जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रियल एस्टेट डेवलपर वेव सिटी द्वारा दायर एक शिकायत पर यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है। वेस सिटी ने अपनी याचिका में स्थानीय असामाजिक तत्वों द्वारा विकास कार्यों में निरंतर व्यवधान डालने का आरोप लगाया है। न्यायालय ने मामले को सुनवाई के लिए 27 जनवरी, 2021 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
इस बारे में वेव सिटी, गाजियाबाद के प्रमोटरों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष रिट याचिका दायर की थी और गाजियाबाद की वेव सिटी परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए उचित सहायता और पुलिस सुरक्षा की मांग की है। साथ ही रियल एस्टेट डेवलपर ने राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि को सुरक्षित करने के लिए भी सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।
इस नीति के तहत यूपी सरकार ने मेसर्स उप्पल चड्ढा हाई-टेक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (यूसीएचडी) का चयन किया और उसे ‘वेव सिटी, गाजियाबाद’ में हाई-टेक टाउनशिप के विकास का जिम्मा सौंपा गया। इस परियोजना के लिए आवश्यक भूमि में से, 388.225 एकड भूमि को राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत अधिग्रहित किया था। उक्त अधिग्रहण को अंतिम रूप दे दिया गया है क्योंकि माननीय उच्चतम न्यायालय ने इसे बरकरार रखा है।
हालाँकि इस मामले की सुनवाई से पहले ही लगभग 40 स्थानीय असामाजिक तत्वों के गिरोह ने एक बडा उपद्रव खडा कर दिया, जिससे न सिर्फ इलाके की शांति भंग हुई, बल्कि विकास कार्यों पर भी पूरी तरह रोक लग गई।
उपद्रवियों ने इलाके में निर्मित सडकों को जेसीबी और ट्रैक्टरों के जरिये खोदा डाला और यहां तक कि श्रमिकों को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी। कंपनी ने इस वारदात की जानकारी 08 जनवरी, 2021 को स्थानीय पुलिस को दी।
लगातार हो रही गड़बडि़यों और कंपनी के सामने आने वाली कठिनाइयों का संज्ञान लेते हुए, और राज्य सरकार के नेतृत्व में शुरू किए गए विकास कार्यों को रोकने के स्थानीय उपद्रवियों के प्रयासों को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है।
उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव आवास और शहरी विकास, उत्तर प्रदेश सरकार, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, जिला मजिस्ट्रेट गाजियाबाद, जिला मजिस्ट्रेट गौतमबुद्धनगर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गाजियाबाद और पुलिस आयुक्त गौतमबुद्धनगर को नोटिस जारी किए हैं। कंपनी द्वारा संरक्षण और सहायता के लिए किए गए अनुरोध को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने यह कार्रवाई की है।

