जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगा। जिसमें हाथरस मामले की जांच शीर्ष अदालत या हाईकोर्ट के मौजूदा या पूर्व जज की निगरानी में सीबीआई या एसआईटी से कराने की गुहार लगाई गई है।
76 वर्षीय पूर्व न्यायिक अधिकारी चंद्रभान सिंह द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि पीड़ित व उसके परिजनों को अंतिम संस्कार के अधिकार से वंचित किया गया।
पीड़िता के अंतिम संस्कार में माता-पिता और भाई को शामिल नहीं होने दिया। हिंदू रीति रिवाज के अनुसार मृतक को उनके सबसे नजदीकी रिश्तेदार मुखाग्नि देते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि मौलिक अधिकार के दायरे में गरिमा के साथ मरने का अधिकार भी शामिल है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस मामले में यूपी के एडीसी से लेकर डीएम व एसपी तक की भूमिका की जांच की जरूरत है। याचिका में यूपी सरकार, डीजीपी, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर), हाथरस के डीएम, एसपी, अडिशनल एसपी और सर्किल ऑफिस को प्रतिवादी बनाया गया है। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई करेगी।
वहीं तामिलनाडु के एक वकील सीआर जयासुकिन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाथरस कांड का हवाला देते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश में मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है, ऐसे में वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए।

