- मंकी पॉक्स को लेकर प्रशासन कोताही बरतने के मूढ में नहीं
- पिछले एक सप्ताह से 500 लोग लौटे हैं विदेश से
- प्रशासन ने जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में सुरक्षित किए बेड
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: दुनिया के 80 देशों में फैल चुके मंकी पॉक्स को लेकर भारत में भी दहशत है। हालांकि इस समय भारत में केवल चार मरीजों में ही इसकी पुष्टि हुई है। जिनमें से तीन केरल व एक दिल्ली में है, लेकिन यूपी सरकार ने इसको लेकर प्रदेश के सभी जिलों में स्वास्थ्य विभाग के लिए निर्देश जारी किए हैं।
पिछले एक सप्ताह से 500 लोग विदेश से लौटे हैं। जिनमें जिलों के सरकारी अस्पतालों में 10-10 बेड सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है। मेरठ में भी जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में मंकी पॉक्स को लेकर अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाए गये हैं। जिनमें मरीजों को रखने व उनके इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध है।

प्यारेलाल जिला अस्पताल में मंकी पॉक्स के मरीजों के लिए अलग से आईसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है। जिसमें अभी पांच बेड सुरक्षित रखे गए हैं। जबकि जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या और बढ़ाई जाएगी। इन बेडों पर आॅक्सीजन से लेकर सेक्शन मशीन और मोनिटर लगाएं गए हैं। जिनसे मरीजों की हर समय निगरानी रखने की तैयारी है। इन बेडों पर भर्ती मरीजों के लिए अलग से स्वास्थ्यकर्मी तैनात है जो मरीजों की हर समय देखभाल करेंगे।
वार्डों में सफाई का विशेष तौर पर ध्यान रखा गया है। इसी तरह की व्यवस्था मेडिकल कॉलेज में भी की गई है। मेरठ मंडलीय नोडल अधिकारी डा. अशोक तालियान ने बताया कि वह हर समय शासन के संपर्क में है। वहां से पूरे भारत के हावाई अड्डों से विदेशों से आने वाले यात्रियों का डाटा भेजा जाता है। क्योंकि यह बीमारी विदेशों में फैल रही है तो इसके लिए बाहर से आने वाले यात्रियों की निगरानी की जा रही है।
एयरपोर्ट से यूपी में आने वाले यात्रियों के पासपोर्ट पर लिखे पते की जानकारी दी जा रही है। पिछले एक सप्ताह में मेरठ में विदेशों से आने वाले यात्रियों की संख्या 500 है, जिनकी निगरानी की जा रही है। यदि कोई भी यात्री मेरठ समेत यूपी के किसी भी जिलें में आता है तो इसकी जानकारी संबंधित जिले के नोडल अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारियों को दी जा रही है। यह राहत की बात है कि यूपी में अभी मांकी पॉक्स का एक भी मरीज सामनें नहीं आया है। लेकिन एहतियात के तौर पर पूरी निगरानी की जा रही है।

