जंगल की आग लहू के फूल बहुत खिल चुके! अब वक्त था पीस लिली के खिलने का! लेकिन यह कुछ लोगों को हजम नहीं हो रहा! जी हां आपको न्यूक्लियर एनर्जी पर इन्वेस्ट करने की कोई जरूरत नहीं! हम बैठे हैं ना आपकी सुरक्षा, संप्रभुता, सीमाओं की गारंटी और वारंटी हमारी जिम्मेदारी, जवाबदेही है। वो बोला, दहाड़ कर बोला, रौब और रूतबे के बलबूते बोला, क्या सचमुच अपना समझ अंतर मन से बोला या था इसके पीछे कुछ और? तुम चिंता क्यों करते हो! हम हैं ना, तुम्हारे अभीष्ट शुभचिंतक मित्र!
नैतिक शिक्षा की एक कहानी याद आ रही थी। एक समृद्ध राजा, जिसकी मित्रता एक बंदर से हो गई थी। नहीं…नहीं हम पिछले बंदर की बात नहीं कर रहे! जिसने बया का घोंसला तोड़ा था। यह लाल मुंह का दूसरी प्रजाति का अमेरिकन बंदर है। जिसने ईरान इस्राइल वार में वाइल्ड कार्ड एंट्री मारी। एक बार राजा बाहर गया और उसने अपने मित्र बंदर से कहा। तुम मेरे बगीचे की देखभाल करना। उन्हें समय-समय पर खाद पानी देते रहना। बंदर बहुत खुश हुआ और राजा के जाते ही राजगद्दी संभाल ली, उसने अपनी टोली बुला ली! सब ने बड़े जतन से बगीचे के एक-एक पौधे को चुन-चुन कर उखाड़ा और भरपूर पानी पिलाया।
यही होता है, जब मूर्ख मित्रों से मित्रता होती है। तब रही सही हरियाली भी रफा दफा होती है। हस्तक्षेप कहां कीजिए? हाशिये पर छोड़े गए हारमोंस जल डमरू पर! आवश्यक हस्तक्षेप अनावश्यक स्थान पर करने पर युद्ध होते ही हैं। हस्तक्षेप की भी एक उचित सीमा, समय, योग्यता, होती है। योग्यता के अभाव में निरंकुशता, एकाधिकार, प्रभुत्व की संभावना कहीं हस्तक्षेप करने वालों के हाथ ही ना काट दे! ऐसे थप्पड़, जिनके लगने पर आदमी रो भी नहीं सकता और चिल्ला भी नहीं सकता! होता है ना ऐसा! जब मधु की आस में कोई मधुमक्खी के छते में हाथ डालता है।
भूल गए,स्पेन के फोड़े ने नेपोलियन को बर्बाद किया, दक्कन के फोड़े ने औरंगजेब को बर्बाद किया! अब ईरानी फोड़ा फूटेगा तो पस अरब सागर तक क्या दूर-दूर तक फैलेगा। शायद जीवन में ऐसे फोड़े ही नासूर बन जाते हैं! जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति के तार उलझ जाते हैं या उलझा दिए जाते हैं। अरेबियन नाइट अरब की ये रात, कर रही है दूसरे राष्ट्रों को भी बर्बाद! दौलत, शोहरत मिली है बहुत! डरना जरूरी है जी! धन जो र्इंधन से बना है। जहां जीवाश्म जमीन में धंसा है। यहां पानी महंगा और खून सस्ता है हूजूर! खोने के लिए कुछ ना बचा हो! उसका कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता। बचना, उस सिरफिरे व्यक्ति और राष्ट्र से जिसने संप्रभुता के लिए सब कुछ खो दिया। दागो और भूल जाओ, जैसी नाग मिसाइल भी उस गरीब का घर नहीं उड़ा सकती, जिसकी रक्षा कोबरा नागिन कर रही हो! अपने खेतों की रक्षा करना उसे आता है। याद रहे अपमानजनक संधि के घाव बहुत घातक होते हैं। फिर चाहे रिश्ता, राजनीति हो या अंतरराष्ट्रीय राजनीति!

