्याशी चुनने का लाभ मिल सकता है। यदि सपना सोम का टिकट होता है तो वह भी समीकरण बदलाव ला सकती हैं। इसके अलावा एआईएमआईएम के प्रत्याशी जीशान आलम भी मुस्लिम वोटों में सेंधमारी करेंगे।

सरधना विधानसभा की वोट पर नजर

सरधना विधानसभा की वोट की बात करें तो एक जनवरी 2022 तक के आंकड़े बताते हैं कि यहां कुल मतदाता की संख्या 3 लाख 57 हजार 36 है। जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1 लाख 93 हजार 875 है। जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 1 लाख 63 हजार 104 है। इसके अलावा थर्ड जेंडर की 57 वोट भी इसमें शामिल हैं।

बहुत हुए काम, कई की अभी जरूरत

सरधना विधानसभा क्षेत्र में वैसे तो बहुत विकास कार्य हुए हैं। मगर सरधना कस्बे की बात करें तो इस ऐतिहासिक क्षेत्र को कई बुनियादी सुविधाओं की अभी जरूरत है। सबसे पहले शिक्षा पर नजर डालें तो यहां बालक डिग्री कॉलेज की सख्त जरूरत है। इसके अलावा कस्बे को अन्य जिलों से जोड़ने के लिए रोडवेज बस अड्डे की मांग भी दशकों से उठती आई है। फायर स्टेशन भी सरधना को आज तक नसीब नहीं हो सका है।

कब कौन रहा विधायक?

  • 2002 में भाजपा रविंद्र पुंडीर
  • 2007 में बसपा से चंद्रवीर सिंह
  • 2012 में भाजपा से संगीत सोम
  • 2017 में भाजपा से संगीत सोम
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