- अंजलि को व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर देख भावुक हुआ परिवार
- कीव में हॉस्टल के बंकर में फंसीं है कैराना की अंजलि पहिवाल
- सिर्फ जीने के लिए 10 मिनट के लिए खाना तैयार करने का समय
जनवाणी संवाददाता।
कैराना: यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित कीव मेडिकल यूनिवर्सिटी का बंकर…! बंकर में 500-600 छात्र-छात्राएं। बंकर से महज 500-600 मीटर की दूरी पर रूस की सेना द्वारा के बम का तेज धमका…और फिर छात्र-छात्राओं की गले में अटकी सांसें। इन सबके बीच जीने भर के लिए खाना बनाने को महज 10 मिनट का समय।

यह सब सुनकर कैसे गुजर रही होगी, उन मां-बाप पर जिनके लाड़ले-लाड़लियां युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसें हैं। कैराना नगर के मोहल्ला आलदरम्यान निवासी बिट्टू पहिवाल की बेटी अंजलि पहिवाल पिछले साल आठ दिसंबर को यूक्रेन की कीव मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की पढ़ाई करने के लिए गई थी।
रूस—यूक्रेन के बीच जंग छिड़ने के बाद यूनिवर्सिटी की ओर से हॉस्टल में रहने वाले भारतीय छात्र-छात्राओं को हॉस्टल के बंकर में जाने के निर्देश जारी कर दिए थे। अंजलि पहिवाल भी वर्तमान में हॉस्टल के बंकर में है।
रविवार को अंजलि ने बताया कि बंकर के अंदर 500-600 भारतीय छात्र मौजूद हैं। एंबेसी से एडवाइजरी जारी की जा रही हैं कि जो जहां हैं, वहीं रहें। छात्र हिमांशु के बड़े भाई रजत चौहान ने कहा कि भारत सरकार केवल उन्हीं छात्रों को ला रही है, जो बॉर्डर के नजदीक हैं।
उन्होंने मांग की है कि भारत सरकार को यूक्रेन के अंदर अलग-अलग स्थानों पर फंसें छात्रों को भी बाहर निकलवाना चाहिए। उसकी दिल्ली मंत्रालय के हेल्पलाइन नंबर पर बात हुई थी। वहां से भी इंतजार करने के लिए कहा गया है। उसने अपने भाई के अकाउंट में 50 हजार रुपये की नगदी डाली थी, लेकिन वह सब बेकार है। एटीएम में पैसा नहीं बचा हैं।

